उत्तर प्रदेश

चुनावी नामांकन में उम्र की गलत जानकारी देना पड़ा भारी अध्यक्ष बर्खास्त

Ratna Netam
10 Aug 2026 8:22 PM IST
चुनावी नामांकन में उम्र की गलत जानकारी देना पड़ा भारी अध्यक्ष बर्खास्त
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उत्तर प्रदेश : फिरोजाबाद जिले में एका नगर पंचायत की भाजपा अध्यक्ष माया देवी सागर को पद से बर्खास्त कर दिया गया है। शासन ने यह कार्रवाई नामांकन के दौरान उम्र संबंधी जानकारी छिपाने के आरोपों की जांच में पुष्टि होने के बाद की है। माया देवी लगातार दूसरी बार भाजपा के टिकट पर नगर पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। उनके खिलाफ वर्ष 2017 के चुनाव में नामांकन के समय निर्धारित आयु पूरी नहीं होने के बावजूद अधिक उम्र दर्शाने का आरोप लगाया गया था। मामला पहले हाई कोर्ट पहुंचा और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक भी इसकी कानूनी लड़ाई चली।
शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, माया देवी को उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 48 क(ख) के तहत तत्काल प्रभाव से नगर पंचायत एका के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक नगर पंचायत की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा नामित अधिकारी करेंगे। इसी आदेश के तहत सोमवार को जसराना के उपजिलाधिकारी ऋषभ पुंडीर नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे और उन्होंने प्रशासनिक एवं वित्तीय जिम्मेदारियां संभाल लीं।
माया देवी के खिलाफ यह मामला वर्ष 2017 के नगर पंचायत चुनाव से जुड़ा है। एका निवासी उमेश चंद्र ने आरोप लगाया था कि नामांकन के दौरान माया देवी ने अपनी उम्र 30 वर्ष दर्शाई थी, जबकि उनके हाईस्कूल के दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर वह निर्धारित आयु सीमा से कम थीं। शिकायतकर्ता ने इस मामले में शासन से कार्रवाई की मांग की थी। शासन स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट ने मामले को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन ने मामले की जांच कराई और माया देवी को अपना पक्ष रखने तथा व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया। जांच में हाईस्कूल की अंकतालिका में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर यह सामने आया कि वर्ष 2017 में नामांकन के समय उनकी आयु 30 वर्ष पूरी नहीं हुई थी। जांच रिपोर्ट में उनकी उम्र करीब नौ महीने कम पाई गई।
मामला आगे बढ़ने के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कार्रवाई में देरी को लेकर न्यायालय की अवमानना याचिका भी दाखिल की गई। इसके बाद न्यायालय ने शासन से जवाब मांगा। शासन की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आखिरकार आठ अगस्त को माया देवी को अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी किया गया।
इस पूरे विवाद की कानूनी पृष्ठभूमि पहले भी सामने आ चुकी है। शासन ने 24 जुलाई 2025 को माया देवी के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाई थी। हालांकि हाई कोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद उन्हें दोबारा अधिकार मिल गए थे। अब शासन की ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर नगर पंचायत का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण अधिकारी के हाथों में चला गया है।
हालांकि माया देवी सागर ने शासन के आदेश और कार्रवाई को गलत बताया है। उनका कहना है कि उन्हें अभी तक शासन की ओर से कोई पत्र नहीं मिला है और वह इस समय जिले से बाहर हैं। उन्होंने दावा किया कि 16 जनवरी 2024 को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने आदेश दिया था कि कार्यकाल और पद समाप्त होने के बाद धारा 48 के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। उनका आरोप है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश के तहत कई मुकदमे किए गए, लेकिन उनमें वह दोषी नहीं पाई गईं।
माया देवी ने यह भी कहा कि वर्ष 2017 में चुनाव अधिकारियों ने जो दस्तावेज मांगे थे, वे सभी जमा किए गए थे। उनके अनुसार हाईस्कूल की अंकतालिका खो गई थी और इसकी एफआईआर की प्रति भी उनके पास मौजूद है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में वह दोबारा नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीत चुकी हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता का कोई आरोप नहीं है, इसलिए धारा 48 लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पांच अगस्त 2025 को इस मामले में स्टे मिला था।
माया देवी ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और शासन के फैसले के खिलाफ वह न्यायालय का रुख करेंगी। वहीं शासन की कार्रवाई के बाद फिलहाल नगर पंचायत एका का प्रशासनिक संचालन एसडीएम जसराना के जिम्मे आ गया है। अब आगे राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के बाद उपचुनाव की स्थिति स्पष्ट होगी। इस पूरे मामले में अंतिम कानूनी स्थिति न्यायालय में होने वाली सुनवाई और आगे के आदेशों पर निर्भर करेगी।
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