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कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे डॉ. आशुतोष ने सुनाई नेपाल त्रासदी की दास्तान

लखनऊ। कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर नेपाल के रास्ते लखनऊ लौटे डॉ. आशुतोष गुप्ता आज भी उस भयावह मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। इंदिरानगर की अटल कॉलोनी निवासी डॉ. आशुतोष ने बताया कि यात्रा के दौरान जिस रास्ते से वह कुछ घंटे पहले गुजरे थे, वहीं बाद में भीषण तबाही का दृश्य सामने आया। उस समय उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद वही रास्ता आपदा की चपेट में आ जाएगा।
डॉ. आशुतोष ने कैलाश पर्वत की परिक्रमा और पवित्र मानसरोवर के दर्शन के बाद नेपाल के रास्ते वापसी की पूरी घटना साझा की। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान प्रकृति के अद्भुत नजारे देखने को मिले, लेकिन वापसी के समय नेपाल में आई आपदा ने पूरी यात्रा की यादों को भय और चिंता से भर दिया।
चीन के गैरोंग पोर्ट से नेपाल में किया प्रवेश
डॉ. आशुतोष ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद उनका दल चीन के गैरोंग पोर्ट पहुंचा।
वहां इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी लोग नेपाल की सीमा में प्रवेश कर रसुवा पहुंचे। यात्रा काफी कठिन और थकाने वाली थी, इसलिए सभी यात्री शारीरिक रूप से थक चुके थे।
उन्होंने बताया कि कई दिनों की यात्रा के बाद कुछ समय आराम करने की जरूरत महसूस हो रही थी।
थकान के बाद आगे की यात्रा की बनाई योजना
रसुवा पहुंचने के बाद दल के सदस्यों ने कुछ समय विश्राम किया। इसके बाद सभी ने आगे की यात्रा को लेकर चर्चा की।
डॉ. आशुतोष के अनुसार, दोपहर में भोजन करने के बाद योजना बनाई गई कि काठमांडू पहुंचकर निर्धारित उड़ान पकड़ी जाएगी और एयरपोर्ट पर ही आराम किया जाएगा।
उस समय किसी को भी अंदाजा नहीं था कि जिस मार्ग से वे गुजर चुके हैं, वहां जल्द ही हालात इतने खराब हो जाएंगे।
कुछ घंटे बाद सामने आया भयावह मंजर
डॉ. आशुतोष ने बताया कि यात्रा के दौरान रास्ता सामान्य दिखाई दे रहा था।
उन्होंने कहा कि कुछ घंटे पहले तक जिस रास्ते पर लोगों की आवाजाही थी, बाद में वहीं बाढ़ और प्राकृतिक आपदा का असर देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि अगर यात्रा का समय थोड़ा आगे-पीछे होता तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी।
यह सोचकर आज भी मन कांप जाता है कि वे लोग कितने बड़े खतरे से बचकर निकल आए।
यात्रियों में फैल गई थी चिंता
नेपाल में अचानक आई आपदा की खबर मिलने के बाद यात्रा दल के लोगों में चिंता का माहौल बन गया।
कई लोगों ने अपने परिजनों से संपर्क किया और अपनी सुरक्षित स्थिति की जानकारी दी।
डॉ. आशुतोष ने बताया कि परिवार वालों के फोन आने लगे और सभी लोग उनकी कुशलता जानने के लिए परेशान थे।
सुरक्षित लौटने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
यात्रा की यादों में जुड़ गया आपदा का अनुभव
कैलाश मानसरोवर यात्रा को श्रद्धालु आध्यात्मिक और जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव मानते हैं।
डॉ. आशुतोष के लिए भी यह यात्रा बेहद खास थी, लेकिन नेपाल की प्राकृतिक आपदा ने इस अनुभव में डर और चिंता की एक नई कहानी जोड़ दी।
उन्होंने बताया कि एक तरफ कैलाश और मानसरोवर के दर्शन की आध्यात्मिक अनुभूति थी, वहीं दूसरी ओर वापसी के दौरान सामने आई आपदा ने प्रकृति की ताकत का एहसास कराया।
प्रकृति के सामने इंसान की सीमाएं
डॉ. आशुतोष ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियां कभी भी बदल सकती हैं।
उन्होंने यात्रियों को सलाह दी कि ऐसे क्षेत्रों में यात्रा करते समय हमेशा सतर्क रहना चाहिए और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समय पर सही निर्णय लेना कई बार जीवन बचा सकता है।
सुरक्षित लौटने पर जताया आभार
डॉ. आशुतोष और उनके साथियों ने सुरक्षित वापसी पर राहत महसूस की है।
उन्होंने ईश्वर और उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में यात्रियों की मदद की।
उनका कहना है कि यह अनुभव जीवनभर याद रहेगा और उन्हें हमेशा उस पल की याद दिलाता रहेगा, जब कुछ घंटे के अंतर ने एक बड़ी त्रासदी से उन्हें बचा लिया।





