उत्तर प्रदेश

शाकंभरी देवी मंदिर क्षेत्र में बाढ़ का कहर दुकानें डूबीं और रास्ते बंद

Ratna Netam
10 Aug 2026 8:17 PM IST
शाकंभरी देवी मंदिर क्षेत्र में बाढ़ का कहर दुकानें डूबीं और रास्ते बंद
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सहारनपुर : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में शिवालिक पहाड़ियों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद सोमवार तड़के मां शाकंभरी देवी मंदिर क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। रात करीब दो बजे शाकंभरी खोल में तेज उफान आने से पानी मंदिर के मुख्य द्वार की सीढ़ियों तक पहुंच गया। देखते ही देखते मंदिर से सटे बाजार में पानी भर गया और करीब आधा दर्जन दुकानें बाढ़ की चपेट में आ गईं। पानी का बहाव इतना तेज था कि दुकानदारों को अपना सामान बचाने तक का मौका नहीं मिला। दुकानों में रखा प्रसाद, नारियल, चुनरी, छत्र, फर्नीचर समेत लाखों रुपये का सामान पानी में डूब गया।
अचानक आई बाढ़ से मंदिर क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने तत्काल शाकंभरी देवी मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया। भूरादेव मंदिर के पास नाकाबंदी कर श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी गई। पुलिस के साथ पीएसी की फ्लड कंपनी के जवानों को भी तैनात किया गया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों को लगातार अनाउंसमेंट और सायरन के माध्यम से सतर्क किया गया, ताकि किसी तरह की जनहानि को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों के मुताबिक शाकंभरी खोल में आया यह उफान पिछले करीब एक दशक में सबसे भयावह रहा। रविवार रात करीब 12 बजे से ही शिवालिक पहाड़ियों और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश हो रही थी। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश का पानी सोमवार तड़के करीब दो बजे शाकंभरी खोल में पहुंचा और देखते ही देखते नदी जैसी स्थिति बन गई। तेज बहाव के कारण पानी मंदिर के प्रवेश और निकास द्वार की सीढ़ियों तक पहुंच गया। इसके बाद आसपास के बाजार में भी पानी घुस गया।
बाढ़ का असर शाकंभरी देवी मंदिर क्षेत्र में चल रहे एलिवेटेड पुल के निर्माण कार्य पर भी पड़ा। निर्माण स्थल पर मौजूद क्रेन, जनरेटर और अन्य मशीनरी में पानी घुस गया। लोहे की प्लेट, पाइप और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री तेज बहाव में बह गई। कार्यदायी संस्था को इस घटना में काफी नुकसान होने की आशंका है। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
बाढ़ के पानी ने मंदिर क्षेत्र के मुख्य बाजार की कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। दुकानदारों का कहना है कि पानी इतनी तेजी से आया कि उन्हें सामान समेटने का समय ही नहीं मिला। प्रसाद और पूजा सामग्री के अलावा फर्नीचर समेत अन्य सामान पानी में डूब गया। अचानक आई इस आपदा से व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। स्थानीय लोग प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित दुकानदारों को राहत देने की मांग कर रहे हैं।
शाकंभरी खोल के साथ शिवालिक क्षेत्र से निकलने वाली बड़कला, शहंश्रा और हिंडन जैसी बरसाती नदियों में भी पानी का स्तर काफी बढ़ गया। तेज बहाव के कारण बेहट-बिहारीगढ़ मार्ग समेत कई संपर्क मार्ग प्रभावित हुए। कोठड़ी, बारूगढ़, कालूवाला टोंगिया समेत करीब दर्जनभर गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क भी लगभग 12 घंटे तक बाधित रहा। कई स्थानों पर लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
पानी का स्तर बढ़ने के कारण प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती। पुलिसकर्मियों ने लोगों को नदी और बरसाती खोल के आसपास जाने से रोकने के साथ सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की। प्रशासन की ओर से हालात पर लगातार नजर रखी गई। सुबह करीब 11 बजे तक शाकंभरी खोल का जलस्तर काफी ऊंचा रहा, लेकिन दोपहर करीब दो बजे पानी का स्तर कुछ कम होने लगा। इसके बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
हालांकि शिवालिक पहाड़ियों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की स्थिति में दोबारा जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की है। फिलहाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है, जिसके बाद प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
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