उत्तर प्रदेश

गंगाजल उठाकर पैसे बांटने का दावा पार्षदों पर गिरी गाज

Ratna Netam
28 Aug 2026 4:09 PM IST
गंगाजल उठाकर पैसे बांटने का दावा पार्षदों पर गिरी गाज
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उत्तर प्रदेश : शाहजहांपुर नगर निगम से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ पार्षद कथित तौर पर हाथ में गंगाजल लेकर शपथ लेते नजर आ रहे हैं कि वे रिश्वत या अवैध कमाई के पैसे को आपस में बांटेंगे। वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया और एक महिला पार्षद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
वायरल वीडियो में कुछ लोग एक साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कथित तौर पर नगर निगम की आय और पैसों के बंटवारे को लेकर बातचीत हो रही है। दावा किया जा रहा है कि इसमें पार्षद हाथ में गंगाजल लेकर एक-दूसरे के साथ ईमानदारी से पैसे बांटने की बात कहते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर जमकर नाराजगी जताई।
वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब 10 महीने पुराना है, लेकिन दोबारा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया। वीडियो की सत्यता और उसमें मौजूद लोगों की पहचान को लेकर जांच की बात कही जा रही है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
वीडियो में दिखाई दे रही कथित गतिविधि को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जनप्रतिनिधियों से जनता पारदर्शिता और ईमानदारी की उम्मीद करती है, ऐसे में अगर इस तरह की बातें सामने आती हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
महिला पार्षद ने दिया इस्तीफा
वीडियो विवाद के बाद भाजपा से जुड़ी मनोनीत पार्षद पूनम मेहरोत्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो से नगर निगम के सभी पार्षदों की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अपना पद छोड़ने का फैसला किया।
पार्षद ने यह भी कहा कि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या गलत गतिविधि से जुड़े आरोपों के कारण पूरे नगर निगम की प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई।
कई पार्षदों को नोटिस जारी
मामले के सामने आने के बाद भाजपा महानगर अध्यक्ष की ओर से वीडियो में दिखाई दे रहे कई पार्षदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। उनसे इस मामले में जवाब मांगा गया है।
प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि वायरल वीडियो में कौन-कौन लोग मौजूद हैं और वीडियो में कही गई बातें किस संदर्भ में थीं। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
इस घटना ने नगर निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। नगर निगम जैसे संस्थानों में जनता के पैसे और विकास कार्यों से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगना गंभीर मामला माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है। जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर जांच जारी है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि वीडियो वास्तविक है या नहीं और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका क्या है। वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है।
इस पूरे मामले ने शाहजहांपुर नगर निगम की राजनीति को गर्मा दिया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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