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गोरखपुर हत्याकांड में पिता समेत तीन भाइयों को उम्रकैद

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में जमीन विवाद को लेकर हुई हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार राना की अदालत ने हत्या के दोषी पिता और उसके तीन बेटों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर कुल 13 हजार 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला पिपराइच थाना क्षेत्र के बेला कांटा गांव का है, जहां वर्ष 2016 में जमीन विवाद के चलते राधेश्याम पासवान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्तों को दोषी पाया। दोषियों में बेला कांटा निवासी राजेंद्र पासवान और उनके तीन बेटे ओमप्रकाश उर्फ प्रकाश, मुरारी पासवान उर्फ मुराली और जितेंद्र पासवान शामिल हैं। कोर्ट ने हत्या जैसे गंभीर अपराध में सजा सुनाते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को साबित करते हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता श्रद्धानंद पांडेय और रविंद्र सिंह ने अदालत में मामले की पैरवी की। अभियोजन के अनुसार, घटना 29 जून 2016 की शाम करीब 6 बजकर 40 मिनट की है। उस समय शिकायतकर्ता विश्वजीत पासवान बेला कांटा चौराहे पर मौजूद था। इसी दौरान उसे अपनी भाभी रेनू पासवान का फोन आया और उन्होंने बताया कि उसके पिता राधेश्याम पासवान को पड़ोसी राजेंद्र पासवान और उनके तीन बेटे जमीन विवाद को लेकर मारपीट कर रहे हैं।
सूचना मिलते ही विश्वजीत पासवान मौके पर पहुंचा। वहां उसने देखा कि उसके पिता राधेश्याम पासवान छत पर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े हुए थे। विश्वजीत जब अपने पिता को संभालने और बचाने का प्रयास करने लगा, तो आरोपियों ने उसके साथ भी गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपियों ने लात-घूंसे से उसे बुरी तरह पीटा और जान से मारने की नीयत से कुदाल लेकर उसके पीछे दौड़ पड़े।
विश्वजीत ने किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचाई। ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर उसकी मदद की। इसके बाद घायल राधेश्याम पासवान को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया।
अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। परिवार का कहना है कि वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अब उन्हें इंसाफ मिला है। वहीं, अदालत के इस फैसले को अपराध के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
गोरखपुर के इस मामले में जमीन विवाद ने एक परिवार की जिंदगी बदल दी थी। छोटी सी कहासुनी और विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई। अदालत ने अपने फैसले के जरिए यह स्पष्ट किया है कि किसी भी विवाद का समाधान कानून के जरिए होना चाहिए और हिंसा करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।





