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NEET में सीनियर सिटीजन को आरक्षण देने की मांग, 21 जुलाई को फैसला सुनवाई

उत्तर प्रदेश: डॉक्टर बनने की इच्छा उम्र की सीमा को भी पीछे छोड़ सकती है, इसका उदाहरण लखनऊ के 69 वर्षीय अशोक बहार हैं। मेडिकल क्षेत्र में रुचि रखने वाले अशोक बहार ने नीट परीक्षा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से आरक्षण या विशेष व्यवस्था की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है।
लखनऊ के आलमबाग स्थित चंद्रनगर निवासी अशोक बहार का कहना है कि डॉक्टर बनने का सपना उन्होंने लंबे समय से संजोकर रखा है। हालांकि उम्र अधिक होने के कारण उन्हें नीट परीक्षा में युवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। उन्होंने खुद भी डॉक्टर बनने की इच्छा के चलते दो बार नीट परीक्षा में हिस्सा लिया, लेकिन सफलता हासिल नहीं कर सके।
अशोक बहार ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अधिकारियों से वरिष्ठ नागरिकों के लिए नीट में विशेष प्रावधान बनाने की मांग की है। उनका तर्क है कि जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए अधिकतम आयु सीमा को समाप्त कर दिया गया है, तो अधिक उम्र के अभ्यर्थियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग श्रेणी या आरक्षण की व्यवस्था होने से ऐसे लोगों को भी चिकित्सा शिक्षा हासिल करने का मौका मिल सकता है, जो उम्र के कारण सामान्य प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं। उन्होंने अदालत से मांग की है कि केंद्र सरकार को इस संबंध में नीति बनाने के निर्देश दिए जाएं।
अशोक बहार का परिवार भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी अमेरिका में डॉक्टर हैं और उनके परिवार में कई अन्य लोग भी मेडिकल पेशे से जुड़े हैं। अशोक बहार के अनुसार, उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की अच्छी समझ है, लेकिन मेडिकल डिग्री नहीं होने के कारण वह डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस नहीं कर सकते।
उन्होंने अपनी याचिका में शिक्षा को हर नागरिक का अधिकार बताया है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की उम्र उसके सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा में बाधा नहीं बननी चाहिए। यदि कोई वरिष्ठ नागरिक पूरी मेहनत और लगन के साथ चिकित्सा शिक्षा हासिल करना चाहता है, तो उसे भी उचित अवसर मिलना चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में नीट परीक्षा में सभी उम्र के अभ्यर्थियों को एक समान प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अधिक उम्र के उम्मीदवारों के लिए शारीरिक क्षमता, पढ़ाई की गति और अन्य चुनौतियां अलग हो सकती हैं। ऐसे में उनके लिए विशेष व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
अशोक बहार का कहना है कि उम्र केवल एक संख्या है और यदि कोई व्यक्ति समाज की सेवा करने के उद्देश्य से डॉक्टर बनना चाहता है तो उसे मौका मिलना चाहिए। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि वरिष्ठ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को उचित कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं।
गौरतलब है कि नीट देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों छात्र एमबीबीएस और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा देते हैं। वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से कोई आरक्षण प्रावधान नहीं है।
अब सभी की नजर 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। हाईकोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि अदालत इस मांग पर विचार करती है तो यह मेडिकल शिक्षा में उम्र से जुड़े अवसरों को लेकर एक नई बहस शुरू कर सकता है।
अशोक बहार की याचिका केवल व्यक्तिगत इच्छा से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या शिक्षा और करियर के अवसरों में उम्र के आधार पर अलग व्यवस्था होनी चाहिए। आने वाले समय में अदालत का फैसला इस मुद्दे की दिशा तय कर सकता है।





