उत्तर प्रदेश

14 और 15 अप्रैल को होगा ' लोकरंग ' का आयोजन

Gulabi Jagat
27 March 2024 4:20 PM IST
14 और 15 अप्रैल को होगा  लोकरंग  का आयोजन
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लखनऊ: सांस्कृतिक भड़ैती, फूहड़पन के विरुद्ध, जनसंस्कृति के संवर्धन के लिए विगत 17 सालों से आयोजित होने वाले लोकरंग इस वर्ष 14 और 15 अप्रैल को जोगिया जनूबी पट्टी में आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन लोकरंग सांस्कृतिक समिति, जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर, जनपद -(कुशीनगर) के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित होता है। लोकसंस्कृति के संवर्धन के लिए इस संस्था ने विदेशों के गिरमिटिया कलाकारों को भी इस आयोजन से जोड़ा है और सात समंदर पार बसे सूरीनाम और नीदरलैंड के कलाकारों को लोकरंग मंच पर उतारा है। इस वर्ष सूरीनाम और नीदरलैंड से पांच सदस्यीय टीम सुप्रसिद्ध सरनामी लोकगायक राजमोहन के नेतृत्व में भाग लेने पहुंच रही है। राजमोहन के अलावा लोकरंग में भाग लेने आ रहे शेष कलाकार पहली बार लोकरंग में शिरकत करेंगे, जिसमें भोजपुरी पॉप रैपर रग्गा मेन्नो, सोंदर हीरा, वरुण नंदा और किशन हीरा की प्रस्तुतियां पहली बार देखने को मिलेंगी। वरुण नंदा, सुप्रसिद्ध सूरनामी ढोलक वादक हैं जबकि सोंदार हीरा ने पूर्वांचल के अहीरवा नाच को सात समंदर पार ज़िंदा रखा हुआ है, जो गिरमिटिया मजदूरों के साथ दो सदी पूर्व सूरीनाम पहुंचा था। लोकरंग आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री सुभाषचंद्र कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हमेशा की तरह लोकरंग कार्यक्रम का उदघाटन 'लोकरंग 2024' पत्रिका के लोकार्पण से शुरू होगा।
परिवर्तन रंगमंडली, जीरादेई, सिवान, बिहार की टीम इस बार दोनों रात लोकगीतों के अलावा नाटक भी प्रस्तुत करेगी। कुशीनगर जनपद का सुप्रसिद्ध पंवरिया नृत्य और किन्नर नृत्य भी देखने को मिलेगा। लोकरंग में पहली बार असम का बागुरुंबा, बोडो और भोरताल नृत्य प्रस्तुत किया जायेगा। सिक्किम की सांस्कृतिक टीम पहली बार आमंत्रित की गई है। ताल म्यूज़िक एण्ड डांस अकादमी, नामची सिक्किम द्वारा तमांग सेलो, मारूनी और कोडा डांस प्रस्तुत किया जायेगा। राजस्थान के तमाम परंपरागत लोक वाद्य यंत्रों की ध्वनि इस बार लोकरंग में गूंजेगी तो परंपरागत राजस्थानी नृत्य भी देखने को मिलेगा। चंदा लाक कालबेलिया एण्ड पार्टी जयपुर, राजस्थान को इस बार आमंत्रित किया गया है।'भाई विरोध ' और 'दगा हो गए बालम ' दो नाटक मंचित किए जाएंगे, जो परिवर्तन रंगमण्डली, जीरदेई , सिवान (बिहार) द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।15 अप्रैल को प्रातः 11 बजे से विचार गोष्ठी आयोजित की गई है जिसका विषय है ' लोक संस्कृति के समावेशी तत्व '। इस गोष्ठी में देश के तमाम प्रसिद्ध साहित्यकार , प्रोफ़ेसर और अध्यापक शामिल होंगे।
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