उत्तर प्रदेश

लखनऊ में गोमती की बाढ़ से हाहाकार, 11 साल से अधूरी बांध योजना ने बढ़ाई मुश्किलें

Kavita2
9 Oct 2026 9:11 AM IST
लखनऊ में गोमती की बाढ़ से हाहाकार, 11 साल से अधूरी बांध योजना ने बढ़ाई मुश्किलें
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लखनऊ: राजधानी लखनऊ में गोमती नदी की बाढ़ ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया है। जलभराव के कारण लाखों लोग संकट का सामना कर रहे हैं। बाढ़ के दस दिन बीत जाने के बाद भी प्रभावित इलाकों में हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। शहर के कई हिस्सों में पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों की परेशानियां लगातार बनी हुई हैं। गोमती नगर विस्तार के सेक्टर सात में इकाना स्टेडियम के पीछे स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी पूरी तरह पानी में डूब गया है। बाढ़ और जलभराव की स्थिति ने शहर की व्यवस्था तथा लंबे समय से लंबित बांध निर्माण योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी को नियंत्रित करने के लिए अब सड़क पर मिट्टी का अस्थायी बंधा बनाया गया है। अधिकारियों की सक्रियता उस समय दिखाई दे रही है, जब पानी पहले ही कई क्षेत्रों में फैल चुका है और लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह सवाल भी उठाती है कि बाढ़ से बचाव के लिए पहले से तैयारियां क्यों नहीं की गईं और लंबे समय से प्रस्तावित योजना को समय पर पूरा करने की दिशा में प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।

इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के आसपास जलभराव

गोमती नगर विस्तार के सेक्टर सात में इकाना स्टेडियम के पीछे बने एलडीए के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी में डूब जाना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। बाढ़ का असर शहर की महत्वपूर्ण जगहों के आसपास भी दिखाई दे रहा है। इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के आसपास जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

सड़कों पर पानी भरने और नाव चलने के दृश्य राजधानी के सामने आई चुनौती को उजागर कर रहे हैं। सामान्य आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाली सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। जलभराव की इन तस्वीरों ने लखनऊ की छवि पर भी असर डाला है। राजधानी जैसे महत्वपूर्ण शहर में बाढ़ के कारण इस तरह के दृश्य सामने आना शहरी नियोजन और जल निकासी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पानी रोकने के लिए बनाया गया अस्थायी बंधा

पानी को नियंत्रित करने के लिए सड़क पर मिट्टी का अस्थायी बंधा बनाया गया है। यह कदम तत्काल स्थिति को संभालने के प्रयास के रूप में सामने आया है, लेकिन इससे लंबे समय से लंबित स्थायी बांध योजना को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी का फैलाव रोकने के लिए स्थायी इंतजामों की जरूरत महसूस की जा रही है।

अधिकारियों की ओर से अब बिल्डरों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। बांध के लिए खर्च की वसूली के संबंध में भी नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, बाढ़ के संकट के बीच नोटिस जारी करने की कार्रवाई यह सवाल उठाती है कि जब बांध निर्माण की योजना पहले से मौजूद थी, तब उसे पूरा करने में इतनी देरी क्यों हुई।

प्रभावित इलाकों में लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं। दस दिन बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं होने के कारण बाढ़ से जुड़ी परेशानियां बनी हुई हैं। ऐसे में अस्थायी उपायों के साथ-साथ स्थायी समाधान की आवश्यकता भी सामने आ रही है।

बजट और टेंडर के बावजूद 11 साल से अधूरी योजना

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बांध निर्माण की उस योजना को लेकर है, जो करीब 11 साल से अधूरी बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बांध निर्माण के लिए बजट उपलब्ध था और सिंचाई विभाग ने इसके लिए टेंडर भी जारी किया था। इसके बावजूद योजना पूरी नहीं हो सकी।

बजट और टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद भी परियोजना का अधूरा रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यदि बांध का निर्माण समय पर पूरा हो जाता, तो बाढ़ के दौरान पानी को नियंत्रित करने और प्रभावित क्षेत्रों को बचाने में उसकी क्या भूमिका होती, यह महत्वपूर्ण सवाल है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि बांध बनने से मौजूदा बाढ़ का पूरा प्रभाव रुक जाता, लेकिन योजना का वर्षों तक अधूरा रहना चिंता का विषय जरूर है।

अब बाढ़ के बीच अस्थायी बंधा बनाने और बिल्डरों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि समस्या सामने आने के बाद बचाव के उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है। सवाल यह है कि पहले से मौजूद योजना को पूरा करने में हुई देरी के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी और स्थायी समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

राहत और स्थायी समाधान की दरकार

गोमती की बाढ़ ने लखनऊ में हजारों लोगों को बेघर किया है, जबकि जलभराव के कारण लाखों लोगों के सामने संकट बना हुआ है। इकाना स्टेडियम के पीछे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का डूबना और प्रमुख स्थानों के आसपास पानी भरना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। दस दिन बाद भी राहत नहीं दिखने से प्रभावित लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो पाई हैं।

इस समय प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के साथ पानी की निकासी और जलभराव पर नियंत्रण जरूरी है। वहीं, 11 साल से अधूरी बांध योजना को लेकर भी स्पष्ट जवाबदेही सामने आनी चाहिए। बजट और टेंडर जारी होने के बावजूद परियोजना पूरी क्यों नहीं हुई, इसकी पड़ताल और स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाना महत्वपूर्ण है।

लखनऊ में बाढ़ की मौजूदा स्थिति ने दिखाया है कि किसी योजना का बजट तय होना या टेंडर जारी हो जाना ही पर्याप्त नहीं है। उसका समय पर पूरा होना भी उतना ही जरूरी है। अब देखना होगा कि अस्थायी बंधे और नोटिस जारी करने की कार्रवाई के बाद प्रशासन स्थायी बांध निर्माण तथा जलभराव की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।

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