उत्तर प्रदेश

निकाह से पहले सीखेंगे सफल वैवाहिक जीवन के गुर, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू

Ratna Netam
5 Aug 2026 9:33 PM IST
निकाह से पहले सीखेंगे सफल वैवाहिक जीवन के गुर, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू
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लखनऊ: वैवाहिक जीवन को अधिक मजबूत, संतुलित और विवादों से मुक्त बनाने की दिशा में जमीअत उलमा-ए-हिंद ने एक नई पहल की है। संगठन ने निकाह से पहले युवकों और युवतियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य पति-पत्नी के बीच बेहतर समझ विकसित करना, पारिवारिक विवादों को कम करना, रिश्तों में सामंजस्य बढ़ाना तथा तलाक और खुला (पत्नी की ओर से मांगा जाने वाला वैवाहिक विच्छेद) जैसी परिस्थितियों को रोकना है। यह प्रशिक्षण केवल विवाह से पहले के युवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहले से विवाहित दंपतियों के लिए भी उपलब्ध होगा।

जमीअत उलमा-ए-हिंद का दावा है कि यह अपनी तरह की पहली संगठित पहल है, जिसमें विवाह और पारिवारिक जीवन से जुड़े सामाजिक तथा धार्मिक पहलुओं पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। खास बात यह है कि संगठन के अधिकांश कार्यक्रम जहां निशुल्क होते हैं, वहीं इस प्रशिक्षण के लिए नाममात्र का शुल्क निर्धारित किया गया है। इच्छुक प्रतिभागियों का पंजीकरण गूगल फॉर्म के माध्यम से कराया जा रहा है। मस्जिदों के इमामों से भी अपील की गई है कि वे समुदाय के युवाओं और परिवारों को इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। अब तक बड़ी संख्या में लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी जमीअत उलमा-ए-हिंद के **महकमा-ए-शरिया (शरई अदालत)** और **इस्लाह-ए-मआशरा (समाज सुधार प्रकोष्ठ)** को सौंपी गई है। प्रतिभागियों के लिए विशेष अध्ययन सामग्री भी तैयार की गई है, जिसे कार्यशाला के दौरान वितरित किया जाएगा। कार्यक्रम में पारिवारिक मामलों के जानकार विशेषज्ञ, धार्मिक विद्वान और वैवाहिक परामर्शदाता विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन देंगे।

जमीअत के अनुसार, हाल के वर्षों में शरई पंचायतों में आने वाले मामलों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि पति की ओर से दिए जाने वाले तलाक के मामलों की तुलना में पत्नी की ओर से **खुला** की मांग अधिक बढ़ रही है। इसके साथ ही यह भी पाया गया कि अधिकांश वैवाहिक विवाद केवल पति-पत्नी के बीच नहीं होते, बल्कि उनमें सास, ससुर, ननद और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। कई मामलों में शादी के बाद अलग घर में रहने की इच्छा भी पारिवारिक तनाव का कारण बन रही है।

जमीअत उलेमा उत्तर प्रदेश के महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासिमी ने कहा कि केवल विवाद होने के बाद उनका समाधान निकालना पर्याप्त नहीं है। बेहतर यह होगा कि विवाद पैदा ही न हों। इसी सोच के साथ **‘तरबियत-ए-जौजेन’ (दंपति प्रशिक्षण)** कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि यह विशेष कार्यशाला 8 और 9 अगस्त को आयोजित होगी, जिसमें पूरे दिन विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यशाला में वैवाहिक जीवन के इस्लामी सिद्धांतों के साथ-साथ पति-पत्नी के अधिकार एवं कर्तव्य, प्रभावी संवाद की कला, मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की तकनीक, भावनात्मक संतुलन, संयुक्त परिवार में सामंजस्य बनाए रखने के उपाय और स्वस्थ पारिवारिक वातावरण तैयार करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए जाएंगे। आयोजकों का मानना है कि यदि विवाह से पहले ही युवाओं को इन विषयों की सही जानकारी मिल जाए तो भविष्य में उत्पन्न होने वाले कई विवादों से बचा जा सकता है।

महकमा-ए-शरिया व दारुल कजा कानपुर के अध्यक्ष मुफ्ती अब्दुर्रशीद कासिमी ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में **‘फैमिली फर्स्ट गाइडेंस, मुंबई’** के संस्थापक मुफ्ती अशफाक काजी विशेषज्ञ के रूप में शामिल होंगे। वे आधुनिक पारिवारिक चुनौतियों और इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप उनके समाधान पर विस्तार से मार्गदर्शन देंगे।

जमीअत का कहना है कि मजबूत, खुशहाल और संतुलित परिवार ही एक स्वस्थ समाज की आधारशिला होते हैं। इसलिए यह पहल केवल धार्मिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुधार और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। संगठन को उम्मीद है कि इस तरह की कार्यशालाओं से वैवाहिक जीवन में आपसी विश्वास बढ़ेगा, पारिवारिक विवाद कम होंगे और समाज में स्थायी शांति एवं सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा।

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