उत्तर प्रदेश

सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार हुई हिंदू महासभा की याचिका, चढ़ावा चोरी मामले पर होगी सुनवाई

nidhi
9 Oct 2026 9:07 AM IST
सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार हुई हिंदू महासभा की याचिका, चढ़ावा चोरी मामले पर होगी सुनवाई
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चढ़ावा चोरी मामले में हिंदू महासभा को सुप्रीम कोर्ट से राहत

अयोध्या : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, मंदिर निर्माण में कमीशनखोरी और जमीन खरीद से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी। अदालत ने याचिका को इसी विषय से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।

हिंदू महासभा की इस याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में मंदिर के लिए प्राप्त चढ़ावे की धनराशि के कथित दुरुपयोग, निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी और मंदिर के आसपास जमीन की खरीद में अनियमितताओं के आरोप उठाए गए हैं। हालांकि, ये याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। अदालत में सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार किए जाने का अर्थ आरोपों को सही ठहराया जाना नहीं है।
हिंदू महासभा की ओर से दायर जनहित याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने और उसके पुनर्गठन की मांग भी की गई है। इसके साथ ही चढ़ावे और अन्य धनराशि के लेन-देन की स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है। याचिका में मांग रखी गई है कि जांच किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की समिति से कराई जाए, ताकि वित्तीय लेन-देन से संबंधित आरोपों की पड़ताल हो सके।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। इस मामले में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है। जमीन खरीद से जुड़े कथित लेन-देन और मंदिर की संपत्तियों से संबंधित आरोप भी याचिका के प्रमुख विषयों में शामिल हैं। इन सभी बिंदुओं पर आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत में होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति मिलने के बाद अब 2 नवंबर की तारीख अहम हो गई है। अदालत इस मामले को इससे संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनेगी। इससे संबंधित मामलों में उठाए गए सवालों पर एक साथ सुनवाई होगी। हालांकि, अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों पर क्या निष्कर्ष निकालेगी या कोई अंतिम आदेश देगी।
राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और धनराशि के कथित दुरुपयोग का मामला धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही से संबंधित सवाल भी सामने लाता है। मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त धनराशि तथा जमीन की खरीद से जुड़े लेन-देन पर उठाए गए सवालों की कानूनी जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सुनवाई के दौरान स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम हिंदू महासभा की जनहित याचिका का संबंधित लंबित याचिकाओं के साथ जुड़ना और अगली सुनवाई की तारीख तय होना है। 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान याचिका में उठाई गई मांगों तथा संबंधित मामलों पर आगे की कार्यवाही का रास्ता स्पष्ट हो सकता है। अदालत के अंतिम निर्णय से पहले किसी भी आरोप को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
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