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उत्तर प्रदेश
लखनऊ में सनसनीखेज हत्याकांड नहर में मिला ट्रस्ट संचालक का शव
Ratna Netam
30 Aug 2026 9:14 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालक धीरेंद्र प्रताप सिंह की कथित अपहरण के बाद हत्या से सनसनी फैल गई। शनिवार शाम घर से निकले धीरेंद्र वापस नहीं लौटे थे। परिजनों ने उनके अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। रविवार शाम दुबग्गा इलाके में अमेठिया सलेमपुर गांव के पास नहर में झाड़ियों के बीच उनका शव बरामद हुआ। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
धीरेंद्र प्रताप सिंह महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट का संचालन करते थे और प्रॉपर्टी के कारोबार से भी जुड़े बताए गए हैं। वह खुद को भाजपा नेता बताते थे, हालांकि उन्नाव भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी के मुताबिक उनके पास पार्टी में कोई पद नहीं था। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में उन्हें हिंदूवादी संगठनों से जुड़ा भी बताया गया है। पुलिस फिलहाल उनकी राजनीतिक या संगठनात्मक पहचान से अलग हत्या के कारणों की जांच कर रही है।
शनिवार शाम घर से निकले थे धीरेंद्र
एसीपी गोसाईगंज ऋषभ यादव के मुताबिक धीरेंद्र मूल रूप से उन्नाव जिले के फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के राजेपुर गांव के रहने वाले थे। वह पिछले कई वर्षों से लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में रह रहे थे।
शनिवार को वह अपनी कार लेकर घर से निकले थे। पुलिस जांच में सामने आया कि वह फिनिक्स पलासियो मॉल जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं पहुंचे।
परिवार के लोगों ने जब उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो फोन बंद मिला। काफी प्रयास के बाद भी धीरेंद्र से संपर्क नहीं हो पाया तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।
इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया और अपहरण की आशंका जताई।
पत्नी ने दर्ज कराई थी अपहरण की FIR
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक धीरेंद्र की पत्नी ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की चार टीमों को जांच में लगाया गया। टीमों ने धीरेंद्र के मोबाइल, उनकी गतिविधियों और उनके संपर्क में आए लोगों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि घर से निकलने के बाद धीरेंद्र कहां-कहां गए और आखिरी बार किसके संपर्क में थे।
इसी बीच रविवार शाम एक सूचना ने पूरे मामले को हत्या में बदल दिया।
दुबग्गा की नहर में मिला शव
रविवार शाम पुलिस को दुबग्गा इलाके में अमेठिया सलेमपुर गांव की नहर में झाड़ियों के बीच एक व्यक्ति का शव पड़े होने की सूचना मिली।
पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाया। पहचान कराने पर शव धीरेंद्र प्रताप सिंह का निकला।
सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची। घटनास्थल और आसपास के इलाके से साक्ष्य जुटाए गए।
अन्य मीडिया रिपोर्टों में शव शारदा सहायक नहर क्षेत्र में मिलने की बात कही गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या कहां की गई और शव को नहर तक किस तरह पहुंचाया गया।
गोली मारकर हत्या की बात आई सामने
प्रारंभिक जांच में धीरेंद्र की गोली मारकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है।
अमर उजाला की रिपोर्ट में पुलिस पूछताछ के आधार पर दावा किया गया कि संदिग्ध रवि तिवारी ने धीरेंद्र को पहले बेहोश किया और इसके बाद गोली मारकर हत्या की। रिपोर्ट में दो गोलियां मारने और बाद में शव को वाहन से नहर तक ले जाकर फेंकने का दावा किया गया है।
हालांकि इस घटनाक्रम की पूरी तस्वीर पुलिस की आधिकारिक विस्तृत जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
शुरुआती रिपोर्टों में हत्या से जुड़े कुछ विवरणों में अंतर भी है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी एक घटनाक्रम को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
ड्राइवर से पुलिस की पूछताछ
पुलिस ने धीरेंद्र के ड्राइवर रवि को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।
लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक पुलिस को जांच के दौरान ड्राइवर पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया। पुलिस उससे हत्या से पहले और बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
अमर उजाला की रिपोर्ट में भी चालक की भूमिका संदिग्ध मिलने की बात कही गई है। इसके साथ एक अन्य संदिग्ध से भी पूछताछ की सूचना है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हत्या में कितने लोग शामिल थे और इसके पीछे वास्तविक मकसद क्या था।
रुपयों का लेनदेन या जमीन का विवाद?
