उत्तर प्रदेश

Panchayat system पर हाईकोर्ट का अहम फैसला

Ratna Netam
26 Jun 2026 9:24 PM IST
Panchayat system पर हाईकोर्ट का अहम फैसला
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Lucknow लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के रूप में बनाए रखने के राज्य सरकार के फैसले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि पंचायतों का कार्यकाल संवैधानिक रूप से पांच वर्ष का होता है और इसे किसी भी प्रशासनिक आदेश या कानून के जरिए बढ़ाया नहीं जा सकता।

हाईकोर्ट की एकल पीठ, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 और 26 मई 2026 को जारी सरकारी आदेशों पर सवाल उठाए। इन आदेशों के तहत पंचायत चुनाव स्थगित कर ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने इन आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चुनाव कराने की स्पष्ट समय-सीमा बताने को कहा है।

कोर्ट ने कहा कि यह आदेश उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) के आधार पर जारी किए गए हैं, जबकि इस प्रावधान को पहले ही खंडपीठ द्वारा असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के पंचायतों के पांच वर्षीय कार्यकाल और समयबद्ध चुनाव की अनिवार्यता तय करते हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को चुनाव में देरी का कारण बताया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद आयोग अपनी रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं कर सका है, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहयोग नहीं मिल रहा है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें ओबीसी आयोग की प्रगति रिपोर्ट, चुनाव कराने की प्रस्तावित समय-सीमा और देरी के कारणों का स्पष्ट विवरण देने को कहा गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा।

न्यायालय ने यह भी कहा कि असंवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आदेश जारी करना प्रथम दृष्टया अवमानना के दायरे में आ सकता है। इस मामले में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

गौरतलब है कि प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार ने चुनाव टालते हुए मौजूदा प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने का निर्णय लिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत प्रशासन और आगामी चुनाव प्रक्रिया को लेकर नई स्थिति उत्पन्न हो गई है और सभी की नजर अब अगली सुनवाई पर टिकी है।

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