उत्तर प्रदेश

कैंट रोडवेज बस स्टेशन के PPP मॉडल विकास पर अड़चन, शिफ्टिंग के लिए नहीं मिली जमीन

Kavita2
30 Sept 2026 5:35 PM IST
कैंट रोडवेज बस स्टेशन के PPP मॉडल विकास पर अड़चन, शिफ्टिंग के लिए नहीं मिली जमीन
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वाराणसी। कैंट स्थित रोडवेज बस स्टेशन को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर आधुनिक स्वरूप देने की योजना फिलहाल जमीन के अभाव में अटक गई है। लंबे समय से चल रही कवायद के बावजूद रोडवेज प्रशासन को बस स्टेशन और कार्यालय को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिल सकी है। अब विभाग के सामने निजी संपत्ति किराए पर लेने का विकल्प बचा है, जिस पर विचार किया जा रहा है।

कैंट रोडवेज बस स्टेशन शहर के सबसे व्यस्त यातायात केंद्रों में से एक है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बसों का संचालन होता है और हजारों यात्री आते-जाते हैं। स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए PPP मॉडल पर पुनर्विकास की योजना बनाई गई थी।

योजना को शासन की मंजूरी करीब छह साल पहले मिल गई थी, लेकिन आगे की प्रक्रिया काफी धीमी रही। लंबी कवायद के बाद आखिरकार कार्यदायी संस्था का चयन हो सका। इसके बाद सबसे बड़ी जरूरत बस स्टेशन और प्रशासनिक कार्यालयों को अस्थायी तौर पर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की थी, ताकि मौजूदा परिसर में निर्माण कार्य शुरू कराया जा सके।

रोडवेज प्रशासन ने इसके लिए कई बार जिला प्रशासन से संपर्क किया। अधिकारियों ने ऐसी भूमि की मांग की थी जहां अस्थायी बस स्टेशन बनाया जा सके और बसों की आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो। साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए स्थान शहर से बहुत दूर भी न हो।

कई विकल्पों पर विचार करने के बावजूद कोई भी स्थान अंतिम रूप नहीं ले सका। जमीन नहीं मिलने के कारण निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

कुछ महीने पहले लहरतारा स्थित जल विहार कॉलोनी में खाली पड़ी जमीन को अस्थायी बस स्टेशन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना बनी थी। रोडवेज प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच इसे लेकर शुरुआती सहमति भी बनी।

इस जमीन को लेकर विभाग को उम्मीद थी कि बस स्टेशन और कार्यालय अस्थायी रूप से यहां स्थानांतरित किए जा सकेंगे। इससे कैंट परिसर खाली हो जाता और PPP मॉडल के तहत प्रस्तावित निर्माण शुरू किया जा सकता था।

लेकिन बाद में पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन की ओर से इस भूमि को उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई गई। इसके बाद रोडवेज की योजना फिर वहीं अटक गई जहां से शुरू हुई थी।

अब विभाग के सामने वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निजी भूमि या भवन को किराए पर लेने पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि निजी संपत्ति किराए पर लेने के लिए भी कई शर्तें पूरी करनी होंगी। बस स्टेशन के लिए पर्याप्त क्षेत्रफल, वाहनों के प्रवेश और निकास की सुविधा, मुख्य मार्ग से संपर्क और यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं जरूरी होंगी।

इसके साथ ही किराए की दर और विभागीय बजट भी महत्वपूर्ण होगा। यदि कोई उपयुक्त निजी संपत्ति मिलती है तो उसके किराए और अन्य खर्चों का प्रस्ताव तैयार कर उच्च स्तर से मंजूरी लेनी होगी।

कैंट बस स्टेशन का पुनर्विकास लंबे समय से प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ स्टेशन परिसर का अधिक व्यवस्थित उपयोग करना है।

PPP मॉडल के तहत बस स्टेशन को आधुनिक टर्मिनल के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें यात्री सुविधाओं, प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

लेकिन इसके लिए पहले मौजूदा संचालन को दूसरी जगह शिफ्ट करना जरूरी है। निर्माण अवधि में बसों का संचालन पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए वैकल्पिक स्टेशन की व्यवस्था परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त बन गई है।

रोडवेज अधिकारियों के सामने चुनौती यह भी है कि अस्थायी बस स्टेशन ऐसी जगह हो जहां शहर और आसपास के क्षेत्रों से यात्रियों की पहुंच आसानी से बनी रहे।

यदि बस स्टेशन शहर से अधिक दूरी पर स्थानांतरित किया जाता है तो यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी हो सकती है। ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य स्थानीय परिवहन साधनों पर निर्भरता भी बढ़ सकती है।

कैंट क्षेत्र रेलवे स्टेशन सहित शहर के प्रमुख यातायात केंद्रों के करीब है। यही कारण है कि यहां मौजूद रोडवेज बस स्टेशन यात्रियों के लिए सुविधाजनक माना जाता है।

अस्थायी स्थान चुनते समय इस सुविधा को भी ध्यान में रखना होगा। जगह ऐसी होनी चाहिए जहां बसें आसानी से प्रवेश और बाहर निकल सकें और आसपास यातायात जाम की स्थिति न बने।

योजना में पहले ही काफी समय लग चुका है। शासन की मंजूरी के करीब छह साल बाद कार्यदायी संस्था का चयन होना परियोजना की धीमी प्रगति को दर्शाता है। अब जमीन की समस्या ने इसे और पीछे धकेल दिया है।

रोडवेज प्रशासन की ओर से लगातार विकल्प तलाशे जा रहे हैं। अधिकारियों का प्रयास है कि जल्द कोई उपयुक्त जगह चिह्नित की जाए, ताकि बस स्टेशन की शिफ्टिंग शुरू हो सके।

निजी संपत्ति किराए पर लेने की योजना पर सहमति बनती है तो विभाग को शहर के अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध बड़े परिसरों की तलाश करनी होगी।

बस संचालन के लिए केवल खुला मैदान पर्याप्त नहीं होगा। वहां यात्रियों के बैठने, टिकटिंग, पेयजल, शौचालय और कर्मचारियों के लिए कार्यालय जैसी अस्थायी व्यवस्थाएं भी करनी होंगी।

इस पूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त खर्च भी आएगा। वहीं निर्माण शुरू होने के बाद तय समय में काम पूरा करना भी जरूरी होगा, ताकि अस्थायी व्यवस्था लंबे समय तक न चलानी पड़े।

कैंट रोडवेज बस स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों को लंबे समय में बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल परियोजना का भविष्य अस्थायी जमीन की उपलब्धता पर टिका हुआ है।

लहरतारा की जमीन का विकल्प खत्म होने के बाद अब विभाग निजी संपत्ति की तरफ देख रहा है। यदि जल्द स्थान मिल जाता है तो PPP मॉडल पर प्रस्तावित निर्माण की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकेगा।

फिलहाल बस स्टेशन और कार्यालय की शिफ्टिंग नहीं होने से कैंट रोडवेज परिसर में प्रस्तावित विकास कार्य शुरू नहीं हो पाया है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त और सुविधाजनक वैकल्पिक स्थान

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