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कठुआ फायरिंग में शहीद CISF सहायक कमांडेंट अंकित पांडेय को अंतिम विदाई

प्रयागराज। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में फायरिंग की घटना में जान गंवाने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के सहायक कमांडेंट अंकित पांडेय का पार्थिव शरीर गुरुवार दोपहर उनके पैतृक गांव इब्राहिमपुर के मठिया पहुंचा। पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
CISF के अधिकारियों और जवानों की मौजूदगी में अंकित पांडेय को अंतिम सलामी दी गई। प्रयागराज से पहुंचे CISF के डीआईजी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद गांव से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें विदाई दी।
अंकित पांडेय जम्मू-कश्मीर के कठुआ स्थित एक जल विद्युत परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे। मंगलवार शाम वहां हुई फायरिंग की घटना में उन्हें गोली लग गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया था।
गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचने से पहले ही गांव में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। परिवार के सदस्य सुबह से ही उनके अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही CISF का वाहन पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचा, वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
इब्राहिमपुर के दौलतपुर एकसरा के मठिया निवासी अंकित पांडेय शुरू से ही सुरक्षा बल में सेवा करने की इच्छा रखते थे। वर्ष 2016 में उनका चयन CISF में दारोगा के पद पर हुआ था। नियुक्ति के बाद उन्होंने विभिन्न स्थानों पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
सेवा के दौरान उनकी कार्यक्षमता और अनुभव के आधार पर दो वर्ष पहले उनका चयन सहायक कमांडेंट के पद पर हुआ। इसके बाद उन्हें महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारियां दी गईं। वर्तमान में वे जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हाइड्रो प्लांट की सुरक्षा में तैनात थे।
परिवार और ग्रामीणों के लिए अंकित की अचानक मौत किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। गांव के लोगों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद भी उनका गांव से जुड़ाव बना रहा। छुट्टी मिलने पर वह परिवार और ग्रामीणों से मिलने आते थे।
मंगलवार शाम हुई फायरिंग की घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही परिवार के लोग परेशान थे। बाद में उनकी मौत की पुष्टि होने पर गांव में मातम छा गया। खबर फैलते ही रिश्तेदार और परिचित परिवार को सांत्वना देने के लिए घर पहुंचने लगे।
गुरुवार को पार्थिव शरीर आने के बाद गांव का माहौल बेहद गमगीन हो गया। घर के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। आसपास के ग्रामीणों ने उन्हें संभालने की कोशिश की।
CISF अधिकारियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर अंकित पांडेय को सम्मान दिया। जवानों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंतिम सलामी दी। इस दौरान मौजूद लोगों ने अंकित पांडेय के सेवाकाल और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को याद किया।
अंतिम यात्रा के दौरान गांव की गलियों में बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी अंकित को अंतिम विदाई देने पहुंचे। रास्ते में लोग पार्थिव शरीर पर फूल बरसाते दिखाई दिए।
परिजनों ने बताया कि अंकित ने अपनी मेहनत के बल पर CISF में जगह बनाई थी। वर्ष 2016 में दारोगा के रूप में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपने करियर में लगातार आगे बढ़ने का प्रयास किया। करीब आठ वर्ष की सेवा के बाद वे सहायक कमांडेंट के पद तक पहुंचे थे।
दो वर्ष पहले सहायक कमांडेंट बनने के बाद परिवार को उन पर गर्व था। गांव के युवाओं के लिए भी वह प्रेरणा का स्रोत थे। परिवार को उम्मीद थी कि वे सेवा में और आगे बढ़ेंगे, लेकिन कठुआ की घटना ने सभी उम्मीदों को अचानक तोड़ दिया।
जल विद्युत परियोजना जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा CISF की जिम्मेदारियों में शामिल होती है। अंकित पांडेय भी इसी जिम्मेदारी के तहत कठुआ में तैनात थे। मंगलवार को हुई फायरिंग की घटना में वह गोली की चपेट में आ गए।
उनकी मौत के बाद CISF के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी परिवार के प्रति संवेदना जताई। पार्थिव शरीर को आवश्यक प्रक्रिया के बाद पैतृक गांव भेजा गया, जहां गुरुवार को अंतिम संस्कार की तैयारियां की गईं।
अंकित के गांव पहुंचने की जानकारी आसपास के क्षेत्रों में भी फैल गई थी। इसके चलते आसपास के गांवों से भी लोग मठिया पहुंचे। अंतिम दर्शन के लिए घर के बाहर लोगों की लंबी भीड़ देखी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि अंकित का व्यवहार सरल था और वह गांव आने पर सभी से मिलते थे। नौकरी में व्यस्तता के बावजूद वह अपने परिवार और गांव से जुड़े रहे। उनकी मौत से गांव ने अपना एक होनहार बेटा खो दिया है।
अंतिम यात्रा के दौरान सुरक्षा बल के जवान भी मौजूद रहे। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई देने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान गांव में मौजूद हर व्यक्ति भावुक नजर आया।
अंकित पांडेय की सेवा यात्रा दारोगा से शुरू होकर सहायक कमांडेंट तक पहुंची थी। कम समय में पदोन्नति हासिल करना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। कठुआ में उनकी तैनाती महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारी के तहत की गई थी।
परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है। मंगलवार शाम तक ड्यूटी पर तैनात अंकित की अचानक मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। गुरुवार को जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो परिजन उन्हें देखकर फफक पड़े।
गांव के लोगों ने अंकित पांडेय को याद करते हुए कहा कि उनकी सेवा और समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा। युवाओं ने उन्हें प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उन्होंने मेहनत से गांव का नाम रोशन किया था।
फिलहाल कठुआ में हुई फायरिंग की घटना को लेकर संबंधित स्तर पर जांच की प्रक्रिया जारी है। वहीं इब्राहिमपुर के मठिया में गुरुवार का दिन शोक और गर्व दोनों भावनाओं के बीच गुजरा। एक ओर परिवार ने अपना बेटा खोया, तो दूसरी ओर गांव ने देश की सुरक्षा में सेवा देने वाले अपने अधिकारी को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।





