उत्तर प्रदेश

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में विदेशी खरीदारों ने दिखाई रुचि, स्थानीय उत्पादों को मिला ग्लोबल मंच

Kavita2
30 Sept 2026 5:02 PM IST
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में विदेशी खरीदारों ने दिखाई रुचि, स्थानीय उत्पादों को मिला ग्लोबल मंच
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ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में जिले के उत्पादों ने विदेशी खरीदारों का ध्यान खींचा। अलग-अलग देशों से आए व्यापारिक प्रतिनिधियों और खरीदारों ने यहां लगाए गए स्टॉलों पर पहुंचकर स्थानीय खाद्य उत्पादों, हस्तशिल्प और पत्थरों से बनी कलाकृतियों में विशेष रुचि दिखाई।

ट्रेड शो में जिले के उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर दिनभर खरीदारों की आवाजाही बनी रही। खास तौर पर कीनिया और जापान से आए खरीदारों ने बतीसा और सोनपापड़ी जैसे स्थानीय खाद्य उत्पादों के सैंपल लिए। उन्होंने उत्पादों के स्वाद, पैकेजिंग, गुणवत्ता और बड़े स्तर पर आपूर्ति की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी जुटाई।

दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस और वियतनाम से आए खरीदारों ने पत्थरों से बनी कलाकृतियों और सजावटी वस्तुओं में दिलचस्पी दिखाई। इन खरीदारों ने स्थानीय उद्यमियों से उत्पादों की कीमत, डिजाइन, निर्माण प्रक्रिया और बड़े ऑर्डर की स्थिति में आपूर्ति क्षमता के बारे में बातचीत की।

विदेशी खरीदारों की इस रुचि से स्थानीय कारोबारियों और कारीगरों में उत्साह है। कई खरीदारों ने उद्यमियों से आगे भी संपर्क बनाए रखने और भविष्य में व्यापारिक संबंध स्थापित करने की बात कही है।

स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों के लिए यह ट्रेड शो एक बड़ा अवसर बनकर सामने आया है। पहले इस तरह के आयोजनों में जिले से मुख्य रूप से काष्ठकला से जुड़े उत्पाद ही भेजे जाते थे, लेकिन अब खाद्य सामग्री, पत्थर की कलाकृतियां और अन्य पारंपरिक उत्पाद भी खरीदारों के सामने प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

इस बदलाव से जिले के उत्पादों की पहचान भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक हुई है। स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का मौका मिलने से नए बाजारों के रास्ते खुल सकते हैं।

बतीसा और सोनपापड़ी जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पादों में विदेशी खरीदारों की रुचि इस बात का संकेत मानी जा रही है कि स्थानीय स्वाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना सकता है। हालांकि निर्यात के लिए खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग और गुणवत्ता के मानकों का पालन करना जरूरी होगा।

इसी तरह पत्थरों से बनी कलाकृतियों में कई देशों के खरीदारों की दिलचस्पी ने स्थानीय हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए नई उम्मीद पैदा की है। हाथ से तैयार की गई सजावटी वस्तुएं, धार्मिक आकृतियां और अन्य कलात्मक उत्पाद विदेशी बाजारों में आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

उद्यमियों का मानना है कि यदि शुरुआती बातचीत आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में निर्यात ऑर्डर मिल सकते हैं। इससे जिले के छोटे और मध्यम उद्योगों को फायदा होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

ट्रेड शो का उद्देश्य केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। इसके जरिए उद्यमियों को खरीदारों से सीधे संवाद करने का अवसर भी मिलता है। इससे स्थानीय उत्पादकों को यह समझने में मदद मिलती है कि अलग-अलग देशों के बाजारों में किस तरह के उत्पादों की मांग है और खरीदार किन मानकों को प्राथमिकता देते हैं।

विदेशी खरीदारों ने पैकेजिंग, गुणवत्ता, कीमत और समय पर आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी सवाल किए। इससे उद्यमियों को अपनी उत्पादन व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में जरूरी सुझाव और संकेत मिले हैं।

स्थानीय उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफल होने के लिए सिर्फ अच्छी गुणवत्ता का उत्पाद होना ही काफी नहीं है। आकर्षक पैकेजिंग, समय पर डिलीवरी, निर्यात से जुड़े दस्तावेज और खरीदारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना भी जरूरी है।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो ने इस दिशा में उद्यमियों को एक बड़ा मंच दिया है। जिले के कई ऐसे उत्पाद, जो अब तक स्थानीय या क्षेत्रीय बाजार तक सीमित थे, अब विदेशी खरीदारों तक पहुंच रहे हैं।

पत्थरों से बनी कलाकृतियों की खासियत उनकी डिजाइन और कारीगरी है। इन्हें स्थानीय कारीगर लंबे समय से तैयार करते आ रहे हैं। यदि इन्हें विदेशों में बाजार मिलता है तो पारंपरिक कला और कारीगरी को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।

इसी तरह काष्ठकला भी जिले की पुरानी पहचान रही है। पहले यही उत्पाद बड़े व्यापारिक आयोजनों में सबसे ज्यादा प्रदर्शित किए जाते थे। अब दूसरे उत्पादों को भी समान अवसर मिलने से जिले की औद्योगिक और हस्तशिल्प पहचान और मजबूत हो रही है।

ट्रेड शो में भाग लेने वाले उद्यमियों ने अपने स्टॉलों पर उत्पादों को बेहतर तरीके से प्रदर्शित किया। कई जगह उत्पादों के साथ उनके निर्माण, उपयोग और विशेषताओं की जानकारी भी दी गई, जिससे खरीदारों को समझने में आसानी हुई।

विदेशी खरीदारों के साथ हुई बातचीत को अब वास्तविक कारोबारी समझौतों में बदलना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए उद्यमियों को लगातार फॉलोअप करना होगा और खरीदारों की जरूरतों के अनुसार उत्पादों में बदलाव भी करने पड़ सकते हैं।

यदि विदेशी बाजारों से बड़े ऑर्डर मिलते हैं तो उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर नई इकाइयों, पैकेजिंग, परिवहन और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

ट्रेड शो में मिली प्रतिक्रिया से यह भी साफ हुआ कि जिले के पारंपरिक उत्पाद केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। सही प्रस्तुति और मार्केटिंग के जरिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई जा सकती है।

सरकार द्वारा आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का मकसद प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराना और निर्यात को बढ़ावा देना है। इसी उद्देश्य से अलग-अलग जिलों के विशिष्ट उत्पादों को खरीदारों के सामने रखा गया।

फिलहाल कीनिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, रूस और वियतनाम के खरीदारों की ओर से दिखाई गई रुचि ने जिले के उद्यमियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि बतीसा, सोनपापड़ी और पत्थर की कलाकृतियों के लिए हुई शुरुआती बातचीत आगे चलकर बड़े व्यापारिक सौदों में बदलती है या नहीं।

कुल मिलाकर यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो ने जिले के उत्पादों को नए खरीदारों तक पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को वैश्विक बाजार की जरूरतों को समझने का अवसर भी दिया है।

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