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उत्तर प्रदेश
उफनती मंदाकिनी में फंसे सैकड़ों लोग सेना ने संभाला मोर्चा
Ratna Netam
30 Aug 2026 9:50 PM IST

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चित्रकूट। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित धार्मिक नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। लगातार भारी बारिश के बाद नदी में अचानक आए उफान से रामघाट, भरतघाट, नयागांव समेत कई रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए। हालात इतने गंभीर हो गए कि घरों, होटलों और आश्रमों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी। शनिवार देर रात तक चले राहत एवं बचाव अभियान में करीब 800 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। मध्य प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में बाढ़ की चपेट में आने से एक महिला समेत तीन लोगों की मौत की सूचना है।
बाढ़ का असर चित्रकूट के उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों हिस्सों में देखने को मिला। मंदाकिनी का पानी घाटों से निकलकर बाजारों और बस्तियों में घुस गया। कई मकानों और आश्रमों में पानी भरने से लोग ऊपरी मंजिलों और छतों पर शरण लेने को मजबूर हो गए। प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने नावों और हेलीकॉप्टर की मदद से लोगों को बाहर निकालने का अभियान चलाया।
आधी रात तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ के कारण कई स्थानों पर लोग घंटों तक फंसे रहे। हालात को देखते हुए सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टर भी बचाव कार्य में लगाए गए। अलग-अलग रिपोर्टों में बचाए गए लोगों की संख्या समय के साथ बढ़ती रही। रविवार शाम की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार आधी रात तक करीब 800 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। वहीं यूपी और एमपी के संयुक्त राहत अभियानों को मिलाकर करीब एक हजार लोगों को सुरक्षित निकालने की भी जानकारी सामने आई।
राहत अभियान में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी जुटी रहीं। जहां नावों से पहुंचना मुश्किल था, वहां हेलीकॉप्टर की सहायता ली गई।
बाढ़ के दौरान कई लोग घरों और होटलों की छतों पर फंस गए थे। पानी का बहाव इतना तेज था कि सामान्य तरीके से वहां पहुंचना संभव नहीं था। ऐसे में बचाव दलों ने जोखिम के बीच लोगों को सुरक्षित निकाला।
तीन लोगों की मौत
मंदाकिनी की बाढ़ ने तीन लोगों की जान भी ले ली। रिपोर्ट के अनुसार बिहार के अरवल जिले के सुनैनी निवासी कमला शरण करीब 50 लोगों के साथ चित्रकूट की शिवहरे धर्मशाला में चातुर्मास बिताने के लिए ठहरे हुए थे। बाढ़ के दौरान वह फंस गए और उनकी मौत हो गई।
दूसरी घटना रामधाम क्षेत्र की बताई गई है। यहां एक बुजुर्ग संत कमरे में मौजूद थे। पानी भरने के बाद वह बाहर निकले और बाढ़ की चपेट में आ गए। उनकी भी मौत हो गई।
वहीं नयागांव के खटकाना मोहल्ले में एक बुजुर्ग महिला की घर में पानी भरने के दौरान मौत हो गई। पानी कम होने के बाद शव बरामद किए गए।
रामघाट से बस्तियों तक पानी ही पानी
मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण सबसे ज्यादा नुकसान नदी किनारे बसे क्षेत्रों में हुआ। रामघाट, भरतघाट और नयागांव सहित कई इलाकों में पानी घरों और दुकानों में घुस गया।
शनिवार को हालात इतने खराब हो गए थे कि चित्रकूट की कई सड़कें जलमार्ग जैसी दिखाई देने लगीं। आरोग्यधाम, रामघाट और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में दुकानें पानी में डूब गईं।
कई दुकानदारों का सामान पानी में बह गया या खराब हो गया। घरों में रखा अनाज, कपड़े, फर्नीचर और अन्य घरेलू सामान भी बाढ़ की चपेट में आया।
पानी उतरने के बाद अब जगह-जगह कीचड़ और मलबा दिखाई दे रहा है। प्रभावित परिवार अपने घरों और दुकानों में बचे सामान को तलाशने और सुरक्षित करने में जुटे हैं।
सैकड़ों मकानों को नुकसान
मंदाकिनी की तेज धारा और लंबे समय तक हुए जलभराव के कारण बड़ी संख्या में मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 400 घरों की दीवारों में दरारें आने की बात सामने आई है।
बाढ़ के पानी के साथ आया मलबा गलियों और सड़कों पर जमा हो गया है। कई जगह बिजली के खंभे और तार भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
प्रशासन के सामने अब पानी उतरने के बाद सफाई, बिजली आपूर्ति बहाल करने, पीने का पानी उपलब्ध कराने और क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे करने की चुनौती है।
