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मेरठ: बहराला गांव में एक पिता की सूझबूझ और समय पर उठाए गए कदम ने उसके बेटे की जान बचा ली। ट्रैक्टर पलटने के बाद गंभीर रूप से घायल हुए किसान सचिन को जब कई मिनट तक ऑक्सीजन नहीं मिल पाई, तब उनके पिता युधवीर सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और तुरंत सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देकर बेटे की सांसें वापस लाने की कोशिश की। समय पर मिले इस प्राथमिक उपचार और अस्पताल में मिले अत्याधुनिक इलाज के चलते सचिन अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटने की स्थिति में हैं।
जानकारी के अनुसार, मेरठ के बहराला गांव निवासी 36 वर्षीय किसान सचिन खेत के काम के दौरान ट्रैक्टर हादसे का शिकार हो गए थे। अचानक ट्रैक्टर पलट गया और सचिन उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद वह काफी देर तक उसी स्थिति में फंसे रहे। इस दौरान उनके मस्तिष्क तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच सकी, जिससे उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद पिता युधवीर सिंह ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत बेटे को बचाने के प्रयास शुरू किए। उन्होंने बिना समय गंवाए सचिन को सीपीआर देना शुरू किया। सीपीआर एक ऐसी आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसमें बेहोश व्यक्ति की सांस और रक्त संचार को बनाए रखने की कोशिश की जाती है। पिता के इस तत्काल प्रयास से सचिन की हालत को संभालने में मदद मिली और उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया गया।
इसके बाद सचिन को गंभीर हालत में वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद पाया कि लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी के कारण उनके मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ा था। वह बेहोशी की हालत में थे और उन्हें दौरे भी पड़ रहे थे।
अस्पताल के डॉक्टर डॉ. ऋषिकेश चक्रवर्ती ने बताया कि सचिन को बेहद नाजुक स्थिति में अस्पताल लाया गया था। उनके मस्तिष्क को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाई थी, जिसके कारण उनकी हालत काफी चिंताजनक थी। लेकिन एडवांस्ड न्यूरो-क्रिटिकल केयर, लगातार निगरानी और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के कारण उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आया।
डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक तकनीकों और विशेष उपचार के माध्यम से सचिन का इलाज किया। कई दिनों तक चले उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होने लगा। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपात स्थिति में सही समय पर लिया गया फैसला किसी की जिंदगी बचा सकता है। अगर सचिन के पिता ने तुरंत सीपीआर नहीं दिया होता तो उनकी स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती थी। चिकित्सा विशेषज्ञ भी लोगों को सलाह देते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सीपीआर जैसी प्राथमिक जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि दुर्घटना या अचानक स्वास्थ्य संकट के समय किसी की जान बचाई जा सके।
युधवीर सिंह के साहस और समझदारी की हर तरफ सराहना हो रही है। एक पिता ने मुश्किल घड़ी में धैर्य और हिम्मत दिखाकर अपने बेटे को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। वहीं, अस्पताल की विशेषज्ञ टीम के प्रयासों से सचिन को नया जीवन मिल सका। यह घटना लोगों के लिए प्रेरणा है कि आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी होता है।





