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उत्तर प्रदेश: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में अब एक ऐसे सुनसान स्थान का पता चला है, जहां आरोपी चोरी की गई रकम का बंटवारा करते थे और आगे की रणनीति तय की जाती थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अयोध्या-लखनऊ हाईवे के किनारे 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित एक सुनसान जगह आरोपियों का मुख्य मीटिंग प्वाइंट था। चोरी के बाद सभी आरोपी यहां इकट्ठा होते थे, रकम का हिसाब-किताब होता था और आगे की योजना बनाई जाती थी। पुलिस ने बीते शनिवार को 13 घंटे की कस्टडी रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को इसी स्थान पर लेकर जाकर निशानदेही कराई।
जांच के दौरान पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि आरोपी वहां कैसे पहुंचते थे, कितनी देर रुकते थे और चोरी की रकम का बंटवारा किस तरह किया जाता था। पूछताछ में सामने आया कि इस कथित नेटवर्क में अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत कई लोग शामिल थे। बाद में टिन्नू का भतीजा भी इन बैठकों में शामिल होने लगा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने बताया कि चोरी की रकम का अधिकांश समय बराबर-बराबर बंटवारा किया जाता था, हालांकि कुछ मामलों में हिस्सेदारी में अंतर भी रहता था। इस पूरे नेटवर्क में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का प्रभाव अधिक बताया जा रहा है, जो कथित तौर पर आगे की रणनीति तय करता था।
रिमांड के दौरान पुलिस पहले आरोपी को कौशलपुरी स्थित श्याम साधना योग केंद्र भी लेकर गई, जहां दस्तावेजों और साक्ष्यों की तलाश की गई। इसके बाद टीम 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के उस सुनसान स्थान पर पहुंची, जहां कथित तौर पर बैठकें होती थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को भरोसा था कि CCTV फुटेज उनके खिलाफ सबूत नहीं बन पाएंगे। कथित तौर पर रमाशंकर यादव ने अन्य आरोपियों से कहा था कि “कुछ नहीं होगा, CCTV फुटेज डिलीट कर दिए जाएंगे।” हालांकि पुलिस ने इन सभी दावों की जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क और सभी आरोपियों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।





