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Moradabad : तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ नर्सिंग, कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ और डिपार्टमेंट ऑफ फिजियोथैरेपी की संयुक्त रूप से एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस ब्रीजिंग गैप बिटवीन रिसर्च क्लिनिकल एप्लीकेसंस एंड इंटरडिसिप्लिनरी कोलाबोरेशन फोर बैटर हैल्थ आउटकम पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस- हैल्थ फोर्स-2025 का समापन |
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ नर्सिंग, कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ और डिपार्टमेंट ऑफ फिजियोथैरेपी की संयुक्त रूप से एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस ब्रीजिंग गैप बिटवीन रिसर्च क्लिनिकल एप्लीकेसंस एंड इंटरडिसिप्लिनरी कोलाबोरेशन फोर बैटर हैल्थ आउटकम पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस- हैल्थ फोर्स-2025 में मालद्वीप, फिलीपींस के संग-संग पश्चिम बंगाल, एम्स दिल्ली, झारखंड, पंजाब, हरियाणा के हैल्थ एक्सपर्ट्स ने एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस की अवधारणा पर अपने अनमोल सिफारिशों की साइंटिफिक तरीके से संस्तुति की है। वैलिडिक्ट्री फंक्शन में मदर टेरेसा पीजी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की वाइस प्रिंसिपल डॉ. ए. मारिया टेरेसा, एम्स, दिल्ली में फिजियोथैरेपी विभाग के डॉ. प्रभात रंजन, एम्स- देवघर की प्रिंसिपल प्रो. सी वसंता कल्यानी ने भी अपने-अपने व्याख्यान दिए। दो दिनी हैल्थ फोर्स में कुल 54 रिसर्च पेपर्स और 34 पोस्टर्स प्रजेंट किए गए। नर्सिंग के 23, पैरामेडिकल के 19 और फिजियोथैरेपी के 12 साइंटिफिक रिसर्च पेपर्स, जबकि नर्सिंग के 05, पैरामेडिकल के 19 और फिजियोथैरेपी के 10 पोस्टर्स प्रस्तुत किए गए। कॉन्फ्रेंस में नर्सिंग कॉलेज की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी, टीएमसीओएन, मुरादाबाद की प्राचार्या डॉ. जसलीन एम., पैरामेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. नवीनत कुमार, फिजियोथेरेपी विभाग की एचओडी प्रो. शिवानी एम. कौल, टीपीसीओएन, अमरोहा की प्राचार्या प्रो. श्योली सेन आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही।
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क्वालिटी रिसर्च को मेडिकल और एकेडमिक्स सहयोग जरूरी: डॉ. विजयन
मालदीव के विला कॉलेज की फैकल्टी ऑफ हेल्थ साइंसेज की डिप्टी डीन डॉ. मानो प्रिया विजयन ने कहा, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए चिकित्सकीय और अकादमिक सहयोग को मजबूत करना आवश्यक है। शोध को व्यवहार में लागू करने की चुनौतियों को डिजिटल एआई-संचालित निर्णय समर्थन प्रणाली, प्रभावी नीतियां और सुव्यवस्थित क्रियान्वयन के माध्यम से हल किया जा सकता है। डॉ. विजयन ने बताया कि अनुसंधान का उद्देश्य केवल ज्ञान का विस्तार करना नहीं, बल्कि उस ज्ञान को व्यावहारिक रूप से लागू करना भी है। उन्होंने इस प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अनुसंधान निष्कर्षों को क्लिनिकल प्रक्रियाओं में एकीकृत करना आसान नहीं होता है। इसमें नीतिगत बाधाएँ, संसाधनों की कमी, स्वास्थ्य पेशेवरों का प्रतिरोध, और पारंपरिक प्रथाओं को बदलने की अनिच्छा जैसी समस्याएँ आती हैं। अंत में उन्होंने नर्सिंग पेशेवरों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. टेरेसा की सलाह, नर्स नए शोध से रहें अपडेट
फिलीपींस के मदर टेरेसा पीजी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की वाइस प्रिंसिपल डॉ. ए. मारिया टेरेसा ने इंक्वारी टू इम्पैक्टः एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस इन नर्सिंग पर कहा कि साक्ष्य-आधारित अभ्यास-ईबीपी स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा पर आधारित किया जाना चाहिए, ताकि रोगियों को सर्वोत्तम देखभाल प्रदान की जा सके। उन्होंने नर्सिंग क्षेत्र में अनुसंधान से प्राप्त निष्कर्षों को प्रभावी रूप से लागू करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि नर्सों को लगातार नए शोध अध्ययनों से अवगत रहना चाहिए ताकि वे अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन कर सकें।
हॉस्पिटल्स एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस अपनाएं: प्रो. मयंगलंबम
कोलकाता के जगन्नाथ गुप्ता इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग साइंसेज-जेआईएमएसएच की प्रो. प्रेमपति मयंगलंबम ने एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस-ईबीपी को नर्सिंग वर्क लोड और बर्न आउट का समाधान बताते हुए कहा, ईबीपी में स्मार्ट स्टाफिंग सिस्टम- रोगी-नर्स अनुपात का वैज्ञानिक निर्धारण और फ्लेक्सिबल वर्किंग शेड्यूल शामिल है। ईबीपी में स्ट्रेस मैनेजमेंट टेक्निक्स के लिए योग, ध्यान, माइंडफुलनेस, कार्य स्थल संस्कृति में सुधार, सकारात्मक कार्य स्थल माहौल और टीम वर्क को प्रोत्साहन, नर्सिंग लीडरशिप और प्रशिक्षण, समय प्रबंधन और प्राथमिकता निर्धारण की तकनीकों पर ध्यान दिया जाता है। प्रो. मयंगलंबम ने कहा, नर्सिंग स्टाफ की भलाई को प्राथमिकता देना न केवल उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे पेशेंट केयर की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे अपने संस्थानों में एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस को अपनाएं और नर्सिंग पेशे को एक संतुलित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने की दिशा में कार्य करें। एम्स, देवघर की प्राचार्या प्रो. सी वसंथा कल्याणी ने अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटनाः साक्ष्य-आधारित नवाचारों के त्वरित कार्यान्वयन के सर्वोत्तम अभ्यास पर अपना व्याख्यान दिया।