हत्या की वजह को लेकर पुलिस फिलहाल कई एंगल पर काम कर रही है।
एसीपी गोसाईगंज के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक रुपयों के लेनदेन समेत कई बिंदुओं पर जांच चल रही है।
वहीं आजतक और यूपी तक की शुरुआती रिपोर्टों में जमीन से जुड़ी रंजिश को भी संभावित कारण बताया गया है।
धीरेंद्र लखनऊ और उन्नाव में प्रॉपर्टी का काम भी करते थे। ऐसे में पुलिस उनके हाल के प्रॉपर्टी सौदों और आर्थिक लेनदेन की जानकारी खंगाल रही है।
लेकिन इस स्तर पर जमीन विवाद या पैसों के लेनदेन को हत्या का निश्चित कारण नहीं कहा जा सकता। पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।
एनजीओ के साथ प्रॉपर्टी कारोबार भी करते थे
धीरेंद्र महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े हुए थे। इसके साथ वह उन्नाव और लखनऊ में प्रॉपर्टी का काम भी करते थे।
अमर उजाला के मुताबिक मौजूदा समय में वह लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र की वृंदावन योजना में रहते थे।
उनके सामाजिक और कारोबारी संपर्कों को देखते हुए पुलिस कई लोगों से पूछताछ कर सकती है। धीरेंद्र के फोन रिकॉर्ड और हाल के संपर्क भी जांच के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
खुद को बताते थे भाजपा नेता
मामले में धीरेंद्र की राजनीतिक पहचान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है।
लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक धीरेंद्र खुद को भाजपा नेता बताते थे। हालांकि उन्नाव भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी ने कहा कि धीरेंद्र के पास भाजपा में कोई पद नहीं था।
इसलिए उन्हें सीधे भाजपा का पदाधिकारी बताने के बजाय यह कहना अधिक सटीक है कि वह खुद को भाजपा नेता बताते थे।
कुछ मीडिया रिपोर्टों ने उन्हें हिंदू युवा वाहिनी से जुड़ा नेता बताया है, लेकिन विभिन्न रिपोर्टों में उनकी संगठनात्मक भूमिका को लेकर अलग-अलग विवरण हैं।
मिले हुए थे दो गनर
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू धीरेंद्र की सुरक्षा से जुड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक धीरेंद्र को दो गनर आवंटित थे और वह सामान्य तौर पर सुरक्षा कर्मियों के साथ चलते थे। लेकिन शनिवार को जब वह घर से निकले तो दोनों गनर को घर पर ही छोड़ दिया था।
अब पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि उन्होंने उस दिन सुरक्षाकर्मियों को साथ क्यों नहीं लिया और क्या किसी खास व्यक्ति से मिलने के लिए वह अकेले निकले थे।
यह जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि इसके जरिए शनिवार शाम की उनकी गतिविधियों की कड़ी जोड़ी जा सकती है।
फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर नजर
शव मिलने के बाद फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के समय, चोटों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस उस वाहन की भी जांच कर रही है जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर वारदात या शव को ठिकाने लगाने में किया गया।
इसके अलावा आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज और मोबाइल लोकेशन जैसे डिजिटल साक्ष्य भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
चार टीमें कर रही थीं तलाश
धीरेंद्र के लापता होने के बाद पुलिस ने चार टीमें गठित कर उनकी तलाश शुरू कर दी थी।
अब शव मिलने के बाद यही जांच हत्या के मामले में बदल गई है। संदिग्धों से पूछताछ के साथ पुलिस हत्या की पूरी टाइमलाइन तैयार करने की कोशिश कर रही है।
धीरेंद्र घर से कब निकले, पलासियो मॉल के आसपास उनकी गतिविधियां क्या थीं, वह किससे मिले, मोबाइल कब बंद हुआ और शव दुबग्गा की नहर तक कैसे पहुंचा—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शनिवार को लापता हुए महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालक धीरेंद्र प्रताप सिंह का शव रविवार शाम दुबग्गा क्षेत्र की नहर से बरामद हुआ है। पुलिस ने एक संदिग्ध ड्राइवर को हिरासत में लिया है और रुपयों के लेनदेन, प्रॉपर्टी विवाद समेत कई पहलुओं से हत्या की जांच कर रही है।
जांच आगे बढ़ने के साथ हत्या की असली वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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