उत्तर प्रदेश

वाराणसी में 2000 करोड़ के कफ सीरप तस्करी केस में 17 पर गैंगस्टर कार्रवाई

Kavita2
17 July 2026 12:31 PM IST
वाराणसी में 2000 करोड़ के कफ सीरप तस्करी केस में 17 पर गैंगस्टर कार्रवाई
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वाराणसी: वाराणसी में दो हजार करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 आरोपितों को गैंगस्टर एक्ट के तहत निरुद्ध किया है। कोतवाली पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कफ सीरप तस्करी से जुड़े गिरोह पर शिकंजा और मजबूत हो गया है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का संचालन संगठित तरीके से किया जा रहा था और इसका सरगना खोजवां भेलूपुर निवासी दिवेश जायसवाल बताया गया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कफ सीरप तस्करी का यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में था। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपितों ने कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क बनाकर प्रतिबंधित कफ सीरप की खरीद-बिक्री और तस्करी को अंजाम दिया। इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार किए जाने की जानकारी मिली थी।

कोतवाली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के सदस्य आर्थिक लाभ के लिए गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे और उन्होंने समाज में नशीले पदार्थों के प्रसार को बढ़ावा देने का काम किया।

पुलिस जांच में गिरोह के काम करने के तरीके और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की गई। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह में शामिल लोग अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां निभाते थे। कुछ लोग कफ सीरप की व्यवस्था करने, कुछ लोग उसे पहुंचाने और कुछ लोग बिक्री नेटवर्क से जुड़े हुए थे।

गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे संगठित अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण करना है। इस कानून के तहत पुलिस को आरोपितों की अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने और उनकी संपत्तियों की जांच करने का अधिकार मिलता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी भी जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में लगी है कि तस्करी का नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ था।

दिवेश जायसवाल को इस गिरोह का मुख्य संचालक बताया गया है। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और जांच में सामने आई जानकारियों के आधार पर उसे गिरोह का सरगना माना गया है।

कफ सीरप तस्करी का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि ऐसे पदार्थों का गलत इस्तेमाल युवाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। पुलिस और प्रशासन लगातार ऐसे अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की कोशिश है कि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जाए, ताकि शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

स्थानीय स्तर पर भी पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में प्रतिबंधित दवाओं या नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। लोगों की मदद से ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

वाराणसी पुलिस की इस कार्रवाई को कफ सीरप तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। 17 आरोपितों पर गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद अब पुलिस गिरोह की आर्थिक गतिविधियों और अन्य सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

जांच एजेंसियां आरोपितों के बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य लेन-देन की भी जांच कर सकती हैं, ताकि अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति का पता लगाया जा सके।

पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। वाराणसी में इतनी बड़ी रकम से जुड़े कफ सीरप तस्करी मामले में हुई यह कार्रवाई अपराधियों के लिए कड़ा संदेश मानी जा रही है।

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