उत्तर प्रदेश

बाढ़ ने काटा संपर्क मार्ग ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी पुल जिम्मेदार अधिकारी बेखबर

nidhi
15 Aug 2026 8:01 AM IST
बाढ़ ने काटा संपर्क मार्ग ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी पुल जिम्मेदार अधिकारी बेखबर
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बिजनौर से मेरठ जाने वालों की बढ़ी मुश्किल जुगाड़ के पुल पर भी देना पड़ रहा पैसा
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर और मेरठ क्षेत्र के बीच बाढ़ के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्य मार्ग प्रभावित होने के बाद ग्रामीणों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अस्थायी पुल का सहारा लिया है। अब इस जुगाड़ वाले पुल से बाइक और अन्य छोटे वाहनों को पार कराने के लिए लोगों से शुल्क लिया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
बाढ़ के पानी के कारण कई रास्ते खराब हो गए हैं, जिससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नौकरी, व्यापार और जरूरी कामों के लिए यात्रा करने वाले ग्रामीणों को मजबूरी में अस्थायी रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
अस्थायी पुल बना लोगों की मजबूरी
बाढ़ के बाद प्रभावित मार्गों पर आवाजाही बंद होने से स्थानीय लोगों ने मिलकर अस्थायी पुल तैयार किया। इस पुल के जरिए बाइक और छोटे वाहन निकाले जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह रास्ता जोखिम भरा होने के बावजूद उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, इस अस्थायी व्यवस्था से उन्हें समय की बचत तो हो रही है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त पैसे भी देने पड़ रहे हैं। कई लोगों ने इसे मजबूरी का फायदा उठाना बताया है।
बाइक पार कराने के लिए लिया जा रहा शुल्क
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी पुल से बाइक निकालने के लिए प्रति वाहन शुल्क लिया जा रहा है। रोजाना इस रास्ते से बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं, जिससे यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब बाढ़ के कारण सरकारी रास्ते प्रभावित हुए हैं तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या से अनजान बने हुए हैं।
ग्रामीणों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अस्थायी पुल किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है। बारिश और तेज बहाव के बीच इस रास्ते से गुजरना खतरनाक है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी पुल या सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बाढ़ जैसी आपदा के बाद सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीणों को उठानी पड़ती है। ऐसे समय में प्रशासन की सक्रियता बेहद जरूरी होती है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दिनों से समस्या बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि अधिकारियों की टीम मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाए और जल्द समाधान निकाला जाए। फिलहाल लोग अपनी जान जोखिम में डालकर अस्थायी पुल का इस्तेमाल कर रहे हैं। बाढ़ के बाद बनी यह स्थिति क्षेत्र में प्रशासनिक तैयारियों और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
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