पुलों को भी पहुंचा भारी नुकसान
मंदाकिनी के तेज बहाव ने सड़क और पुलों को भी नुकसान पहुंचाया है। कर्वी को जोड़ने वाला मंदाकिनी पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद वाहनों का आवागमन रोक दिया गया। इसके अलावा हनुमान धारा मार्ग पर स्थित नयागांव पुल के बहने की जानकारी भी सामने आई है।
चित्रकूट-सतना मार्ग पर भी बाढ़ का असर पड़ा और भारी वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी।
शनिवार को नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने कई मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी थी। कर्वी के पास पुल तक पानी पहुंचने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर यातायात बंद करना पड़ा।
खतरे के निशान से ऊपर पहुंची थी मंदाकिनी
भारी बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ा। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक नदी अधिकतम बाढ़ स्तर से करीब छह मीटर ऊपर तक पहुंच गई थी। दूसरी रिपोर्ट में नदी के खतरे के निशान से काफी ऊपर बहने की जानकारी दी गई।
हालांकि रविवार को नदी का जलस्तर कम होने से लोगों और प्रशासन ने कुछ राहत महसूस की। कई इलाकों से पानी उतरना शुरू हो गया है, लेकिन पीछे कीचड़, मलबा और बर्बादी के निशान रह गए हैं।
राजापुर इलाके के तिरहार क्षेत्र में करीब दो दर्जन गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे बताए गए हैं। मुख्य मार्ग पर जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित है।
डीएम और एसपी ने संभाला मोर्चा
चित्रकूट के डीएम पुलकित गर्ग और एसपी अरुण कुमार सिंह अपनी टीमों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी किनारे नहीं जाने की सलाह दी गई।
राहत टीमों ने नावों से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों को भोजन के पैकेट और पीने का पानी उपलब्ध कराया।
बाढ़ के दौरान प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता घरों और ऊंची इमारतों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना रही। पानी कम होने के बाद अब प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने और नुकसान का आकलन करने का काम तेज किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंचे चित्रकूट
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी रविवार सुबह चित्रकूट पहुंचे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत शिविरों में लोगों से बातचीत की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नुकसान का सर्वे करने और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ है और नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित मकानों और इलाकों का निरीक्षण करने के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी भी ली।
23 साल बाद ऐसी भीषण बाढ़
स्थानीय रिपोर्टों में मंदाकिनी की इस बाढ़ को पिछले करीब 23 वर्षों की सबसे गंभीर बाढ़ में से एक बताया जा रहा है। नदी के उफान ने धार्मिक नगरी की सामान्य जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी।
रामघाट और आसपास के क्षेत्रों में जहां सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, वहां बाढ़ के दौरान कई फीट पानी भर गया। आश्रम, होटल, दुकानें और मकान इसकी चपेट में आए।
कई श्रद्धालु भी अलग-अलग स्थानों पर फंस गए थे। कानपुर के सात युवक रामघाट क्षेत्र के एक होटल में फंस गए थे, जिन्हें एनडीआरएफ ने शनिवार शाम सुरक्षित बाहर निकाला।
रविवार को मंदाकिनी का जलस्तर कम होने के बाद तत्काल खतरा कुछ घटा है, लेकिन चित्रकूट में मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गलियों और सड़कों पर जमा मलबा हटाना, क्षतिग्रस्त बिजली व्यवस्था बहाल करना, घरों और दुकानों के नुकसान का आकलन करना तथा प्रभावित परिवारों तक भोजन और पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मंदाकिनी की बाढ़ ने कुछ ही घंटों में चित्रकूट के बड़े हिस्से की तस्वीर बदल दी। तीन लोगों की मौत, सैकड़ों घरों और दुकानों को नुकसान तथा बड़ी संख्या में लोगों के फंसने से आपदा की गंभीरता सामने आई है। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त अभियान से सैकड़ों लोगों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया। अब प्रशासन का ध्यान राहत के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और नुकसान के आकलन पर केंद्रित है।
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