उत्तर प्रदेश

पांच-छह फीट पानी में डूबी कोनिया की गलियां, नाव बनी जिंदगी का सहारा

Kavita2
4 Sept 2026 5:49 PM IST
पांच-छह फीट पानी में डूबी कोनिया की गलियां, नाव बनी जिंदगी का सहारा
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कोनिया। कभी बच्चों की आवाजों, लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा की चहल-पहल से भरी रहने वाली कोनिया की गलियां इन दिनों गहरे पानी में डूबी हुई हैं। हालात ऐसे हैं कि गलियों और रास्तों का पता तक नहीं चल रहा। करीब पांच से छह फीट गहरे पानी ने सड़कों, सीढ़ियों और घरों के दरवाजों को अपने आगोश में ले लिया है। अब यहां पैदल चलना तो दूर, कई जगहों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

नाव धीरे-धीरे पानी को चीरती हुई आगे बढ़ती है। दोनों तरफ मकान दिखाई देते हैं, लेकिन उनके दरवाजे नजर नहीं आते। घरों के बाहर बने रास्ते और सीढ़ियां पूरी तरह पानी के भीतर समा चुकी हैं। कहीं किसी खिड़की से कोई चेहरा बाहर झांकता दिखाई देता है तो कहीं पहली मंजिल की बालकनी में खड़ी महिलाएं नीचे फैले पानी को देखती नजर आती हैं।

यह दृश्य बताता है कि बाढ़ ने किस तरह सामान्य जनजीवन को पूरी तरह बदल दिया है। जिन गलियों में कभी बच्चे खेलते थे और लोग पैदल आते-जाते थे, वहां अब नावों की आवाजाही हो रही है।

पानी में डूबे घर और वाहन

कोनिया में जलभराव इतना अधिक है कि घरों के आसपास का पूरा इलाका पानी में डूब चुका है। कई मकानों के निचले हिस्से तक पानी पहुंच गया है। घरों के बाहर बनी सीढ़ियां पानी में दिखाई नहीं दे रही हैं। गैरेज में खड़ी कारें भी पानी में डूबी हुई हैं।

लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अपने घरों से बाहर निकलकर जरूरी सामान भी आसानी से नहीं ला सकते। सड़क और गलियों का रास्ता पानी में डूब जाने के कारण नाव ही आवागमन का प्रमुख माध्यम बन गई है।

पहली मंजिल पर रह रहे परिवार नीचे पानी के घटने का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने घर के ऊपरी हिस्से में ही अपने लिए जरूरी सामान जमा कर रखा है। नीचे पानी और ऊपर सीमित जगह में गुजरती जिंदगी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

नाव से पहुंच रही दवा और राशन

बाढ़ की इस स्थिति में नावें केवल आवागमन का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि लोगों की जरूरतों का महत्वपूर्ण सहारा बन गई हैं। एक नाव जब किसी घर या सुरक्षित स्थान के पास किनारे लगती है तो उसमें से कोई दवा की पुड़िया लेकर उतरता दिखाई देता है तो कोई राशन का थैला संभालते हुए बाहर आता है।

जरूरी सामान लेकर लोग पानी में रास्ता तलाशते हुए घरों तक पहुंचते हैं। कई जगहों पर नाव से उतरने के बाद भी कुछ दूरी तक पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इसके बाद सीढ़ियां आती हैं और लोग ऊपर स्थित अपने घरों तक पहुंचते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में हर कदम पर सावधानी बरतनी पड़ती है। गहरे पानी के कारण सामान्य रास्तों और सीढ़ियों का पता नहीं चलता। पानी के नीचे क्या है, यह दिखाई नहीं देने के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

पहली मंजिल पर सिमटी जिंदगी

कोनिया में इस समय जिंदगी का बड़ा हिस्सा घरों की पहली मंजिल तक सीमित हो गया है। नीचे पांच से छह फीट पानी जमा है और ऊपर परिवार किसी तरह अपना रोजमर्रा का जीवन चला रहे हैं।

महिलाएं बालकनी और खिड़कियों से नीचे के हालात देख रही हैं। बच्चों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं। जिन घरों में बुजुर्ग या बीमार लोग हैं, वहां उनकी जरूरतों को पूरा करना परिवारों के लिए और मुश्किल हो गया है।

लोगों की चिंता सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं है। दवाइयों, पीने के पानी और अन्य जरूरी सामान की जरूरत लगातार बनी रहती है। ऐसे में नाव के जरिए राहत और जरूरी सामग्री पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

गलियों में चप्पुओं की आवाज

बाढ़ ने इलाके की पहचान ही बदल दी है। जिन रास्तों पर सामान्य दिनों में लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब नावें चल रही हैं। बच्चों की आवाजों और वाहनों के शोर की जगह नाव के चप्पुओं की आवाज सुनाई देती है।

पानी के बीच घरों को देखकर ऐसा लगता है जैसे पूरा इलाका किसी जलमग्न बस्ती में बदल गया हो। कहीं घर की खिड़की से लोग बाहर देख रहे हैं तो कहीं बालकनी में खड़े परिवार नीचे पानी की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

स्थानीय लोगों के लिए यह केवल जलभराव नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाला गंभीर संकट है। पानी जितने लंबे समय तक जमा रहेगा, लोगों की परेशानियां भी उतनी ही बढ़ती जाएंगी।

सीढ़ियों के बीच बेबसी का सफर

कोनिया की तस्वीर को सबसे सटीक तरीके से उन सीढ़ियों के जरिए समझा जा सकता है, जो नीचे गहरे पानी और ऊपर घरों के बीच एकमात्र रास्ता बनी हुई हैं। नाव से उतरने के बाद लोग सीढ़ियों के सहारे ऊपर पहुंचते हैं। नीचे पानी है और ऊपर परिवारों का बसेरा।

एक तरफ घरों को छोड़कर कहीं और जाने की मजबूरी है, तो दूसरी तरफ घर छोड़ना भी आसान नहीं है। सामान, जरूरी कागजात, घरेलू वस्तुएं और रोजमर्रा की जरूरतों के कारण लोग अपने घरों में ही टिके हुए हैं।

सामान्य जीवन की वापसी का इंतजार

कोनिया के लोग अब पानी उतरने और सामान्य जिंदगी लौटने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जलस्तर कम होने के बाद गलियां फिर दिखाई देंगी, घरों के दरवाजे पानी से बाहर आएंगे और बच्चों की आवाजें दोबारा सुनाई देंगी।

फिलहाल नाव ही इस जलमग्न बस्ती की सबसे जरूरी जरूरत बन गई है। दवा हो या राशन, लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लिया जा रहा है।

पांच से छह फीट पानी में डूबी गलियां, पानी में गायब सीढ़ियां, डूबे वाहन और पहली मंजिल पर सिमटी जिंदगी कोनिया में आई बाढ़ की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। नीचे पानी और ऊपर घरों के बीच फंसी जिंदगी इस वक्त बेबसी, इंतजार और उम्मीद के सहारे आगे बढ़ रही है।

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