- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- अब सचिव स्तर के IAS...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म (समूह-‘क’ एवं ‘ख’) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली को मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन के बाद अब भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशक के पद पर केवल सचिव स्तर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी ही तैनात किए जा सकेंगे।
अभी तक भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशक का पद विशेष सचिव स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस पद की जिम्मेदारी और अधिक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाएगी। सरकार का मानना है कि विभागीय कार्यों की बढ़ती जिम्मेदारियों और खनन क्षेत्र से जुड़े मामलों के बेहतर प्रबंधन के लिए वरिष्ठ स्तर के अधिकारी की आवश्यकता है।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग प्रदेश में खनिज संसाधनों के प्रबंधन, खनन गतिविधियों की निगरानी, राजस्व संग्रह और अवैध खनन पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ा है। प्रदेश में खनन क्षेत्र से जुड़े मामलों की संख्या और जटिलता बढ़ने के साथ विभागीय स्तर पर मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विभाग के शीर्ष पद पर नियुक्ति के लिए योग्यता और स्तर में बदलाव हो जाएगा। संशोधित नियमावली के तहत निदेशक पद के लिए सचिव स्तर के IAS अधिकारी की पात्रता तय की गई है। इससे विभाग के निर्णयों में उच्च प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से यह कदम खनन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है। खनिज संसाधनों के उपयोग, पट्टों के प्रबंधन, राजस्व वृद्धि और अवैध खनन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विभाग को मजबूत नेतृत्व देने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में खनन क्षेत्र लंबे समय से सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। खनिज संपदा से जुड़े मामलों में प्रशासनिक निर्णयों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में निदेशक पद पर वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति से विभागीय समन्वय और निगरानी व्यवस्था बेहतर होने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, नियमावली में संशोधन के बाद विभागीय कार्यप्रणाली में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। वरिष्ठ स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में नीतिगत फैसलों को तेजी से लागू करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।
कैबिनेट के इस फैसले को प्रदेश में खनन प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार लगातार खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और राजस्व व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रही है।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के निदेशक का पद विभागीय संचालन में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। निदेशक को खनन नीतियों के क्रियान्वयन, विभागीय योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक निर्णयों में अहम भूमिका निभानी होती है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब इस पद पर तैनाती के लिए सचिव स्तर के अधिकारी की उपलब्धता और चयन प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा। इससे विभाग को अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद संशोधित नियमावली को आगे की प्रक्रिया के लिए लागू किया जाएगा। इसके साथ ही भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में निदेशक पद की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी का स्तर भी बढ़ जाएगा।
सरकार का यह फैसला खनन क्षेत्र के बेहतर संचालन, प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और विभागीय कामकाज में प्रभावशीलता लाने के उद्देश्य से लिया गया है। आने वाले समय में इस बदलाव का असर विभाग की कार्यप्रणाली और नीतिगत फैसलों में दिखाई दे सक





