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बरियारपुर: वफादारी और साहस की मिसाल पेश करते हुए एक पालतू जर्मन शेफर्ड कुतिया ने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। बरियारपुर गांव में जर्मन शेफर्ड नस्ल की कुतिया ‘काजल’ ने घर की चारदीवारी में घुसे जहरीले सांप से घंटों तक संघर्ष किया और आखिरकार उसे मार गिराया, लेकिन इस दौरान वह खुद गंभीर रूप से घायल हो गई। गुरुवार सुबह काजल ने दम तोड़ दिया।
इस घटना के बाद पूरे गांव में काजल की बहादुरी की चर्चा हो रही है। ग्रामीण इसे एक बेजुबान जानवर की वफादारी और परिवार के प्रति समर्पण की मिसाल बता रहे हैं।
बरियारपुर गांव निवासी आयुष तिवारी ने अपने घर की सुरक्षा के लिए जर्मन शेफर्ड नस्ल की कुतिया पाल रखी थी। उन्होंने उसका नाम प्यार से ‘काजल’ रखा था। काजल पिछले काफी समय से परिवार के साथ रह रही थी और घर की रखवाली करती थी।
परिवार के अनुसार, घटना उस समय हुई जब घर की चारदीवारी में अचानक एक जहरीला सांप घुस आया। सांप के खतरे को भांपते ही काजल सतर्क हो गई और उसने बिना देर किए सांप का सामना करना शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि काजल ने काफी देर तक सांप से संघर्ष किया। उसने अपने साहस से सांप को घर के अंदर आगे बढ़ने से रोके रखा। संघर्ष के दौरान उसने सांप को पकड़ लिया और आखिरकार उसे मार गिराया।
हालांकि, इस दौरान जहरीले सांप के संपर्क में आने से काजल की हालत बिगड़ गई। परिवार वालों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन जहर का असर अधिक होने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
गुरुवार सुबह काजल ने अंतिम सांस ली। उसकी मौत से आयुष तिवारी और उनका परिवार बेहद दुखी है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि काजल ने जिस तरह से अपनी जान जोखिम में डालकर उनकी रक्षा की, उसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।
आयुष तिवारी ने बताया कि काजल केवल एक पालतू जानवर नहीं थी, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह थी। वह हमेशा घर की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहती थी और किसी भी अनजान गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देती थी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोग भी आयुष के घर पहुंचे और काजल की बहादुरी की सराहना की। ग्रामीणों ने कहा कि एक बेजुबान जानवर ने अपने मालिकों के प्रति ऐसी निष्ठा दिखाई, जो इंसानों के लिए भी प्रेरणा है।
जर्मन शेफर्ड नस्ल के कुत्ते अपनी समझदारी, सतर्कता और सुरक्षा क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इन्हें अक्सर घरों की सुरक्षा के लिए पाला जाता है। काजल ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए परिवार को संभावित खतरे से बचाने के लिए अपनी जान दे दी।
विशेषज्ञों के अनुसार, पालतू जानवर अपने मालिकों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं और कई बार खतरे की स्थिति में अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना परिवार की रक्षा करते हैं। काजल की घटना इसी लगाव और वफादारी का उदाहरण है।
परिवार ने बताया कि काजल की कमी उन्हें हमेशा महसूस होगी। उन्होंने कहा कि उसने जिस तरह से परिवार की रक्षा की, वह उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसान और पालतू जानवरों के बीच का रिश्ता केवल देखभाल तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार यह रिश्ता त्याग और सुरक्षा की भावना तक पहुंच जाता है।
बरियारपुर गांव में अब काजल की बहादुरी की चर्चा हर किसी की जुबान पर है। एक जहरीले सांप से लड़कर परिवार को बचाने वाली इस जर्मन शेफर्ड ने भले ही अपनी जान गंवा दी, लेकिन अपनी वफादारी और साहस से वह हमेशा के लिए यादों में बस गई।





