उत्तर प्रदेश

हाईकोर्ट का फैसला संविदा पर काम करना नियमित नौकरी का अधिकार नहीं देता

Ratna Netam
4 Sept 2026 3:44 PM IST
हाईकोर्ट का फैसला संविदा पर काम करना नियमित नौकरी का अधिकार नहीं देता
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प्रयागराज : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के तहत काम कर रहे संविदाकर्मियों को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उन कर्मचारियों की याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने लंबे समय तक सेवा देने के आधार पर नियमित नियुक्ति का अधिकार मांगा था। अदालत ने साफ किया कि केवल तीन साल या उससे अधिक समय तक संविदा पर काम करने से किसी कर्मचारी को स्वतः नियमित नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद NRHM के तहत कार्यरत हजारों संविदाकर्मियों के बीच निराशा का माहौल है। कर्मचारियों का तर्क था कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और लगातार काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा। हालांकि अदालत ने कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया और सेवा नियमों के अनुसार ही नियमितीकरण का फैसला लिया जा सकता है।
संविदाकर्मियों ने मांगी थी नियमित नियुक्ति
मामला NRHM के तहत कार्यरत कुछ संविदा कर्मचारियों से जुड़ा था। कर्मचारियों ने अदालत में याचिका दाखिल कर कहा था कि वे लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और जमीनी स्तर पर मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि लगातार तीन साल या उससे अधिक समय तक सेवा देने के बाद उन्हें नियमित नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संविदा व्यवस्था के कारण उन्हें नौकरी की सुरक्षा, वेतनमान और अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि संविदा नियुक्ति और नियमित नियुक्ति अलग-अलग प्रक्रिया हैं। किसी कर्मचारी ने कितने समय तक सेवा दी है, केवल इस आधार पर उसे नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी पदों पर नियुक्ति संविधान और निर्धारित नियमों के तहत होती है। नियमित नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया, योग्यता और अन्य जरूरी मानकों का पालन करना आवश्यक है।
कोर्ट ने कहा कि संविदाकर्मियों की सेवा महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इससे उन्हें अपने आप स्थायी नियुक्ति का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।
कर्मचारियों को क्यों नहीं मिली राहत?
NRHM संविदाकर्मियों की ओर से दलील दी गई थी कि वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही काम कर रहे हैं। कई कर्मचारी वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में तैनात हैं और विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
लेकिन अदालत ने माना कि संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति एक निश्चित अवधि और विशेष शर्तों के आधार पर होती है। सरकार की ओर से नियमितीकरण के लिए कोई विशेष नीति या नियम नहीं होने पर अदालत सीधे स्थायी नियुक्ति का आदेश नहीं दे सकती।
सरकारी नौकरी में नियमितीकरण को लेकर पहले भी फैसले
देश की विभिन्न अदालतें समय-समय पर यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि संविदा कर्मचारियों को केवल लंबे समय तक काम करने के आधार पर नियमित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में कह चुका है कि सरकारी सेवाओं में नियमित नियुक्ति के लिए उचित प्रक्रिया जरूरी है। बिना भर्ती प्रक्रिया के नियमितीकरण करना समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ हो सकता है।
NRHM कर्मचारियों की भूमिका अहम
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम करने वाले संविदाकर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। इनमें एएनएम, लैब टेक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्वास्थ्य सलाहकार और अन्य पदों पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल होते हैं।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में इन कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी NRHM कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं में अहम योगदान दिया था।
कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
हाईकोर्ट के फैसले के बाद संविदाकर्मियों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद नौकरी की स्थिरता नहीं मिल रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को उनके अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण या स्थायी व्यवस्था के लिए नीति बनानी चाहिए।
सरकार के सामने भी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के सामने संविदा कर्मचारियों की मांगों को लेकर लगातार दबाव बना हुआ है। बड़ी संख्या में कर्मचारी नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।
हालांकि सरकार के लिए सभी संविदाकर्मियों को नियमित करना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए वित्तीय बोझ, पदों की उपलब्धता और भर्ती नियमों जैसे कई पहलुओं पर विचार करना पड़ता है।
आगे क्या रास्ता?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब NRHM संविदाकर्मी सरकार से नीति बनाने की मांग कर सकते हैं। यदि सरकार नियमितीकरण या सेवा सुरक्षा को लेकर कोई नई योजना बनाती है तो कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
इसके अलावा कर्मचारी उच्च न्यायालय के फैसले को आगे चुनौती देने या अन्य कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।
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