उत्तर प्रदेश

यूपी में कांग्रेस का बड़ा फैसला, चुनाव से दूरी

Kavita2
8 Oct 2026 9:34 AM IST
यूपी में कांग्रेस का बड़ा फैसला, चुनाव से दूरी
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने राज्य की विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव से खुद को अलग कर लिया है। करीब एक साल तक चुनावी तैयारियों में जुटी कांग्रेस ने अब इन सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि उसका पूरा ध्यान आगामी विधानसभा चुनाव पर केंद्रित है। कांग्रेस के इस फैसले से उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को झटका लगा है, जो लंबे समय से विधान परिषद चुनाव की तैयारियां कर रहे थे। वहीं, अब इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला प्रमुख रूप से दिखाई दे रहा है।

एक साल की तैयारी के बाद कांग्रेस ने बदला फैसला

उत्तर प्रदेश कांग्रेस पिछले करीब एक साल से विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव की तैयारी कर रही थी। इसके लिए पार्टी की ओर से संगठनात्मक स्तर पर कई कदम उठाए गए थे। विभिन्न क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने के साथ चुनावी गतिविधियां भी शुरू कर दी गई थीं।

पार्टी ने चुनावी तैयारियों के लिए पर्यवेक्षकों और समन्वयकों की नियुक्ति की थी। इतना ही नहीं, चुनाव से जुड़े कार्यों पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी की गई थी।

कई संभावित उम्मीदवार करीब नौ महीने से अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचार अभियान चला रहे थे। उन्होंने शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए गतिविधियां शुरू कर दी थीं। हालांकि, अब कांग्रेस नेतृत्व ने इन चुनावों में अपने उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है।

विधानसभा चुनाव 2027 पर रहेगा पूरा ध्यान

कांग्रेस का कहना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी की प्राथमिकता है। ऐसे में संगठन की पूरी ताकत विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगाई जाएगी।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया गया है।

कांग्रेस के सामने प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने की चुनौती है। पार्टी विधानसभा चुनाव में बेहतर संगठनात्मक तैयारियों के साथ उतरना चाहती है।

विधान परिषद चुनाव से अलग रहने के फैसले को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस निर्णय के बाद पार्टी के भीतर चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने बताई फैसले की वजह

उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने विधान परिषद चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय उनके प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने से पहले ही लिया जा चुका था।

पार्टी नेताओं के अनुसार, विधान परिषद चुनाव की शुरुआती तैयारियां केंद्रीय नेतृत्व से पर्याप्त समन्वय के बिना शुरू की गई थीं। चुनाव में अब सीमित समय बचा है। ऐसे में कांग्रेस ने अपनी प्राथमिकताओं को देखते हुए उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है।

इस निर्णय के पीछे समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक तालमेल बनाए रखने का पहलू भी सामने आया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी विपक्षी गठबंधन में सहयोगी दल हैं। ऐसे में विधान परिषद चुनाव में अलग-अलग उम्मीदवार उतारने से बचना भी इस निर्णय का एक कारण बताया जा रहा है।

23 अक्टूबर को होगा 11 सीटों पर मतदान

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। इनमें पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की सीटें शामिल हैं।

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इन सीटों के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी की गई थी। नामांकन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर निर्धारित थी, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की गई।

उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।

भाजपा और सपा के बीच मुकाबला

कांग्रेस के चुनाव से हटने के बाद अब विधान परिषद की इन सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रमुख दावेदारों के रूप में सामने हैं।

भाजपा ने सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। पार्टी ने कई मौजूदा विधान परिषद सदस्यों को दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने भी चुनावी तैयारियां तेज की हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कुछ सीटों पर उम्मीदवारों में बदलाव करते हुए दूसरे राजनीतिक दलों से आए नेताओं को मौका दिया है।

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से संजयन त्रिपाठी और आगरा की सीट से आकाश अग्रवाल को समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है।

इन सीटों पर अन्य उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में कांग्रेस के हटने के बावजूद मुकाबला केवल दो दलों तक सीमित नहीं है।

निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं कांग्रेस से जुड़े नेता

कांग्रेस के फैसले के बाद उन नेताओं के सामने नई स्थिति पैदा हो गई है, जो पार्टी के समर्थन से चुनाव की तैयारी कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस से जुड़े कुछ संभावित उम्मीदवार अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। लंबे समय से चुनावी तैयारियों में जुटे इन नेताओं के लिए पार्टी का अंतिम समय में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला महत्वपूर्ण बदलाव है।

हालांकि, सभी क्षेत्रों में ऐसे उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम उम्मीदवारों की तस्वीर सामने आएगी।

सपा के साथ गठबंधन पर भी नजर

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक सहयोग बना हुआ है। लोकसभा चुनाव के बाद दोनों दलों की नजर आगामी विधानसभा चुनाव पर है।

विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले को गठबंधन के बीच तालमेल बनाए रखने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

ऐसे में कांग्रेस का विधान परिषद चुनाव से अलग रहने का फैसला भविष्य की गठबंधन रणनीति से भी जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

अब संगठन मजबूत करने पर जोर

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता 2027 का विधानसभा चुनाव है। पार्टी अब संगठनात्मक गतिविधियों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जमीनी स्तर पर तैयारियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

उत्तर प्रदेश में हाल ही में कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व में बदलाव भी हुआ है। आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अतिरिक्त संगठन में अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गई हैं।

इन बदलावों को विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

फिलहाल कांग्रेस ने विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला कर दिया है। अब पार्टी का अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य 2027 का विधानसभा चुनाव है। वहीं, 23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद चुनाव में भाजपा, समाजवादी पार्टी और अन्य उम्मीदवारों की चुनावी स्थिति पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

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