उत्तर प्रदेश

ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहे Dr. Shakti Prakash Pathak

Gulabi Jagat
22 Jan 2025 4:43 PM IST
ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहे Dr. Shakti Prakash Pathak
x
Kushinagar राजापाकड़/कुशीनगर: कुशीनगर जिले की तमकुहीराज तहसील के गुरवलिया बाजार स्थित श्री अन्नपूर्णा इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. शक्ति प्रकाश पाठक अपने पिता द्वारा शुरू की गई शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े इस क्षेत्र में शिक्षा की ज्योति प्रज्वलित कर रहे हैं। वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने अपने शिक्षण कार्य को विराम नहीं दिया।
डॉ. पाठक प्रतिदिन विद्यालय जाते हैं और इंटरमीडिएट की कक्षाओं में दो घंटे समाजशास्त्र पढ़ाते हैं, वह भी बिना किसी शुल्क के। उनके इस प्रयास से न केवल छात्र लाभान्वित हो रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
39 वर्षों की सेवा का स्वर्णिम इतिहास
डॉ. शक्ति प्रकाश पाठक ने वर्ष 1982 में श्री अन्नपूर्णा इंटरमीडिएट कॉलेज में प्रवक्ता के रूप में अपने शिक्षण कार्य की शुरुआत की। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने 2003 में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का पद संभाला। इसी वर्ष उन्होंने मिथिला विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2012 में माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड द्वारा प्रधानाचार्य के रूप में उनकी नियुक्ति हुई।
छात्र संख्या में जबरदस्त वृद्धि
कार्यभार ग्रहण करते समय जहां विद्यालय में छात्र संख्या मात्र 400 के आसपास थी, वहीं उनके प्रयासों से यह संख्या बढ़कर 2000 तक पहुंच गई। उन्होंने तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े पाठ्यक्रमों की स्वीकृति दिलाई, जिससे क्षेत्र के बच्चों को रोजगारपरक शिक्षा का लाभ मिलने लगा और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ा।
सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी है शिक्षादान
डॉ. पाठक ने 39 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देने के बाद भी बच्चों को पढ़ाना बंद नहीं किया। सेवानिवृत्त होने के बावजूद वह प्रतिदिन लगभग 80 बच्चों को समाजशास्त्र पढ़ाने के लिए समय पर विद्यालय पहुंचते हैं। उनका कहना है, "निश्शुल्क शिक्षा देना मेरा उद्देश्य है और मैं इसे जीवनभर करता रहूंगा।"
पिता के आदर्शों पर चलने वाले शिक्षक
डॉ. पाठक के पिता, वागीश्वरी पाठक, एक प्रख्यात ज्योतिषविद् और समाजसेवी थे। उन्होंने इस पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की नींव रखी थी। डॉ. पाठक अपने पिता के आदर्शों का पालन करते हुए शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान
डॉ. पाठक के योगदान को देखते हुए उन्हें 5 सितंबर 2016 को शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
शैक्षणिक यात्रा और उपलब्धियां
डॉ. पाठक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा श्री अन्नपूर्णा इंटरमीडिएट कॉलेज से ही प्राप्त की। 1970 में हाईस्कूल और 1972 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1976 में उन्होंने बिहार के मुजफ्फरपुर से जीव विज्ञान विषय में स्नातक और 1978 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की।
क्षेत्र के बच्चों के लिए प्रेरणा
डॉ. शक्ति प्रकाश पाठक का जीवन और कार्य केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं। वह शिक्षा के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का सपना देख रहे हैं और इसे साकार करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं।
Next Story