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उत्तर प्रदेश
परिवहन विभाग में बड़ा एक्शन 2 ARTO पर गिरी गाज आरटीओ से मांगा स्पष्टीकरण
Ratna Netam
2 Sept 2026 6:37 PM IST

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के कानपुर में परिवहन विभाग से जुड़ी शिकायतों पर योगी सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह के निर्देश पर कानपुर नगर के दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों यानी ARTO को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, कानपुर नगर के RTO प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों पर कार्यालय की निगरानी में लापरवाही, अधीनस्थ कर्मचारियों पर कमजोर नियंत्रण और शासनादेशों की अनदेखी समेत कई गंभीर आरोप प्रथम दृष्टया सामने आए हैं।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब कानपुर के RTO कार्यालय में जिला प्रशासन की टीम ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद मिले, जिनकी भूमिका संदिग्ध बताई गई। पूछताछ और जांच के बाद प्रशासन ने अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा आवेदकों से पैसे लेने और परिवहन विभाग से जुड़े काम कराने के आरोपों को गंभीरता से लिया।
औचक निरीक्षण में सामने आया मामला
मिली शिकायतों के आधार पर कानपुर के जिलाधिकारी ने अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के साथ RTO कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने कार्यालय में मौजूद करीब 50 लोगों से पूछताछ की। इस दौरान 11 लोगों को संदिग्ध पाया गया।
आरोप है कि ये लोग वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जैसे काम कराने के नाम पर आवेदकों से पैसे वसूल रहे थे। जांच के दौरान इन लोगों के पास से **43,485 रुपये नकद** बरामद किए गए। प्रशासन की कार्रवाई के बाद मामले में परिवहन कार्यालय के दो क्लर्कों की संलिप्तता भी सामने आई।
प्रशासन ने इस मामले में कुल 15 लोगों के खिलाफ कानपुर के काकादेव थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इससे साफ है कि मामला केवल विभागीय लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अनधिकृत लोगों की कथित गतिविधियों को लेकर पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया।
दो ARTO पर हुई कार्रवाई
शासन की कार्रवाई के तहत कानपुर नगर के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन तृतीय दल **सोमलता यादव** और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन **आलोक कुमार** को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध रखा जाएगा। नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। इस मामले की विभागीय जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त वाराणसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
अधिकारियों के खिलाफ मुख्य आरोप यह है कि उनके अधीनस्थ कार्यालय में अनधिकृत व्यक्तियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं था। इसके अलावा कार्यालय की निगरानी में कमी और शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं करने को भी गंभीरता से लिया गया है।
RTO को 15 दिन में देना होगा जवाब
दो ARTO के निलंबन के साथ ही कानपुर नगर के संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन **राकेन्द्र सिंह** को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। हालांकि उन्हें फिलहाल निलंबित नहीं किया गया है, लेकिन शासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
RTO से **15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण** उपलब्ध कराने को कहा गया है। उनके जवाब और विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
इस कार्रवाई से परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी संदेश गया है कि कार्यालय में अनधिकृत लोगों की गतिविधियों या आवेदकों से कथित अवैध वसूली जैसी शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
26,750 रुपये लेने का भी आरोप
मामले में एक ट्रक चालक की शिकायत ने भी जांच को गंभीर बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक, वाहन संख्या **UP 91 AT 4251** के चालक ने आरोप लगाया कि RTO कार्यालय के एक कर्मचारी ने उससे **26,750 रुपये** लिए थे, लेकिन उसे केवल **21,750 रुपये की जमा पर्ची** दी गई।
जांच के दौरान उपलब्ध नकदी के मिलान में भी कथित अनियमितता सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद जिलाधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजी गई।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिवहन कार्यालय में आम लोगों का रोजाना बड़ी संख्या में आना-जाना होता है। ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, फिटनेस, परमिट और दूसरे परिवहन संबंधी कार्यों के लिए लोग विभागीय कार्यालयों पर निर्भर रहते हैं।
अनधिकृत लोगों को लेकर मंत्री ने जताई नाराजगी
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि विभागीय कार्यालयों में अनधिकृत व्यक्तियों से काम न लेने के संबंध में शासन और मुख्यालय स्तर से समय-समय पर स्पष्ट निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद कानपुर के संभागीय और सहायक परिवहन कार्यालय में अनधिकृत लोगों के काम करने और अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ उनकी कथित मिलीभगत का मामला सामने आया।
मंत्री के मुताबिक, इन लोगों के साथ पैसे के अवैध लेन-देन और कामों के अनियमित तरीके से निस्तारण की शिकायतें सामने आईं। उन्होंने इसे अधिकारियों की शिथिलता का उदाहरण बताया।
दयाशंकर सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवहन विभाग में किसी भी स्तर पर काम में लापरवाही या लोगों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है।
आम लोगों के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई?
RTO कार्यालय आम नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण सरकारी केंद्र हैं। किसी व्यक्ति को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो, वाहन का रजिस्ट्रेशन कराना हो, परमिट लेना हो या वाहन से जुड़ी दूसरी औपचारिकताएं पूरी करनी हों, उसे परिवहन विभाग की सेवाओं की जरूरत पड़ती है।
ऐसे में अगर अनधिकृत लोग कार्यालय में सक्रिय रहते हैं और आवेदकों को सरकारी प्रक्रिया के नाम पर अपने प्रभाव में लेकर पैसे वसूलते हैं, तो इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। आम लोगों को कई बार यह समझना भी मुश्किल हो जाता है कि कौन सरकारी कर्मचारी है और कौन बाहरी व्यक्ति।
इसी वजह से प्रशासन की ओर से कार्यालय में अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
अब जांच में सामने आएगा पूरा सच
दो ARTO के निलंबन और RTO को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अब विभागीय जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच अधिकारी पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल करेंगे।
यह भी देखा जाएगा कि कार्यालय में अनधिकृत लोगों की गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं, उन्हें वहां काम करने की अनुमति कैसे मिली और अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं। साथ ही कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
अगर जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी विभागीय या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
सरकार का सख्त संदेश
कानपुर RTO मामले में हुई कार्रवाई को परिवहन विभाग में जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है। दो अधिकारियों का निलंबन और RTO से स्पष्टीकरण मांगना यह संकेत देता है कि सरकार विभागीय कार्यालयों में कामकाज की निगरानी को लेकर गंभीर है।
इस पूरे मामले में फिलहाल विभागीय जांच जारी है। इसलिए जिन अधिकारियों या कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं, उनकी अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के बाद ही तय होगी। अभी सामने आई कार्रवाई **प्रथम दृष्टया आरोपों और प्रशासनिक जांच** के आधार पर की गई है।
कुल मिलाकर, कानपुर के RTO कार्यालय में हुई इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के कामकाज और अनधिकृत लोगों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सबकी नजर विभागीय जांच की रिपोर्ट पर रहेगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कार्यालय में कथित अनियमितताएं कैसे चल रही थीं और इसमें किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।
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