उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद की मेयर का मोबाइल हैक, लोगों को किया अलर्ट

Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 1:40 PM IST
गाजियाबाद की मेयर का मोबाइल हैक, लोगों को किया अलर्ट
x
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में साइबर अपराधियों ने इस बार एक बड़ी जनप्रतिनिधि को निशाना बनाया है। गाजियाबाद नगर निगम की महापौर सुनीता दयाल का मोबाइल फोन साइबर अपराधियों द्वारा हैक किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना की जानकारी खुद मेयर सुनीता दयाल ने दी है। उन्होंने नागरिकों और अपने परिचितों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और उनके नाम पर आने वाले किसी भी संदेश के आधार पर पैसे न भेजें।
महापौर का मोबाइल हैक होने की जानकारी सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि साइबर अपराधियों के निशाने पर केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि भी आ रहे हैं। ऐसे में मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
मेयर सुनीता दयाल ने खुद दी जानकारी
गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल ने अपने मोबाइल फोन के हैक होने की जानकारी सार्वजनिक करते हुए लोगों को सावधान किया है।उन्होंने कहा कि अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को पैसे न भेजें। साथ ही उनके नाम से आने वाले किसी असामान्य संदेश की सत्यता जांचने की सलाह दी गई है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि साइबर अपराधियों ने उनके मोबाइल फोन तक पहुंच किस तकनीक के माध्यम से हासिल की। मोबाइल में किसी संदिग्ध एप्लीकेशन, लिंक या अन्य तकनीकी कमजोरी का इस्तेमाल किया गया था या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
मोबाइल हैक होने से बढ़ी चिंता
किसी जनप्रतिनिधि का मोबाइल फोन हैक होना गंभीर साइबर सुरक्षा का मामला है। ऐसे व्यक्ति के मोबाइल में कई महत्वपूर्ण संपर्क नंबर, आधिकारिक बातचीत और अन्य जानकारियां हो सकती हैं।यदि साइबर अपराधी किसी मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो वे उसमें मौजूद जानकारी का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं।इसके अलावा मोबाइल के माध्यम से जुड़े मैसेजिंग एप और अन्य डिजिटल खातों तक पहुंचने का जोखिम भी हो सकता है।हालांकि, सुनीता दयाल के मामले में किस प्रकार की जानकारी प्रभावित हुई है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी व्यक्तिगत जानकारी के लीक होने या आर्थिक नुकसान का दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।
परिचितों को भी सतर्क रहने की जरूरत
साइबर अपराध के कई मामलों में अपराधी किसी व्यक्ति का मोबाइल या मैसेजिंग अकाउंट अपने नियंत्रण में लेकर उसके परिचितों से संपर्क करते हैं।इसके बाद वे आपातकालीन जरूरत, इलाज या किसी अन्य बहाने से पैसों की मांग कर सकते हैं।ऐसे संदेशों में अपराधी संबंधित व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके विश्वास हासिल करने की कोशिश करते हैं।इसी वजह से सुनीता दयाल ने लोगों को उनके नाम पर आने वाले संदिग्ध संदेशों से सावधान रहने की अपील की है।यदि किसी परिचित के नंबर से अचानक पैसों की मांग करने वाला संदेश आए, तो बिना पुष्टि किए रकम भेजने से बचना चाहिए।
गाजियाबाद में पहले भी सामने आए साइबर ठगी के मामले
गाजियाबाद में मोबाइल हैकिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी के कई मामले सामने आ चुके हैं।हाल ही में राजेंद्र नगर निवासी एक व्यक्ति के मोबाइल पर साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से एपीके फाइल भेजी थी।आरोपियों ने पेंशन कार्ड से संबंधित फाइल के नाम पर मोबाइल तक पहुंच बनाई और पीड़ित के बैंक खाते से 4.88 लाख रुपये निकाल लिए।इस मामले में अपराधियों ने पीड़ित की चार फिक्स्ड डिपॉजिट भी समय से पहले बंद कराकर रकम बचत खाते में स्थानांतरित कर दी थी।
पीड़ित
की शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
बिना ओटीपी बताए भी हो सकती है ठगी
साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों में लगातार बदलाव आ रहा है। अब अपराधी केवल ओटीपी मांगकर ही ठगी नहीं करते, बल्कि फर्जी एप्लीकेशन और खतरनाक फाइलों के माध्यम से भी मोबाइल तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं।मार्च 2026 में गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा किया था, जो यातायात चालान और बैंकिंग नोटिस के नाम पर लोगों को फर्जी एपीके फाइल भेजता था।पुलिस के अनुसार, इन फाइलों को इंस्टॉल करने के बाद अपराधी मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते थे।इस गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और सिम कार्ड सहित अन्य सामान बरामद किया था।
साइबर अपराधी कैसे बनाते हैं निशाना?
साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।कभी बैंक खाते की केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर लिंक भेजा जाता है, तो कभी बिजली बिल, गैस कनेक्शन या यातायात चालान का डर दिखाकर मोबाइल में एप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।कई मामलों में अपराधी फर्जी वेबसाइट बनाकर उपयोगकर्ताओं से पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।इसके अलावा व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर भेजी गई संदिग्ध फाइलें भी साइबर हमले का माध्यम बन सकती हैं।
मोबाइल हैक होने पर तुरंत क्या करें?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को अपने मोबाइल के हैक होने की आशंका हो, तो उसे तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए।सबसे पहले संदिग्ध एप्लीकेशन और अनजान फाइलों की जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर मोबाइल को इंटरनेट से अलग कर दिया जाए।महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड किसी दूसरे सुरक्षित डिवाइस से बदलने चाहिए। साथ ही बैंक और डिजिटल भुगतान से जुड़े खातों की गतिविधियों की जांच करना जरूरी है।यदि किसी खाते से अनधिकृत लेनदेन हुआ है, तो तुरंत बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचना देनी चाहिए।
1930 पर कर सकते हैं शिकायत
देश में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 उपलब्ध है।इसके अलावा नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।शिकायत करते समय संदिग्ध मोबाइल नंबर, संदेश, लेनदेन का विवरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखना उपयोगी होता है।समय पर शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को मामले की जांच और संभावित वित्तीय नुकसान रोकने में सहायता मिल सकती है।
डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश
गाजियाबाद की मेयर सुनीता दयाल के मोबाइल हैक होने की घटना ने डिजिटल सुरक्षा की अहमियत को फिर सामने ला दिया है।यह मामला बताता है कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ व्यक्तिगत और आधिकारिक डिजिटल खातों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।फिलहाल इस घटना में किसी आर्थिक नुकसान, डेटा चोरी या आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
Next Story