उत्तर प्रदेश

नोएडा में विकास को रफ्तार, कई बड़े प्रोजेक्ट मंजूर

Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 10:55 PM IST
नोएडा में विकास को रफ्तार, कई बड़े प्रोजेक्ट मंजूर
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नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा को आधुनिक तकनीक, औद्योगिक निवेश और रोजगार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास से जुड़े 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में एआई सिटी सह बिजनेस पार्क, सेक्टर-147 में आईटी/आईटीईएस भूखंड योजना और सेक्टर-105 में एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स विकसित करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों के हस्तांतरण शुल्क में कमी, किसानों के आबादी भूखंडों के निस्तारण और 15 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने जैसे प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।
बैठक की अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त तथा नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार ने की। इसमें नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
नोएडा में विकसित होगी हाईटेक एआई सिटी
बोर्ड बैठक का सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव नोएडा में एआई सिटी सह बिजनेस पार्क विकसित करने से जुड़ा रहा।इसके लिए उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025 को अपनाने की मंजूरी दी गई है।प्रस्तावित एआई सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी, आईटीईएस, अनुसंधान, स्टार्टअप और कौशल विकास से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।परियोजना के लिए मास्टर डेवलपर का चयन प्रतिस्पर्धात्मक ई-बिडिंग के माध्यम से किया जाएगा।इस योजना का उद्देश्य नोएडा को आधुनिक तकनीक और ज्ञान आधारित उद्योगों के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
45 साल की लीज पर विकसित होगा बिजनेस पार्क
एआई सिटी और बिजनेस पार्क परियोजना को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण यानी डीबीएफओटी मॉडल पर विकसित करने का प्रस्ताव है।इस व्यवस्था में परियोजना के विकास और संचालन की जिम्मेदारी चयनित एजेंसी को दी जाएगी, जबकि भूमि का स्वामित्व नोएडा प्राधिकरण के पास रहेगा।प्रस्ताव के अनुसार, परियोजना की शुरुआती लीज अवधि 45 वर्ष होगी। निर्धारित शर्तों के आधार पर इसे अतिरिक्त 45 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।खास बात यह है कि परियोजना के कुल निर्मित क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी और ज्ञान आधारित सेवाओं के लिए आरक्षित रखना होगा।इससे तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप को आधुनिक कार्यालय तथा अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा।
सेक्टर-147 में 68 हजार वर्गमीटर जमीन पर आईटी परियोजना
नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-147 में लगभग 68 हजार वर्गमीटर भूमि पर आईटी और आईटीईएस गतिविधियों के लिए भूखंड आवंटन योजना लाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है।इस परियोजना का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ग्रेड-ए कार्यालय विकसित करना है।जीसीसी के माध्यम से बड़ी कंपनियां तकनीकी सेवाएं, अनुसंधान, डेटा प्रबंधन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करती हैं।इस योजना से नोएडा में आईटी कंपनियों के निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।हालांकि, भूखंड आवंटन की अंतिम शर्तें और आवेदन प्रक्रिया संबंधित योजना प्रकाशित होने के बाद स्पष्ट होंगी।
सेक्टर-105 में बनेगा ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स
बोर्ड ने सेक्टर-105 में एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना को भी मंजूरी दी है।इसके लिए 12,596.64 वर्गमीटर वाणिज्यिक भूमि निर्धारित की गई है।पूरी जमीन को एक भूखंड के रूप में एकल बोली प्रक्रिया के माध्यम से एक पट्टाधारक को आवंटित किया जाएगा।योजना में 4.0 एफएआर और अधिकतम 20 मीटर तक भवन की ऊंचाई की अनुमति होगी।इसके अलावा परिसर के भीतर नियमानुसार पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी।पट्टा विलेख के निष्पादन से पांच वर्ष के भीतर अधिकतम तीन चरणों में निर्माण पूरा करके अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।
औद्योगिक इकाइयों के ट्रांसफर शुल्क में बड़ी कटौती
