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LUCKNOW लखनऊ : विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने कुकरैल नदी के किनारे 24 एकड़ भूमि पर उर्मिला वन विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इस वन को पूरी तरह प्राकृतिक रूप में विकसित किया जाएगा और इसके लिए सिविल कार्यों को न्यूनतम रखा जाएगा। केवल सुरक्षा के लिए आवश्यक फेन्सिंग जैसी व्यवस्थाएं ही की जाएंगी। यह वन शहरवासियों के लिए ताजी हवा और हरित क्षेत्र उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के महाअभियान में एक नए कीर्तिमान की स्थापना करेगा। बुधवार को एलडीए की अध्यक्ष एवं मण्डलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्थल निरीक्षण कर वन विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार, सचिव विवेक श्रीवास्तव, अपर सचिव ज्ञानेन्द्र वर्मा एवं सीपी. त्रिपाठी, मुख्य नगर नियोजक केके गौतम, मुख्य अभियंता नवनीत शर्मा, अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार गुप्ता सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि पेपरमिल कॉलोनी, भीखमपुर के पास कुकरैल नदी से सटी यह 24 एकड़ भूमि पहले अव्यवस्थित और अतिक्रमित थी, जिसे अब कब्जा मुक्त कराया गया है। अब इस स्थान पर उर्मिला वन विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल शहरवासियों को ताजी हवा और प्राकृतिक वातावरण प्रदान करेगी, बल्कि यह प्रदेशभर में चल रहे पर्यावरण संरक्षण अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। वन विकास के दौरान भूमि की जैव विविधता को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एलडीए के अधिकारियों ने निर्देश दिए कि पौधारोपण के लिए स्थानीय और मौसमी प्रजातियों का चयन किया जाए। इसके अलावा, वन में प्राकृतिक जल स्रोतों और छोटे तालाबों के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि वन्यजीव और पक्षियों के लिए आवास सुनिश्चित किया जा सके।
स्थल निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, पैदल मार्ग और वन क्षेत्र के रखरखाव की रूपरेखा पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह का भारी निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा और वन के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखा जाएगा। इस वन को विकसित करने के बाद शहरवासियों के लिए एक पर्यावरणीय पर्यटन स्थल और शैक्षिक केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। डॉ. रोशन जैकब ने कहा कि उर्मिला वन परियोजना एलडीए की हरित पहल का एक प्रमुख उदाहरण है। इस परियोजना से लखनऊ शहर में हरित क्षेत्र बढ़ेंगे और नागरिकों को प्राकृतिक वातावरण के महत्व के प्रति जागरूक किया जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन विकास में पर्यावरण विशेषज्ञों और वन विभाग की सलाह को प्रमुखता से लिया जाए।
उर्मिला वन की योजना के तहत एलडीए ने स्थानीय समुदायों को भी परियोजना में शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके तहत स्थानीय लोगों को पौधारोपण और वन संरक्षण में भागीदारी का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और समुदाय वन के रखरखाव में सहयोग करेगा। एलडीए के अधिकारियों ने बताया कि परियोजना की समय-सीमा का निर्धारण भी कर लिया गया है। प्रारंभिक चरण में वन के मुख्य क्षेत्र में पौधारोपण और प्राकृतिक संरचना का विकास किया जाएगा, जबकि अगले चरण में सुरक्षा व्यवस्था और पैदल मार्गों का निर्माण किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की हरित परियोजनाओं से न केवल शहरी पर्यावरण में सुधार होता है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मददगार साबित होती हैं। उर्मिला वन परियोजना लखनऊ शहर के लिए एक नया पर्यावरणीय मॉडल स्थापित करेगी। परियोजना पूरी होने के बाद यह वन शहरवासियों के लिए योग, ध्यान, और प्रकृति के संपर्क का स्थान भी बनेगा। साथ ही यह स्थान पर्यावरण शिक्षा के लिए छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी उपयुक्त होगा। इस पहल के माध्यम से एलडीए ने यह संदेश दिया है कि शहर में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। उर्मिला वन परियोजना लखनऊ की हरित और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।





