उत्तर प्रदेश

फाइटर पायलट से राम मंदिर के CEO तक जीतेंद्र मिश्रा का शानदार सफर

Ratna Netam
2 Sept 2026 5:32 PM IST
फाइटर पायलट से राम मंदिर के CEO तक जीतेंद्र मिश्रा का शानदार सफर
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त **एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा** को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। बुधवार, 2 सितंबर 2026 को अयोध्या के मणिराम दास छावनी में हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी। करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवा दे चुके मिश्रा की पहचान केवल एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के रूप में नहीं है। वह **ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख** थे और कारगिल युद्ध के समय भी महत्वपूर्ण सैन्य भूमिका निभा चुके हैं।
एयर मार्शल मिश्रा की नियुक्ति इसलिए भी खास है क्योंकि राम मंदिर ट्रस्ट में पहली बार पेशेवर पूर्णकालिक CEO की व्यवस्था की गई है। मंदिर में रोजाना आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, कर्मचारियों, निर्माण कार्य और अलग-अलग सरकारी व निजी एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियों को देखते हुए ट्रस्ट ने अनुभवी प्रशासक की तलाश की थी। मिश्रा का लंबा सैन्य और प्रशासनिक अनुभव उनके चयन की बड़ी वजह माना जा रहा है।
5,585 आवेदनों में चुना गया जितेंद्र मिश्रा का नाम
राम मंदिर के पहले CEO का चयन सामान्य नियुक्ति प्रक्रिया नहीं थी। इस पद के लिए देशभर से **5,585 आवेदन** आए थे। इसके बाद उम्मीदवारों को कई स्तर की स्क्रीनिंग और इंटरव्यू प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक आवेदनों की जांच के लिए 600 अंकों का मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया था। शुरुआती मूल्यांकन में 3,577 उम्मीदवार शामिल हुए। इसके बाद निर्धारित अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया।
11 और 12 अगस्त को 108 उम्मीदवारों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की गई। इसके बाद अंतिम चरण के लिए 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू हुआ और आखिर में तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए गए। बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर विचार के बाद जितेंद्र मिश्रा को जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के बेहद अनुभवी फाइटर पायलट और वरिष्ठ कमांडर रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उन्हें **6 दिसंबर 1986** को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। लगभग चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने ऑपरेशनल फ्लाइंग से लेकर रणनीतिक योजना और उच्चस्तरीय सैन्य प्रशासन तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
वह नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व छात्र हैं। इसके अलावा उन्होंने एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज अमेरिका और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण लिया।
मिश्रा के पास **3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव** है और अपने सैन्य करियर में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए।
फाइटर कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट भी रहे
जितेंद्र मिश्रा केवल लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पायलट नहीं रहे बल्कि उन्होंने **फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट** के तौर पर भी काम किया।
टेस्ट पायलट की भूमिका वायुसेना में बेहद महत्वपूर्ण और तकनीकी मानी जाती है। इसमें विमान की क्षमता, उड़ान व्यवहार और नई तकनीक से जुड़े परीक्षण शामिल होते हैं।
मिश्रा के सैन्य अनुभव में उड़ान के साथ रणनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी लंबा रिकॉर्ड है। वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में ऑपरेशंस से जुड़े डिप्टी चीफ की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा डॉक्ट्रिन, ऑर्गेनाइजेशन और ट्रेनिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी उनके पास रही।
यही अनुभव अब राम मंदिर जैसे विशाल परिसर के संचालन में काम आ सकता है।
कारगिल युद्ध से भी रहा खास कनेक्शन
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय **1999 का कारगिल युद्ध** है।
रिपोर्टों के मुताबिक उस समय स्क्वाड्रन लीडर के रूप में वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने मिराज-2000 विमान पर **लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने** में भूमिका निभाई थी।
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपने अभियान को **ऑपरेशन सफेद सागर** नाम दिया था।
मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेजर गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों के खिलाफ किया गया था। मिश्रा का नाम उस तकनीकी-ऑपरेशनल टीम से जुड़ा रहा जिसने इस क्षमता को इस्तेमाल के लिए तैयार करने में योगदान दिया।
इस तरह उनके सैन्य करियर में कारगिल से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक लगभग ढाई दशक के अंतराल में दो बेहद महत्वपूर्ण दौर शामिल रहे।
2025 में संभाली पश्चिमी वायु कमान
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर का सबसे बड़ा कमांड पद भारतीय वायुसेना की **Western Air Command यानी पश्चिमी वायु कमान** का नेतृत्व रहा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक उन्होंने **1 जनवरी 2025** को पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला था।
पश्चिमी वायु कमान भारतीय वायुसेना की रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण कमानों में गिनी जाती है। इसके जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में देश की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं से जुड़े संवेदनशील इलाके आते हैं।
इसी पद पर रहते हुए मिश्रा को मई 2025 में **ऑपरेशन सिंदूर** के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी पड़ी।
ऑपरेशन सिंदूर से क्या है कनेक्शन?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर से सीधे तौर पर जुड़ा है।
अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। उस दौरान मिश्रा भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।
इस वजह से पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन में उनकी कमांड भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
रिटायरमेंट के बाद अगस्त 2026 में एक पॉडकास्ट में मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई सैन्य पहलुओं पर भी चर्चा की थी और पाकिस्तान की वायुसेना को हुए नुकसान को लेकर भारतीय पक्ष की जानकारी साझा की थी।
यही कारण है कि राम मंदिर के CEO के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद उनकी ऑपरेशन सिंदूर वाली भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है।
सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित
ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को **सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM)** से सम्मानित किया गया। यह युद्धकालीन परिस्थितियों में असाधारण विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाने वाला भारत का अत्यंत प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान है।
इसके अलावा मिश्रा को **अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)** और **विशिष्ट सेवा मेडल (VSM)** भी मिल चुके हैं।
ये सम्मान उनके लंबे सैन्य करियर और उच्चस्तरीय नेतृत्व की तस्वीर पेश करते हैं।
करीब 40 साल की सेवा के बाद हुए रिटायर
मिश्रा 1 जनवरी 2025 को पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख बने थे और उपलब्ध ताजा प्रोफाइल के मुताबिक **30 अप्रैल 2026** को इस पद से सेवानिवृत्त हुए।
इस तरह दिसंबर 1986 में कमीशन मिलने से लेकर अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्ति तक उनका सैन्य सफर करीब चार दशक लंबा रहा।
वायुसेना से रिटायरमेंट के कुछ ही महीने बाद अब उन्हें राम मंदिर के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है।
सैन्य कमान से धार्मिक-सांस्कृतिक संस्थान के प्रशासन तक पहुंचना उनके करियर में बिल्कुल नया अध्याय है।
देवरिया से भी जुड़ी हैं जड़ें
रिपोर्ट के मुताबिक एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के **देवरिया जिले के भाटपार रानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव** से जुड़े हैं।
उत्तर प्रदेश से पारिवारिक जुड़ाव और करीब चार दशक का सैन्य अनुभव अब उन्हें अयोध्या में नई भूमिका तक लेकर आया है।
उनकी नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को अधिक पेशेवर बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राम मंदिर CEO के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारी किसी सामान्य कार्यालय के प्रशासन तक सीमित नहीं होगी।
अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में **श्रद्धालुओं की आवाजाही, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारी प्रबंधन, मंदिर परिसर की सुविधाएं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय** CEO के सामने प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होंगे।
इसके अलावा मंदिर परिसर में जारी और प्रस्तावित निर्माण कार्यों की निगरानी तथा ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
मिश्रा ने सैन्य सेवा के दौरान बड़े संगठनों, जटिल ऑपरेशनों और कई एजेंसियों के बीच समन्वय का अनुभव हासिल किया है। ट्रस्ट अब इसी अनुभव का इस्तेमाल मंदिर प्रबंधन में करना चाहता है।
सुरक्षा अनुभव भी आ सकता है काम
राम मंदिर देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां सुरक्षा के कई स्तर हैं और राज्य तथा केंद्रीय एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय की जरूरत रहती है।
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य बैकग्राउंड इस लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि मंदिर की सुरक्षा सीधे अलग-अलग सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आती है, लेकिन मंदिर प्रशासन की ओर से उनके साथ प्रभावी समन्वय CEO की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
पश्चिमी वायु कमान जैसे विशाल सैन्य संगठन का नेतृत्व कर चुके मिश्रा के पास संकट प्रबंधन, संसाधन प्रबंधन और अलग-अलग इकाइयों के बीच तालमेल का व्यापक अनुभव है।
निर्माण से नियमित संचालन के दौर में राम मंदिर
राम मंदिर का प्रशासन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
प्राण प्रतिष्ठा और प्रारंभिक निर्माण के बाद मंदिर परिसर धीरे-धीरे दीर्घकालीन संचालन और विकास की ओर बढ़ रहा है। इसी कारण ट्रस्ट के सामने रोजमर्रा के प्रशासन को अधिक पेशेवर बनाने की जरूरत बढ़ी है।
इसी प्रक्रिया के तहत पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ट्रस्ट ने बुधवार की बैठक में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति से जुड़े फैसले भी किए हैं। यानी संगठनात्मक स्तर पर एक साथ कई बदलाव किए जा रहे हैं।
फाइटर पायलट से राम मंदिर के पहले CEO तक
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरा है—1986 में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन, कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर से जुड़ी भूमिका, 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान, 18 से अधिक प्रकार के विमान उड़ाने का अनुभव, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में वरिष्ठ जिम्मेदारियां, पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व और फिर ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण कमांड भूमिका।
अब उनके करियर में अयोध्या का अध्याय जुड़ गया है।
5,585 आवेदकों के बीच से चुने गए मिश्रा के सामने चुनौती सैन्य अभियान चलाने की नहीं बल्कि दुनिया के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक के विशाल प्रशासनिक तंत्र को प्रभावी ढंग से संचालित करने की होगी।
ट्रस्ट ने उनके अनुशासन, प्रशासनिक क्षमता और बड़े संगठनों को संभालने के अनुभव पर भरोसा जताया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि **ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान संभालने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर के पहले CEO के रूप में मंदिर प्रबंधन को किस तरह नया स्वरूप देते हैं।**
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