उत्तर प्रदेश

माटीकला को बढ़ावा देने की पहल, मेरठ में कारीगरों को योजनाओं की जानकारी

Ratna Netam
24 July 2026 6:12 PM IST
माटीकला को बढ़ावा देने की पहल, मेरठ में कारीगरों को योजनाओं की जानकारी
x

मेरठ : माटीकला कारीगरों को आधुनिक तकनीक, बेहतर उत्पादन और बाजार की बदलती मांग के अनुसार नए उत्पाद तैयार करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से मेरठ में एक दिवसीय माटीकला जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला पंचायत सभागार, कचहरी परिसर मेरठ में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में माटीकला से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा संचालित माटीकला विपणन विकास सहायता एवं प्रचार-प्रसार योजना के अंतर्गत माटीकला स्थापना पखवाड़े के तहत किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से कारीगरों को माटीकला क्षेत्र में आ रहे बदलावों, नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने पारंपरिक कार्य को आधुनिक रूप देकर अधिक आय अर्जित कर सकें।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के करीब 200 माटीकला कारीगर और लाभार्थी शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी रहे। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य पूनम शर्मा, उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के प्रतिनिधि घनश्याम प्रजापति सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने कहा कि माटीकला केवल एक पारंपरिक व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि मिट्टी से बने उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और कारीगर आधुनिक डिजाइन, बेहतर गुणवत्ता और नए बाजारों से जुड़कर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।

उन्होंने माटीकला बोर्ड की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रही है। इनमें प्रशिक्षण, उपकरण सहायता, विपणन सहयोग और उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने जैसी योजनाएं शामिल हैं।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कारीगरों को मिट्टी के उत्पादों में डिजाइन सुधार, गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक भट्ठी तकनीक, पैकेजिंग और ऑनलाइन बाजार से जुड़ने के तरीकों के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में मिट्टी के बर्तन, सजावटी सामान और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कारीगर अगर नई तकनीकों को अपनाते हैं तो उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि माटीकला हमारी संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे बढ़ावा देने से जहां एक ओर पारंपरिक कला को संरक्षण मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

माटीकला कारीगरों ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्हें पहली बार आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों के बारे में विस्तृत जानकारी मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण की मदद से वे अपने व्यवसाय को और बेहतर बना सकेंगे।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सभी कारीगरों से अपील की कि वे नई तकनीकों को अपनाएं, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करें और सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। प्रशासन ने कहा कि भविष्य में भी माटीकला क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए ऐसे जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

Next Story