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उत्तर प्रदेश
फर्जी कस्टमर सपोर्ट ने भेजी APK फाइल छात्र के खाते से उड़ाए 10 लाख रुपये
Ratna Netam
15 Aug 2026 2:15 PM IST

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मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। डॉक्टर से इलाज के लिए समय लेने की कोशिश कर रहे 17 वर्षीय छात्र को साइबर अपराधियों ने अपना शिकार बना लिया। ठगों ने अस्पताल का कर्मचारी बनकर किशोर के मोबाइल पर एक एपीके फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करवाकर बैंक खाते से 10 लाख 27 हजार 86 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। किशोर के चाचा की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटना कटघर थाना क्षेत्र के बरवारा मझरा गांव की है। गांव निवासी नाजिम खान ने साइबर क्राइम थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका 17 वर्षीय भतीजा 12वीं कक्षा का छात्र है। कुछ समय पहले किशोर की मां ने अपना एक प्लॉट बेचा था। प्लॉट की बिक्री से मिली रकम छात्र के बैंक खाते में जमा कराई गई थी। इसी रकम पर साइबर ठगों की नजर पड़ गई और उन्होंने सुनियोजित तरीके से खाते से पूरी राशि निकाल ली।
नाजिम खान के अनुसार बीते 11 जुलाई को उनके भतीजे को दांतों का इलाज करवाने के लिए एक डॉक्टर से समय लेना था। किशोर ने संबंधित डॉक्टर का मोबाइल नंबर खोजने के लिए गूगल का सहारा लिया। सर्च के दौरान मिले एक नंबर पर उसने कॉल किया। कॉल उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर के अस्पताल का कर्मचारी बताया। उसने किशोर से कहा कि डॉक्टर से मिलने का नंबर लगाने के लिए पहले एक ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।
इसके बाद कथित अस्पताल कर्मचारी ने किशोर के व्हाट्सऐप नंबर पर कस्टमर सपोर्ट नाम से एक एपीके फाइल भेजी। उसने छात्र को भरोसा दिलाया कि यह अस्पताल का आधिकारिक एप है और इसके माध्यम से ही अपॉइंटमेंट बुक किया जाएगा। ठग की बातों पर विश्वास करते हुए किशोर ने एपीके फाइल अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर ली।
फाइल इंस्टॉल होने के बाद आरोपी ने किशोर से उसमें मौजूद फॉर्म खुलवाया और नाम तथा मोबाइल नंबर सहित दूसरी जानकारी भरवा ली। इसी दौरान छात्र के मोबाइल पर एक ओटीपी आया। आरोपी ने कहा कि डॉक्टर के पास नंबर लगाने और अपॉइंटमेंट की पुष्टि के लिए ओटीपी बताना जरूरी है। किशोर ने बिना किसी संदेह के ओटीपी साझा कर दिया।
आरोप है कि एपीके फाइल इंस्टॉल होते ही साइबर ठगों को छात्र के मोबाइल की जरूरी अनुमतियां और बैंक खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मिल गई। इसके बाद उसके खाते से 10 लाख 27 हजार 86 रुपये किसी अन्य बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। रकम कटने की जानकारी मिलने पर किशोर और उसके परिजनों के होश उड़ गए।
परिवार ने तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर घटना की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद किशोर के चाचा नाजिम खान ने साइबर क्राइम थाने में लिखित तहरीर दी। एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार के अनुसार शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ साइबर ठगी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन से जुड़े विवरणों की जांच कर आरोपियों का पता लगाने में जुटी है।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि गूगल पर मिले किसी भी मोबाइल नंबर को आधिकारिक मानकर भरोसा नहीं करना चाहिए। अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड करने और बैंकिंग ओटीपी साझा करने से बचना चाहिए। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करने या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने से रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
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