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चंदौली। रबी फसलों की बोआई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कृषि विभाग ने किसानों को गेहूं, चना, मटर, मसूर और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराने की तैयारी पूरी कर ली है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजकीय बीज गोदामों में विभिन्न फसलों के बीज पहुंचा दिए गए हैं। जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव के अनुसार, ऑनलाइन बुकिंग की पुष्टि प्राप्त करने वाले किसान निर्धारित सरकारी गोदामों से बीज प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विभाग की इस पहल से किसानों को खेती की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अनुदान का लाभ संबंधित योजना की पात्रता, उपलब्ध स्टॉक और विभागीय नियमों के अनुसार मिलेगा।
रबी फसलों की बोआई के लिए तैयारियां तेज
रबी का सीजन शुरू होने के साथ ही किसान अपने खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं। अक्टूबर से नवंबर के बीच कई क्षेत्रों में गेहूं, चना, मटर, मसूर और सरसों जैसी फसलों की बोआई की जाती है।
खेती में अच्छी पैदावार के लिए उचित समय पर सही किस्म के बीजों का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को अनुदानित दरों पर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
सरकारी गोदामों में बीज उपलब्ध होने से किसानों को निजी बाजारों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके साथ ही प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीजों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इन पांच फसलों के बीजों पर मिलेगा अनुदान
कृषि विभाग ने रबी सीजन की प्रमुख फसलों के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जानकारी दी है।इनमें गेहूं, चना, मटर, मसूर और सरसों के बीज शामिल हैं।गेहूं देश की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में से एक है। वहीं चना, मटर और मसूर दलहनी फसलें हैं, जिनकी खेती से किसानों को आमदनी के अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।सरसों प्रमुख तिलहनी फसल है, जिसका उपयोग खाद्य तेल के उत्पादन में किया जाता है।किसान अपनी जमीन, सिंचाई की सुविधा और स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त फसल का चयन कर सकते हैं।
ऑनलाइन बुकिंग के बाद मिलेगा बीज
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि राजकीय बीज गोदामों पर किसानों के लिए रबी फसलों के बीज उपलब्ध करा दिए गए हैंजिन किसानों ने निर्धारित ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से बीज की बुकिंग की है और उनकी बुकिंग की पुष्टि हो चुकी है, वे संबंधित सरकारी गोदामों से बीज प्राप्त कर सकते हैं।
ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को व्यवस्थित तरीके से बीज उपलब्ध कराना है।इससे उपलब्ध स्टॉक का रिकॉर्ड रखने और पात्र किसानों तक बीज पहुंचाने में मदद मिल सकती है।हालांकि, बुकिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पोर्टल, अंतिम तारीख और दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी संबंधित कृषि कार्यालय से प्राप्त करनी चाहिए।
चंदौली जिले में किसानों के लिए विशेष व्यवस्था
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में कृषि विभाग ने रबी फसलों के बीज वितरण को लेकर विशेष तैयारियां की हैं। विभाग ने किसानों से समय रहते ऑनलाइन बुकिंग कराने की अपील की है।
सितंबर 2026 में जारी विभागीय जानकारी के अनुसार, जिले में गेहूं के 53,070 पैकेट, चना के 1,538 पैकेट, सरसों के 600 पैकेट और मसूर के 1,462 पैकेट उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।इसके बाद सितंबर के अंत तक कई फसलों की बुकिंग में तेजी दर्ज की गई। विभाग ने शेष पात्र किसानों से बुकिंग की प्रक्रिया पूरी करने की अपील की थी।
किसानों को कैसे मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान?
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि विभाग के निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी।किसान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की वेबसाइट agriculture.up.gov.in पर जाकर संबंधित बीज योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।बुकिंग की पुष्टि होने के बाद किसान अपने संबंधित राजकीय बीज गोदाम से बीज प्राप्त कर सकते हैं।अनुदानित बीजों का वितरण निर्धारित लक्ष्य और उपलब्ध स्टॉक के अनुसार किया जाएगा। किसानों को गोदाम जाने से पहले अपनी बुकिंग की स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए।
खेती की लागत कम करने में मिलेगी मदद
खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य संसाधनों पर किसानों को काफी खर्च करना पड़ता है। इनमें गुणवत्तापूर्ण बीज की खरीद भी एक महत्वपूर्ण खर्च है।यदि किसानों को निर्धारित बीज मूल्य पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है, तो उनकी शुरुआती खेती लागत कम हो सकती है।इसका विशेष लाभ सीमित संसाधनों वाले किसानों को मिलने की उम्मीद है।हालांकि, अनुदान की वास्तविक राशि बीज की किस्म, निर्धारित कीमत और योजना की शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
दलहनी और तिलहनी खेती पर विशेष जोर
कृषि विभाग रबी सीजन में गेहूं के साथ दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती को भी बढ़ावा दे रहा है।चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलें किसानों को फसल विविधीकरण का विकल्प देती हैं। उपयुक्त परिस्थितियों में इन फसलों की खेती से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
वहीं सरसों की खेती खाद्य तेल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।किसानों को फसल का चुनाव करने से पहले मिट्टी की स्थिति, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय मौसम का ध्यान रखना चाहिए।किसानों को मुफ्त बीज मिनीकिट भी वितरितचंदौली जिले में अनुदानित बीजों के अतिरिक्त चयनित किसानों को निःशुल्क बीज मिनीकिट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
3 अक्टूबर 2026 को सकलडीहा स्थित किसान कल्याण केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 55 किसानों को चना, मटर और सरसों के निःशुल्क बीज मिनीकिट वितरित किए गए।इस कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव भी मौजूद रहे।मिनीकिट वितरण का उद्देश्य किसानों को दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।
समय पर बोआई करने की अपील
कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल और क्षेत्र की जलवायु के अनुसार निर्धारित समय पर बोआई करें।देरी से बोआई करने पर कुछ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा सही बीज दर, संतुलित उर्वरक और उचित सिंचाई का ध्यान रखना भी जरूरी है।किसान अपनी जरूरत के अनुसार बीज की किस्म और मात्रा चुनने के लिए कृषि विभाग के कर्मचारियों या कृषि विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं।
सरकारी गोदामों में संपर्क करें किसान
कृषि विभाग की ओर से किसानों को सलाह दी गई है कि ऑनलाइन बुकिंग की पुष्टि होने के बाद संबंधित राजकीय बीज गोदाम से संपर्क करें।बीज प्राप्त करते समय किसानों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जरूरी दस्तावेज और बुकिंग संबंधी जानकारी पहले से तैयार रखने पर सुविधा होगी।सरकारी योजना के तहत बीज की उपलब्धता सीमित लक्ष्य के अनुसार होती है। इसलिए किसान अपनी पात्रता और स्टॉक की जानकारी समय रहते प्राप्त करें।
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