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उत्तर प्रदेश
चिड़ियाघर में तेंदुए मुराद की मौत, हार्ट अटैक बना कारण
Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 10:22 PM IST

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर प्राणी उद्यान में बुधवार तड़के तेंदुए 'मुराद' की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट को उसकी मौत की संभावित वजह माना जा रहा है। तेंदुआ पिछले कई दिनों से बीमार था और प्राणी उद्यान के पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था। बताया जा रहा है कि मुराद ने अपने बाड़े में खुद को घायल कर लिया था। घाव के बार-बार ताजा होने के कारण उसके शरीर में गंभीर संक्रमण विकसित हो गया था। पशु चिकित्सकों ने सेप्टीसीमिया की समस्या भी सामने आने की जानकारी दी है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही हो सकेगी।
तेंदुए की मौत के बाद प्राणी उद्यान प्रशासन ने आवश्यक चिकित्सकीय और विभागीय प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं। उसके शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ऊतकों के नमूने जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली भेजने की तैयारी की जा रही है।
दो महीने पहले मुरादाबाद से लाया गया था तेंदुआ
तेंदुए मुराद को लगभग दो महीने पहले मुरादाबाद से रेस्क्यू कर कानपुर प्राणी उद्यान लाया गया था। वन विभाग की ओर से पकड़े जाने के बाद उसे सुरक्षित देखभाल और आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी के लिए चिड़ियाघर में रखा गया था।रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को नए वातावरण में ढलने में कई बार समय लगता है। विशेष रूप से तेंदुए जैसे जंगली जानवरों के व्यवहार, खानपान और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी आवश्यक होती है।मुराद को भी प्राणी उद्यान में रखकर उसकी देखभाल की जा रही थी। हालांकि, कुछ समय बाद उसके घायल होने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आने की जानकारी मिली।
बाड़े में खुद को घायल कर लिया था तेंदुए ने
प्राणी उद्यान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मुराद ने अपने बाड़े में खुद को घायल कर लिया था। चोट लगने के बाद पशु चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया।बताया जा रहा है कि तेंदुआ बार-बार अपने घाव को ताजा कर लेता था, जिससे घाव भरने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके बाद संक्रमण की समस्या गंभीर होने लगी।पशु चिकित्सकों की ओर से उसे उपचार के लिए पशु चिकित्सालय में रखा गया था। उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही थी।हालांकि, उपचार के बावजूद तेंदुए की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और बुधवार तड़के उसकी मौत हो गई।
सेप्टीसीमिया ने बढ़ाई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी
मुराद की मौत के मामले में सेप्टीसीमिया को महत्वपूर्ण चिकित्सकीय कारण माना जा रहा है।सेप्टीसीमिया रक्तप्रवाह में संक्रमण से जुड़ी गंभीर स्थिति है। संक्रमण के कारण शरीर में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न हो सकती है, जिससे विभिन्न अंगों के सामान्य कार्य प्रभावित होने का खतरा रहता है।गंभीर संक्रमण की स्थिति में पशु की शारीरिक क्षमता कमजोर हो सकती है और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ती है।तेंदुए मुराद के मामले में घाव के बार-बार ताजा होने और संक्रमण बढ़ने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि संक्रमण ने उसके शरीर के किन अंगों को प्रभावित किया था।इसका विस्तृत आकलन पोस्टमार्टम और प्रयोगशाला जांच के आधार पर किया जाएगा।
कार्डियक अरेस्ट से मौत की आशंका
मुराद की मौत का प्रारंभिक कारण कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। कार्डियक अरेस्ट ऐसी स्थिति है, जिसमें हृदय अचानक प्रभावी ढंग से रक्त पंप करना बंद कर देता है।गंभीर संक्रमण सहित कई चिकित्सकीय स्थितियां हृदय की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं।हालांकि, केवल कार्डियक अरेस्ट होने की जानकारी से मृत्यु के मूल कारण का पता नहीं चलता। इसके लिए पशु के स्वास्थ्य इतिहास, उपचार संबंधी जानकारी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विश्लेषण आवश्यक होता है।प्राणी उद्यान प्रशासन की ओर से मृत्यु के सही कारण की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच कराने की तैयारी की जा रही है।
आईवीआरआई बरेली भेजे जाएंगे ऊतकों के नमूने
तेंदुए की मौत के बाद उसके शरीर के ऊतकों के नमूने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली भेजने की तैयारी है।यह संस्थान पशुओं से संबंधित विभिन्न बीमारियों, संक्रमण और चिकित्सकीय समस्याओं के अध्ययन तथा परीक्षण के लिए जाना जाता है।नमूनों के परीक्षण से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि तेंदुए के शरीर में किस प्रकार का संक्रमण था और उसका स्वास्थ्य पर कितना प्रभाव पड़ा।जांच रिपोर्ट के आधार पर यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि मौत के पीछे सेप्टीसीमिया की कितनी भूमिका रही।
पहले भी चिड़ियाघर में हो चुकी हैं वन्यजीवों की मौतें
कानपुर प्राणी उद्यान में हाल के दिनों में अन्य वन्यजीवों की मौत के मामले भी सामने आए हैं।अक्टूबर 2026 में चिड़ियाघर में चार काले हिरणों की मौत हुई थी। शुरुआती जांच में संक्रमण से संबंधित समस्याएं सामने आई थीं।इस मामले में भी भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर के विशेषज्ञों की सहायता ली गई थी। विशेषज्ञों ने पशुओं की बीमारी से संबंधित जांच की थी।इन घटनाओं के बाद प्राणी उद्यान में वन्यजीवों की नियमित स्वास्थ्य जांच, संक्रमण की रोकथाम और चिकित्सकीय निगरानी का महत्व और बढ़ गया है।हालांकि, मुराद की मौत और पहले हुई अन्य पशुओं की मौतों के बीच किसी चिकित्सकीय संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों की देखभाल चुनौतीपूर्ण
जंगल से रेस्क्यू किए गए तेंदुए जैसे वन्यजीवों की देखभाल विशेषज्ञता की मांग करती है।प्राकृतिक वातावरण से अलग स्थान पर रखे जाने के बाद कुछ जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन दिखाई दे सकता है। ऐसे जानवरों के लिए सुरक्षित बाड़ा, उचित पोषण, चिकित्सकीय निगरानी और तनाव कम करने वाली व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं।रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को रखने वाले संस्थानों के सामने उनकी शारीरिक सुरक्षा के साथ व्यवहार संबंधी जरूरतों को समझने की चुनौती भी रहती है।मुराद के खुद को घायल करने की घटना के पीछे क्या परिस्थितियां थीं, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण
तेंदुए मुराद की मौत के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल उसके स्वास्थ्य में अचानक आई गंभीर गिरावट का है।प्रारंभिक तौर पर कार्डियक अरेस्ट और सेप्टीसीमिया की भूमिका बताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण के लिए चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक है।प्राणी उद्यान प्रशासन पोस्टमार्टम और ऊतकों की जांच के आधार पर मृत्यु का कारण स्पष्ट कर सकेगा।
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