उत्तर प्रदेश

शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव ने रचा इतिहास राम मंदिर ट्रस्ट में मिली जगह

Ratna Netam
2 Sept 2026 7:28 PM IST
शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव ने रचा इतिहास राम मंदिर ट्रस्ट में मिली जगह
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहली बार किसी महिला को ट्रस्टी के रूप में जगह मिली है। उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद की वरिष्ठ शिक्षाविद् **डॉ. निर्मला यादव** को ट्रस्ट का नया सदस्य बनाया गया है। 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में हुई महत्वपूर्ण बैठक में उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और महेश भागचंदका को भी ट्रस्ट में शामिल करने का फैसला लिया गया। डॉ. निर्मला यादव की नियुक्ति इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद वह इसकी पहली महिला ट्रस्टी हैं।
अयोध्या स्थित मणिराम दास छावनी में हुई बैठक में ट्रस्ट के खाली पदों को भरने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। इसी दिन सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी चुना गया।
कौन हैं डॉ. निर्मला यादव?
डॉ. निर्मला यादव उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के **शिकोहाबाद** से आती हैं। उनकी पहचान मुख्य रूप से एक शिक्षाविद् और कुशल प्रशासक के रूप में रही है। वह लंबे समय तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहीं और कई वर्षों तक कॉलेज प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाली।
रिपोर्टों के मुताबिक निर्मला यादव मूल रूप से एटा की रहने वाली थीं और विवाह के बाद शिकोहाबाद आईं। उनका परिवार कई दशकों से शिक्षा और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। परिवार का संबंध फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज तहसील के उरावर गांव से भी बताया गया है।
उनकी उम्र करीब 66 वर्ष बताई गई है। उच्च शिक्षा और संस्थागत प्रशासन में लंबे अनुभव के बाद अब उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट जैसी महत्वपूर्ण संस्था में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
हिंदी और संस्कृत में किया MA
डॉ. निर्मला यादव की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। उन्होंने **हिंदी और संस्कृत में परास्नातक यानी MA** की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने पीएचडी की उपाधि भी हासिल की।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अध्यापन और उच्च शिक्षा प्रशासन को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। धीरे-धीरे वह प्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचीं और कई वर्षों तक कॉलेजों का नेतृत्व किया।
यही लंबा शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव अब राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी नई भूमिका में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब दो दशक तक संभाली प्राचार्य की जिम्मेदारी
डॉ. निर्मला यादव ने करीब **19 वर्षों तक प्राचार्य** के रूप में काम किया। रिपोर्ट के अनुसार वह 13 अगस्त 1999 से जनवरी 2006 तक शिकोहाबाद के **BDM Girls PG College** की प्राचार्य रहीं। इसके बाद उन्होंने फिरोजाबाद के महात्मा गांधी विद्यालय पीजी कॉलेज में प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाली और 2022 में सेवानिवृत्त हुईं।
उनके साथ काम कर चुके लोगों ने उन्हें एक कुशल प्रशासक के रूप में याद किया है। महात्मा गांधी विद्यालय की मौजूदा प्राचार्य प्रियदर्शिनी उपाध्याय ने उनके संस्थागत प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों को संभालने की क्षमता की सराहना की।
कॉलेज प्रबंधन में इतने लंबे अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि ट्रस्ट को भी उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिलेगा।
विश्वविद्यालय की कार्य परिषद से भी जुड़ी रहीं
डॉ. निर्मला यादव का अनुभव केवल कॉलेज प्राचार्य के पद तक सीमित नहीं रहा। वह करीब **15 वर्षों तक विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य** भी रही हैं।
विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में काम करने से उन्हें उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रशासन, नीतिगत फैसलों और प्रबंधन से जुड़े मामलों का व्यापक अनुभव मिला।
राम मंदिर परिसर के विस्तार, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को देखते हुए ऐसे अनुभव वाले लोगों को ट्रस्ट में शामिल करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राम मंदिर अभियान से भी रहा जुड़ाव
डॉ. निर्मला यादव का राम मंदिर से जुड़ाव केवल उनकी नई नियुक्ति के बाद शुरू नहीं हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार वह विश्व हिंदू परिषद के **निधि समर्पण अभियान** से भी जुड़ी रही हैं।
राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए गए इस अभियान के दौरान देशभर में लोगों से सहयोग और समर्पण राशि जुटाई गई थी। निर्मला यादव की इस अभियान में भागीदारी को भी राम मंदिर से उनके पुराने जुड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है।
RSS से जुड़े रहे पति हरेंद्र यादव
डॉ. निर्मला यादव के दिवंगत पति **हरेंद्र यादव** पेशे से अधिवक्ता थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने RSS के जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली थी।
उनके ससुर स्क्वाड्रन लीडर **सूर्य कुमार यादव** भारतीय वायुसेना में रहे और बाद में जनसंघ से जुड़े। यानी निर्मला यादव जिस परिवार से आती हैं, उसका शिक्षा के साथ सार्वजनिक और सामाजिक जीवन से भी लंबा संबंध रहा है।
उनके परिवार की शिक्षा के क्षेत्र में मौजूदगी करीब एक सदी पुरानी बताई जाती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक परिवार के सदस्य सचिन यादव ने बताया कि उनके परदादा चौधरी श्याम सिंह यादव ने 1916 में शिकोहाबाद में कन्हाई कॉलेज की स्थापना की थी।
पहली महिला ट्रस्टी बनने का क्या है महत्व?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और उससे संबंधित व्यवस्थाओं के संचालन के लिए किया गया था। इसके गठन के बाद से अब तक किसी महिला को ट्रस्टी के रूप में जगह नहीं मिली थी।
डॉ. निर्मला यादव की नियुक्ति के साथ यह स्थिति बदल गई है। वह आधिकारिक रूप से ट्रस्ट की **पहली महिला सदस्य** बन गई हैं।
उनकी नियुक्ति को महिला प्रतिनिधित्व की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु पहुंचती हैं और अब ट्रस्ट के निर्णय लेने वाले निकाय में भी पहली बार महिला प्रतिनिधित्व आया है।
हालांकि ट्रस्ट में उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों का पूरा दायरा आगे प्रशासनिक कार्य-विभाजन के साथ अधिक स्पष्ट होगा।
तीन नए सदस्यों को मिली जगह
निर्मला यादव के अलावा ट्रस्ट में दो अन्य नए सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के **महेश भागचंदका** और अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता **मदन मोहन पांडेय** शामिल हैं।
मदन मोहन पांडेय का राम जन्मभूमि मामले से लंबा कानूनी संबंध रहा है। उन्होंने 1990 से 2019 तक रामलला विराजमान और महंत रामचंद्र परमहंस दास की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े मामलों में पैरवी की थी। वह छह वर्षों तक उत्तर प्रदेश के अपर महाधिवक्ता भी रहे।
महेश भागचंदका दिवंगत VHP नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं और अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं। वह राम मंदिर के भूमि पूजन और प्राण प्रतिष्ठा के धार्मिक अनुष्ठानों में भी यजमान के रूप में शामिल रहे थे।
इस तरह नए सदस्यों में शिक्षा, कानून और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्रतिनिधित्व मिला है।
राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव
तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति उसी दिन हुई है जब ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर एक और बड़ा फैसला लिया। सेवानिवृत्त एयर मार्शल **जीतेंद्र मिश्रा** को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO चुना गया है।
CEO पद के लिए गठित चयन समिति ने **5,585 आवेदनों** की समीक्षा की थी। इसके बाद तीन उम्मीदवारों को अंतिम सूची में रखा गया और उनमें से जीतेंद्र मिश्रा का चयन किया गया।
नई नियुक्तियों को ट्रस्ट के प्रशासन, संचालन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा से राम मंदिर ट्रस्ट तक का सफर
डॉ. निर्मला यादव का सफर शिक्षा जगत से शुरू होकर अब देश के सबसे चर्चित धार्मिक ट्रस्टों में से एक तक पहुंचा है। हिंदी और संस्कृत में उच्च शिक्षा, पीएचडी, करीब दो दशक तक प्राचार्य की जिम्मेदारी और विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में लंबा अनुभव उनकी पहचान का प्रमुख हिस्सा रहा है।
इसके साथ ही उनका परिवार शिक्षा, सार्वजनिक जीवन और सामाजिक संगठनों से जुड़ा रहा है। राम मंदिर निधि समर्पण अभियान में उनकी भागीदारी ने भी उन्हें मंदिर निर्माण अभियान से जोड़ा।
अब पहली महिला ट्रस्टी के रूप में उनके सामने एक नई जिम्मेदारी है। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर परिसर की प्रशासनिक जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में ट्रस्ट की नई टीम से मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने की उम्मीद की जा रही है।
डॉ. निर्मला यादव की नियुक्ति इस बदलाव में खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महिला प्रतिनिधित्व का नया अध्याय शुरू किया है। लंबे शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव के बाद अब उनकी भूमिका राम मंदिर ट्रस्ट के फैसलों और भविष्य की व्यवस्थाओं में दिखाई देगी।
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