उत्तर प्रदेश

प्रयागराज में डेंगू का कहर, 18 मरीज भर्ती

Rajeshwari Nishad
15 Oct 2026 6:10 PM IST
प्रयागराज में डेंगू का कहर, 18 मरीज भर्ती
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में मच्छरों की बढ़ती संख्या और डेंगू के नए मामले सामने आने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार तथा डेंगू जैसे लक्षणों वाले मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। शहर के विभिन्न अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों में बड़ी संख्या में संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है। चार सौ से अधिक नमूनों के जांच के लिए जमा होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इस आंकड़े की ताजा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, कई मोहल्लों में जलभराव और मच्छरों के लार्वा मिलने से संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम की फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रयागराज में तेजी से बढ़ रहे डेंगू के मरीज
प्रयागराज में सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में डेंगू के मामलों में तेजी देखी गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 5 अक्टूबर तक जिले में डेंगू के 88 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे।
इसके बाद 9 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या 100 के पार पहुंचने की जानकारी सामने आई थी।सरकारी और निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में संदिग्ध मरीजों का भी इलाज चल रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि तेज बुखार, शरीर में दर्द और अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर समय रहते जांच कराएं।
अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या
शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में डेंगू के संदिग्ध मरीज लगातार पहुंच रहे हैं।स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय, बेली अस्पताल और कॉल्विन अस्पताल में डेंगू मरीजों के उपचार के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।4 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी और निजी अस्पतालों में 600 से अधिक संदिग्ध डेंगू मरीजों का उपचार चल रहा था। कई अस्पतालों के डेंगू वार्ड में बिस्तरों की उपलब्धता को लेकर परेशानी की जानकारी भी सामने आई थी।हालांकि, संदिग्ध मरीजों की संख्या और जांच में डेंगू की पुष्टि वाले मरीजों की संख्या अलग-अलग होती है।सभी बुखार पीड़ितों को डेंगू संक्रमित नहीं माना जा सकता।
400 से अधिक नमूनों की जांच को लेकर चिंता
डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच विभिन्न पैथोलॉजी केंद्रों में जांच के लिए बड़ी संख्या में नमूने पहुंच रहे हैं।उपलब्ध जानकारी में 400 से अधिक नमूनों के जांच के लिए जमा होने की बात कही गई है।
हालांकि, इनमें कितने नमूनों की रिपोर्ट आ चुकी है, कितने लंबित हैं और कितने मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, इसकी ताजा आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।डेंगू की पहचान के लिए बीमारी के चरण के अनुसार एनएस1 एंटीजन, आईजीएम एंटीबॉडी और अन्य आवश्यक जांच का उपयोग किया जाता है।चिकित्सक मरीज के लक्षण और बीमारी की अवधि के अनुसार उचित जांच निर्धारित करते हैं।
कई इलाकों में मच्छरों के लार्वा मिलने से खतरा
प्रयागराज के कई मोहल्लों में बरसात का पानी जमा होने और सफाई व्यवस्था की कमी को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।गड्ढों, खुले बर्तनों, कूलरों और घरों की छतों पर जमा पानी में एडीज मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है।एडीज एजिप्टी मच्छर डेंगू वायरस फैलाने का प्रमुख माध्यम है। यह मच्छर दिन के समय भी काट सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घर के आसपास जमा साफ और ठहरे पानी में भी एडीज मच्छर अंडे दे सकते हैं।इसलिए केवल नालियों की सफाई ही नहीं, बल्कि घरों के अंदर और आसपास पानी जमा होने से रोकना भी आवश्यक है।
इन सात इलाकों में विशेष निगरानी
डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने शहर के सात क्षेत्रों को विशेष निगरानी में रखा है।इनमें तेलियरगंज, अल्लापुर, धूमनगंज, मुंडेरा, नैनी, झूंसी और फाफामऊ शामिल हैं।इन इलाकों में एंटी लार्वा छिड़काव और फॉगिंग अभियान तेज करने की जानकारी दी गई है।इसके अलावा गोविंदपुर और सलोरी में भी सितंबर से अक्टूबर के शुरुआती दिनों के दौरान डेंगू के अधिक मामले सामने आए थे।
स्वास्थ्य विभाग
ने प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम की फॉगिंग व्यवस्था पर सवाल
डेंगू का प्रकोप बढ़ने के बीच नगर निगम की फॉगिंग व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी भी सामने आई है।कई मोहल्लों के लोगों का कहना है कि उनके क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग नहीं हो रही है।
एंटी लार्वा छिड़काव करने वाली टीमें कब आती हैं और कब लौट जाती हैं, इसकी जानकारी भी कई निवासियों को नहीं मिल पाती।नगर निगम की ओर से फॉगिंग और दवा छिड़काव कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन लोगों का कहना है कि मच्छरों की समस्या बनी हुई है।हालांकि, मरीजों की संख्या बढ़ना अकेले इस बात का प्रमाण नहीं है कि फॉगिंग नहीं हुई। संक्रमण की स्थिति कई कारणों से प्रभावित होती है।
21 क्विक रिस्पॉन्स टीमें तैनात
डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शहर में 21 क्विक रिस्पॉन्स टीमें तैनात करने की जानकारी दी है।इन टीमों में मलेरिया निरीक्षक, सुपरवाइजर और छिड़काव कर्मचारी शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा डोमेस्टिक ब्रीडर चेकर्स को घरों और आसपास के क्षेत्रों में मच्छरों के लार्वा की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई है।टीमें पानी की टंकियों, कूलरों, गमलों, नारियल के खोल और अनुपयोगी वाहनों में जमा पानी की जांच कर रही हैं।जहां लार्वा मिल रहे हैं, वहां उन्हें नष्ट करने और लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है।
डेंगू के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डेंगू संक्रमण होने पर मरीजों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।कुछ मरीजों में मतली, उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते भी हो सकते हैं।
गंभीर मामलों में लगातार पेट दर्द, बार-बार उल्टी, रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी जैसे चेतावनी संकेत सामने आ सकते हैं।ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल जाना चाहिए।डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं लेने से बचना चाहिए, क्योंकि डेंगू में इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
घरों में भी बरतें विशेष सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है।घरों में रखे कूलरों का पानी नियमित रूप से बदलना चाहिए। पानी की टंकियों को ढककर रखना चाहिए और गमलों की तश्तरियों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।इसके अलावा पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल करना और खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाना उपयोगी हो सकता है।बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के सामने चुनौती
प्रयागराज में डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं।एक ओर अस्पतालों में मरीजों की जांच और उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर मोहल्लों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना भी बड़ी चुनौती है।फॉगिंग के साथ नियमित एंटी लार्वा गतिविधियां, जलभराव की समस्या का समाधान और घर-घर जागरूकता अभियान संक्रमण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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