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उत्तर प्रदेश
यूपी में AI और डीपफेक से नहीं बचेंगे अपराधी, CM योगी का बयान
Rajeshwari Nishad
24 Oct 2026 5:27 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक और आधुनिक तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों और मानव विवेक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि अपराधी तकनीक का कितना भी सहारा ले लें, उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उन्हें खोज निकालने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग निर्णय लेने में सहायता के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन उसे अंतिम निर्णय लेने वाला नहीं बनाया जा सकता। तकनीक पर पूरी तरह निर्भरता भविष्य में गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'टेक संगम 2026' को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और एआई के न्यायिक एवं प्रशासनिक उपयोग पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच के बेहतर तालमेल से अपराध अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे न्याय प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करने में भी मदद मिल सकती है।
एआई मददगार है, लेकिन अंतिम फैसला नहीं कर सकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रहा है। अपराध अनुसंधान में भी इसके जरिए बड़ी मात्रा में डिजिटल जानकारी का विश्लेषण किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का इस्तेमाल मानव विवेक के अधीन होना चाहिए।
उनके अनुसार, एआई से प्राप्त जानकारी को बिना जांचे-परखे अंतिम सत्य मान लेना उचित नहीं है। किसी भी मामले में निष्कर्ष निकालने से पहले साक्ष्यों की प्रामाणिकता, उनकी विश्वसनीयता और कानूनी स्वीकार्यता की जांच आवश्यक है। तकनीक जांचकर्ताओं की मदद कर सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति के दोषी या निर्दोष होने का निर्णय वैज्ञानिक प्रक्रिया और कानून के अनुसार ही होना चाहिए।
मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब एआई की मदद से नकली आवाज, वीडियो और तस्वीरें तैयार करना आसान होता जा रहा है। ऐसी सामग्री का गलत इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति को बदनाम करने, लोगों को भ्रमित करने या जांच की दिशा प्रभावित करने की आशंका रहती है। इसलिए डिजिटल साक्ष्यों की जांच और उनकी वास्तविकता की पुष्टि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
डीपफेक के जरिए अपराध छिपाना आसान नहीं होगा
डीपफेक तकनीक के माध्यम से किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या वीडियो में इस तरह बदलाव किया जा सकता है कि वह वास्तविक दिखाई दे। ऐसी तकनीक का दुरुपयोग साइबर ठगी, फर्जी पहचान और भ्रामक सामग्री तैयार करने जैसे मामलों में किया जा सकता है। इससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां भी पैदा होती हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपराधी तकनीक का आवरण ओढ़कर कानून से बच नहीं सकते। उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक जांच और विधिक व्यवस्था के माध्यम से अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक जांच की भूमिका अहम होती है। जांचकर्ता वीडियो और ऑडियो की प्रामाणिकता, उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड तथा अन्य संबंधित साक्ष्यों का परीक्षण कर सकते हैं। हालांकि, केवल किसी तकनीकी उपकरण से मिले परिणाम के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय स्वतंत्र सत्यापन भी जरूरी होता है।
डीपफेक के मामलों में यह भी महत्वपूर्ण है कि जांच के दौरान मूल डिजिटल सामग्री सुरक्षित रखी जाए और उसकी विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। इससे जांच के निष्कर्षों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप प्रस्तुत करने में मदद मिलती है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत होगी जांच
मुख्यमंत्री ने अपराध अनुसंधान में फॉरेंसिक विज्ञान के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिंगरप्रिंट, डीएनए, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों का उचित विश्लेषण जांच को मजबूत बना सकता है।
पारंपरिक जांच प्रक्रिया में कई बार साक्ष्यों के विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने में काफी समय लग जाता है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और बेहतर तकनीकी संसाधनों के जरिए इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अपराधों की जांच में गुणवत्ता बढ़ाने के साथ न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकता है। इसके लिए केवल तकनीक उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित कर्मचारियों, विशेषज्ञों और प्रभावी कानूनी प्रक्रियाओं का होना भी जरूरी है।
क्वांटम फॉरेंसिक्स के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत
टेक संगम 2026 के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन से जुड़े 'LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, 'अभेद्य' परियोजना की आधारशिला रखी और 'एआई इन कंस्ट्रक्शन' पुस्तक का विमोचन भी किया।
इन पहलों का उद्देश्य उभरती तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच तालमेल को बढ़ावा देना है। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और आधुनिक तकनीक के उपयोग से जुड़ी चुनौतियों पर विचार साझा किए।
क्वांटम तकनीक और डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देना भविष्य में जांच व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
फॉरेंसिक संस्थान और प्रशिक्षण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में डीएनए, साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक्स से संबंधित आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं। यहां एआई, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से अपराध अनुसंधान को मजबूत करने पर भी काम किया जा रहा है।
संस्थान की ओर से पुलिस, रक्षा बलों और प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे जांच अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने और आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए जरूरी कौशल विकसित करने में मदद मिल सकती है।
सम्मेलन में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण समेत कई अधिकारियों, शिक्षाविदों और देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया। चर्चा में साइबर बुलिंग, डिजिटल साक्ष्य और अपराध स्थल के वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे।
तकनीक के साथ जवाबदेही भी जरूरी
टेक संगम 2026 में सामने आया प्रमुख संदेश यह है कि आधुनिक तकनीक अपराध अनुसंधान को गति दे सकती है, लेकिन उसका उपयोग जिम्मेदारी और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। एआई के जरिए प्राप्त जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि, डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और कानूनी मानकों का पालन जांच की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानव विवेक को तकनीकी निर्णयों से ऊपर रखने पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि तकनीक का उद्देश्य मानव क्षमता को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उसके स्थान पर निर्णय लेना।
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