फॉरेंसिक साइंस का हेल्थकेयर में अहम योगदान: प्रो. आदर्श
एम्स, दिल्ली में फॉरेंसिक मेडिसिन के प्रो. आदर्श कुमार ने अपने व्याख्यान में कहा, फॉरेंसिक मेडिसिन, फॉरेंसिक इंजीनियरिंग, टॉक्सिकोलॉजी, केमिस्ट्री और फॉरेंसिक साइंस का हेल्थकेयर सिस्टम में अहम योगदान है। फॉरेंसिक मेडिसिन दुर्घटनाओं, अपराधों और चिकित्सा लापरवाही के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करता है, जिससे मरीजों को सही उपचार और न्याय मिल सके। फॉरेंसिक इंजीनियरिंग अस्पतालों और चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है, जिससे चिकित्सा त्रुटियों को रोका जा सके। टॉक्सिकोलॉजी और केमिस्ट्री- जहर, दवाओं और अन्य हानिकारक पदार्थों की पहचान कर मरीजों के इलाज और आपदा प्रबंधन में सहायक सिद्ध होते हैं। फॉरेंसिक नर्सिंग यौन हिंसा, घरेलू हिंसा, बाल शोषण और आपराधिक मामलों में पीड़ितों की देखभाल के साथ-साथ साक्ष्य संग्रह और न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पैरामेडिकल साइंसेज आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, दुर्घटनाओं और आपदाओं में त्वरित उपचार प्रदान करने के साथ-साथ फॉरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजिकल जांच में भी योगदान देते हैं।
फोरेंसिक नर्सिंग की न्याय प्रणाली में भी महत्वपूर्ण भूमिकाः डॉ. गोरेया
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, पंजाब के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. आरके गोरेया बोले, कि फोरेंसिक नर्सिंग न केवल चिकित्सा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह न्याय प्रणाली में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फोरेंसिक नर्सें अपराध के मामलों में चिकित्सकीय साक्ष्य एकत्र करने, पीड़ितों की देखभाल करने और कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, बाल शोषण और अन्य आपराधिक मामलों में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। फोरेंसिक नर्सें न केवल शारीरिक साक्ष्य एकत्र करती हैं बल्कि मानसिक आघात झेल रहे पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक सहायता भी प्रदान करती हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में व्यावसायिक अवसरों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला, जिससे युवा नर्सिंग पेशेवर इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।
बीमा धोखाधड़ी में फॉरेंसिक साइंस की अहम भूमिका: डॉ. रंजीत
शेरलॉक इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, दिल्ली के निदेशक डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने साक्ष्य-आधारित बीमा फोरेंसिक जांचः बेहतर परिणामों की दिशा में बीमा क्षेत्र में फोरेंसिक विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बीमा धोखाधड़ी, दावों की सत्यता, चिकित्सा बीमा आकलन और कानूनी जांच में फोरेंसिक विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, आधुनिक तकनीकों और साक्ष्य-आधारित जांच प्रक्रियाओं के माध्यम से बीमा घोटालों को कम किया जा सकता है, जिससे उद्योग में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे। उन्होंने शोधार्थियों और पेशेवरों को बीमा क्षेत्र में फोरेंसिक जांच की आधुनिक प्रवृत्तियों और नवाचारों की जानकारी दी।
नर्सिंग और चिकित्सा क्षेत्र में अपनाने होंगे नए विचारः डॉ. नितेश
सोनीपत की ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी के डॉ. नितेश बंसल ने लेटरल थिंकिंग फॉर एलाइड हैल्थकेयर प्रोफेसनल्स पर बताया, परंपरागत सोच से हटकर नए दृष्टिकोण अपनाना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचार और सुधार लाने में सहायक हो सकता है। नर्सिंग और चिकित्सा क्षेत्र में जब तक हम नए विचारों को नहीं अपनाएंगे, तब तक नवाचार की संभावना सीमित रहेगी। लेटरल थिंकिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जो हमें समस्या का समाधान नए और अनूठे तरीकों से खोजने में मदद करती है। यह पारंपरिक सोच के विपरीत काम करती है और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को मरीजों की देखभाल में सुधार करने के लिए नए दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है। डॉ. बंसल ने टीमवर्क, समस्या समाधान, और रचनात्मक सोच पर जोर दिया। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के जरिए स्वास्थ्य पेशेवरों की कार्यप्रणाली में लेटरल थिंकिंग का उपयोग करना बताया।
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