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- वाराणसी में खुलेआम नशे...

वाराणसी। युवाओं को नशे से दूर रखने और सार्वजनिक स्थानों को नशामुक्त बनाने के लिए सरकार की ओर से समय-समय पर कई नियम और अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद वाराणसी में इन नियमों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शहर में कई स्थानों पर कोटपा अधिनियम और अन्य संबंधित नियमों की अनदेखी की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास ही नहीं, बल्कि छात्राओं के शिक्षण संस्थानों के सामने भी देसी शराब की दुकानें और नशे से जुड़े अन्य ठिकाने संचालित हो रहे हैं। इससे अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में नाराजगी है।
कोटपा अधिनियम (COTPA) के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों की बिक्री को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को नशे की आदत से बचाना है।
हालांकि, शहर के कुछ क्षेत्रों में इन नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि नियम होने के बावजूद कई जगहों पर खुलेआम तंबाकू उत्पादों की बिक्री हो रही है। वहीं, कुछ स्थानों पर शराब की दुकानों की मौजूदगी को लेकर भी विरोध सामने आया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिक्षण संस्थानों के आसपास नशे से जुड़ी गतिविधियां होने से छात्र-छात्राओं पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। खासकर छात्राओं के स्कूल और कॉलेजों के आसपास ऐसी दुकानों की मौजूदगी सुरक्षा और सामाजिक वातावरण को लेकर चिंता बढ़ाती है।
लोगों का आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव नजर नहीं आता। कई स्थानों पर निरीक्षण और कार्रवाई के बाद भी स्थिति में स्थायी सुधार नहीं हो पा रहा है।
नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सख्ती से पालन भी जरूरी है। उनका कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए स्कूल, कॉलेज और धार्मिक स्थलों के आसपास विशेष निगरानी होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे स्थानों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाए, जहां नियमों का उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर नशे से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग कार्रवाई करता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे मामलों की जानकारी प्रशासन को दें, ताकि जांच कर उचित कदम उठाए जा सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों और युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। यदि शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास नशे की उपलब्धता कम होगी तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
वाराणसी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर में मंदिरों और शिक्षण संस्थानों के आसपास इस तरह की गतिविधियों को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ जाती है। नागरिक चाहते हैं कि नियमों का प्रभावी पालन हो और आने वाली पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।
फिलहाल, शहर में कोटपा अधिनियम और अन्य नशा नियंत्रण नियमों के पालन को लेकर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती से कदम उठाता है।





