उत्तर प्रदेश

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की हाई-लेवल मीटिंग

Saba Naaz
5 July 2026 4:15 PM IST
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की हाई-लेवल मीटिंग
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अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई को मणिराम दास छावनी में आयोजित होगी। इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और फैसला लिया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास करेंगे, जबकि लंबे समय बाद पहली बार बैठक की पूरी कार्यवाही का संचालन महासचिव की जगह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राम मंदिर चढ़ावा मामले के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। दोनों को बैठक में आमंत्रित किया गया है और उनके इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बैठक का सबसे प्रमुख एजेंडा दोनों ट्रस्टियों के इस्तीफे पर विचार करना होगा। ट्रस्ट के सदस्य बहुमत के आधार पर यह तय करेंगे कि इस्तीफे स्वीकार किए जाएं या नहीं। जब तक औपचारिक निर्णय नहीं होता, दोनों सदस्य ट्रस्ट में बने रहेंगे। इसके अलावा बैठक में राम मंदिर चढ़ावा मामले में गठित एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर भी चर्चा की जाएगी। साथ ही मंदिर के वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने, वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय पर विचार और अन्य प्रशासनिक विषयों पर मंथन होगा।

ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी भी ट्रस्टी का इस्तीफा तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक उसे बोर्ड द्वारा स्वीकार न किया जाए। इसके लिए कम से कम एक महीने पहले लिखित सूचना जरूरी होती है और अंतिम निर्णय दो-तिहाई बहुमत से लिया जाता है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अधिकतम 15 सदस्य हो सकते हैं, जिनमें पदेन और आजीवन सदस्य शामिल हैं। एक पद पहले ही रिक्त है और अब दो इस्तीफों के बाद ट्रस्ट की संरचना पर भी असर पड़ सकता है।

नए ट्रस्टी की नियुक्ति भी बैठक का संभावित विषय हो सकता है, जिसमें बोर्ड की दो-तिहाई सहमति आवश्यक होती है। वहीं, उम्र और स्वास्थ्य कारणों से कुछ सदस्य वर्चुअल माध्यम से भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है, क्योंकि इसमें न केवल प्रशासनिक बदलाव बल्कि मंदिर के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

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