नोएडा प्राधिकरण ने कारोबारियों को राहत देते हुए कार्यशील औद्योगिक इकाइयों के हस्तांतरण शुल्क में कमी करने का निर्णय लिया है।पहले यह शुल्क 10 प्रतिशत था, जिसे घटाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है।इस फैसले से पात्र औद्योगिक इकाइयों के हस्तांतरण की लागत कम होगी।इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों को चालू करने की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद अधिकतम तीन वर्ष तक समयवृद्धि देने का प्रावधान किया गया है।पहले, दूसरे और तीसरे अतिरिक्त वर्ष के लिए क्रमशः तीन, पांच और सात प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है।शेयरधारिता में बदलाव की सूचना देने में देरी का शुल्क भी 500 रुपये से घटाकर 300 रुपये प्रतिदिन करने को मंजूरी दी गई है।
बैठक में सेक्टर-32 स्थित वाणिज्यिक भूखंड संख्या सीसी-01 के उपपट्टाधारकों से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।इसमें वार्षिक भू-भाटक की दर को 612 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर लगभग 232 रुपये प्रति वर्गमीटर करने का निर्णय लिया गया है।इस बदलाव का उद्देश्य संबंधित संपत्तियों के लिए शुल्क निर्धारण में एकरूपता लाना है।इसके अलावा हिंदू अविभाजित परिवार, सोसाइटी और ट्रस्ट के पक्ष में भी व्यावसायिक संपत्तियों के उपपट्टा दस्तावेजों के निष्पादन तथा हस्तांतरण की सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।
किसानों के पांच प्रतिशत आबादी भूखंडों का रास्ता होगा आसान
नोएडा प्राधिकरण ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के लंबित पांच प्रतिशत आबादी भूखंडों से जुड़े मामलों के समाधान की दिशा में भी फैसला लिया है।प्राधिकरण की व्यवस्था के अनुसार, अर्जित भूमि के बदले पात्र किसानों को पांच प्रतिशत विकसित आवासीय भूमि उपलब्ध कराई जाती है।हालांकि, कुछ किसानों के भूखंडों का नियोजन अभी लंबित है।इन मामलों के निस्तारण के लिए नोएडा मास्टर प्लान-2031 के जोनिंग रेगुलेशन में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।इसके तहत गांवों की मौजूदा आबादी से लगी भूमि पर आबादी भूखंडों के नियोजन का रास्ता तैयार किया जाएगा।जनता से आपत्तियां और सुझाव लेने के बाद प्रस्ताव को शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
15 मेगावाट के सोलर प्लांट लगाने की मंजूरी
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्राधिकरण ने लगभग 15 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का फैसला किया है।ये संयंत्र सीवेज शोधन संयंत्रों, बहुस्तरीय कार पार्किंग और गंगाजल भूमिगत जलाशयों पर लगाए जाएंगे।इनमें लगभग आठ मेगावाट क्षमता के संयंत्र शोधन संयंत्रों और जलाशयों पर तथा सात मेगावाट क्षमता के संयंत्र पार्किंग स्थलों पर स्थापित होंगे।परियोजना को रेस्को मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार, इन संयंत्रों से अगले 25 वर्षों में लगभग पांच लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।
सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान को भी मिली मंजूरी
बैठक में नोएडा के लिए तैयार सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी दी गई।इस योजना के तहत औद्योगिक गतिविधियों, माल परिवहन, यातायात व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स संबंधी सुविधाओं का अध्ययन किया गया है।इसका उद्देश्य माल ढुलाई को अधिक व्यवस्थित बनाना, परिवहन लागत घटाना और यातायात जाम की समस्या कम करना है।
बोर्ड ने इस रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश शासन की स्वीकृति के लिए भेजने का फैसला किया है।इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश मॉडल भवन विनियम-2026 को नोएडा में लागू करने का निर्णय लिया गया है।इन नियमों से संबंधित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाई जाएगी।
नोएडा में निवेश और रोजगार बढ़ने की उम्मीद
नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक के फैसलों से शहर में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं।एआई सिटी, आईटी पार्क और ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स जैसी परियोजनाएं तकनीकी कंपनियों, कारोबारियों और निवेशकों के लिए नए अवसर उपलब्ध करा सकती हैं।वहीं, ट्रांसफर शुल्क में कटौती से उद्यमियों को राहत मिलने की उम्मीद है।किसानों के लंबित आबादी भूखंडों से संबंधित प्रस्ताव और सौर ऊर्जा परियोजनाएं भी शहर के नियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
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