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नाम की मामूली गड़बड़ी से नहीं अटकेगा आयुष्मान कार्ड, जिला स्तर पर होगा मामलों का निस्तारण

बलिया। आधार कार्ड, राशन कार्ड और परिवार पहचान से जुड़े दस्तावेजों में नाम की मामूली भिन्नता अब पात्र लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने में बड़ी बाधा नहीं बनेगी। ऐसे मामलों में जहां नाम, उपनाम या वर्तनी में छोटे अंतर के कारण लाभार्थियों का सत्यापन अटक रहा है, वहां जिला स्तर पर समाधान की व्यवस्था करने की तैयारी की जा रही है।
अब तक कई लाभार्थियों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा था कि आधार कार्ड में नाम कुछ और तरीके से दर्ज है, जबकि राशन कार्ड या परिवार पहचान से जुड़े दस्तावेजों में वर्तनी अलग है। कहीं उपनाम जुड़ा हुआ है तो कहीं नहीं, जबकि कई मामलों में हिंदी और अंग्रेजी में नाम की स्पेलिंग अलग होने के कारण सिस्टम सत्यापन नहीं कर पाता था। इसका असर सीधे आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया पर पड़ता था।
नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे पात्र लाभार्थियों को राहत देना है जो केवल दस्तावेजों में नाम के छोटे अंतर की वजह से योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे। प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों को जिला स्तर पर भेजा जाएगा, जहां संबंधित अधिकारी दस्तावेजों का मिलान कर पात्रता की पुष्टि करेंगे।
जिला स्तर पर निस्तारण की व्यवस्था लागू होने से लाभार्थियों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। अभी कई लोगों को आधार में संशोधन, राशन कार्ड में नाम सुधार या परिवार पहचान दस्तावेज अपडेट कराने के लिए अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें समय भी लगता है और कई बार कार्ड बनने में महीनों की देरी हो जाती है।
प्रशासनिक स्तर पर माना जा रहा है कि यदि लाभार्थी की पहचान बाकी विवरणों से स्पष्ट हो जाती है तो केवल नाम की मामूली वर्तनी भिन्नता के कारण आयुष्मान कार्ड नहीं रोका जाना चाहिए। इसके लिए दस्तावेजों में उपलब्ध अन्य जानकारियों जैसे उम्र, पता, परिवार के सदस्यों के विवरण और पहचान संख्या का भी मिलान किया जा सकता है।
आयुष्मान कार्ड बनाने के दौरान डिजिटल सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें पात्र लाभार्थी का नाम संबंधित डेटाबेस से मिलाया जाता है। कई बार तकनीकी सिस्टम नाम की मामूली स्पेलिंग अंतर को भी अलग रिकॉर्ड मान लेता है। इसी वजह से पात्र व्यक्ति का आवेदन लंबित हो जाता है।
नई प्रक्रिया में जिला स्तर पर ऐसे मामलों की जांच मानवीय स्तर पर की जा सकेगी। यदि अधिकारी यह पुष्टि कर देते हैं कि अलग-अलग दस्तावेजों में दर्ज नाम एक ही व्यक्ति से संबंधित हैं तो आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
यह बदलाव विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और उन परिवारों के लिए राहत भरा हो सकता है जहां पुराने रिकॉर्ड में नाम की वर्तनी अलग-अलग तरीके से दर्ज है। कई जगह स्थानीय भाषा में नाम दर्ज होने और बाद में अंग्रेजी में ट्रांसलिटरेशन के कारण भी स्पेलिंग बदल जाती है।
कई मामलों में महिलाओं के नाम विवाह के बाद बदल जाते हैं। कहीं पति का उपनाम जुड़ जाता है तो कहीं पुराने दस्तावेज में पिता का उपनाम रहता है। ऐसी स्थिति में भी डिजिटल सत्यापन में समस्या आती है। नई व्यवस्था ऐसे मामलों को भी सरल बनाने में मदद कर सकती है।
योजना के तहत जिला अधिकारियों को अधिकार मिलने से निर्णय स्थानीय स्तर पर तेजी से लिए जा सकेंगे। हर मामले को उच्च स्तर पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे लंबित आवेदनों की संख्या कम होने और पात्र लोगों के कार्ड जल्दी बनने की उम्मीद है।
आयुष्मान कार्ड स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। पात्र परिवारों को इसके माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। ऐसे में केवल नाम की मामूली त्रुटि के कारण कार्ड न बन पाना लाभार्थियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है।
प्रशासन की कोशिश है कि तकनीकी कारणों से किसी पात्र व्यक्ति को योजना से वंचित न होना पड़े। इसी दिशा में दस्तावेजों के नाम मिलान से जुड़े नियमों को व्यावहारिक बनाने पर काम किया जा रहा है।
हालांकि यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि सुविधा का मतलब यह नहीं होगा कि बिना दस्तावेजी पुष्टि के कार्ड जारी कर दिया जाए। संबंधित अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदक वही व्यक्ति है जिसका नाम पात्रता सूची में दर्ज है।
जिला स्तर पर सत्यापन के लिए अलग प्रक्रिया, जिम्मेदार अधिकारी और आवश्यक दस्तावेजों की सूची तय की जा सकती है। लाभार्थियों को संभवतः आधार, राशन कार्ड और परिवार पहचान से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
यदि किसी मामले में नाम की भिन्नता मामूली है और अन्य सभी विवरण मेल खाते हैं तो ऐसे आवेदन को मंजूरी दी जा सकेगी। लेकिन यदि पहचान को लेकर बड़ा अंतर या संदेह हो तो अतिरिक्त जांच की जा सकती है।
इस व्यवस्था से आयुष्मान कार्ड केंद्रों पर भी दबाव कम हो सकता है। अभी ऑपरेटर कई मामलों में तकनीकी त्रुटि के कारण आवेदन आगे नहीं बढ़ा पाते और लाभार्थियों को दस्तावेज सुधारने के लिए वापस भेजना पड़ता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों को जिला स्तर पर संदर्भित किया जा सकेगा। इससे आवेदन अस्वीकार होने के बजाय जांच के लिए आगे बढ़ेगा।
सरकार का उद्देश्य आयुष्मान योजना के पात्र परिवारों को समय पर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसी कारण सत्यापन प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
नाम और उपनाम की मामूली भिन्नता भारत में आम समस्या है। अलग-अलग दस्तावेज अलग समय पर बने होने के कारण स्पेलिंग, क्रम और उपनाम में अंतर आ जाता है। डिजिटल योजनाओं में यही अंतर तकनीकी अड़चन पैदा करता है।
प्रस्तावित बदलाव से ऐसे हजारों लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके आवेदन केवल नाम की वर्तनी या उपनाम के कारण लंबित हैं।
फिलहाल जिला स्तर पर मामलों के निस्तारण की व्यवस्था तैयार की जा रही है। विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन प्रकार की नाम भिन्नताओं को मामूली माना जाएगा और किन मामलों में अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत होगी।
नई प्रक्रिया लागू होने के बाद पात्र लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाना आसान हो सकता है और केवल दस्तावेजी वर्तनी की गलती के कारण स्वास्थ्य योजना का लाभ रुकने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।





