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यूपी में नोटों का बड़ा खेल, बाइक सवार से 1.43 करोड़ के बंद नोट बरामद

हापुड़। उत्तर प्रदेश में नकली नोटों और पुरानी करेंसी से जुड़े मामलों ने जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ा दी है। सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपये से अधिक के नकली नोट मिलने की जांच अभी जारी है। इसी बीच हापुड़ जिले में पुलिस ने चेकिंग अभियान के दौरान एक बाइक सवार के कब्जे से 1.43 करोड़ रुपये के पुराने बंद हो चुके नोट बरामद किए हैं। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आशंका जताई जा रही है कि पुराने नोटों को बदलने से जुड़ा कोई नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हापुड़ देहात थाना पुलिस ने यह कार्रवाई ततारपुर चौकी क्षेत्र में स्थित एक पेट्रोल पंप के पास की। पुलिस की टीम संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक बाइक सवार को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी में उसके पास से बड़ी संख्या में पुराने बंद हो चुके नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। इन नोटों की कुल कीमत करीब 1 करोड़ 43 लाख रुपये बताई जा रही है। बरामदगी के बाद पुलिस बाइक सवार से पूछताछ कर रही है।
चेकिंग के दौरान बाइक से मिली करोड़ों की करेंसी
जानकारी के अनुसार, हापुड़ देहात थाना प्रभारी पारस मलिक पुलिस टीम के साथ ततारपुर चौकी क्षेत्र में वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान पेट्रोल पंप के पास एक संदिग्ध बाइक सवार को रोका गया। पुलिस ने उसकी तलाशी ली तो उसके कब्जे से पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बरामद हुए।
इतनी बड़ी संख्या में बंद हो चुके नोट मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि नोट कहां से लाए गए थे और उन्हें किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पकड़ा गया व्यक्ति गाजियाबाद का रहने वाला बताया गया है। उसकी पहचान देवेंद्र के रूप में सामने आई है। हालांकि, नोटों के वास्तविक मालिक और उन्हें ले जाने के उद्देश्य को लेकर जांच जारी है।
नोटबंदी के दस साल बाद मिली बड़ी रकम
देश में नवंबर 2016 में केंद्र सरकार ने तत्कालीन 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला किया था। इसके बाद पुराने नोटों को बदलने और जमा करने के लिए निर्धारित अवधि दी गई थी।
अब लगभग दस साल बाद इतनी बड़ी मात्रा में पुराने बंद नोटों की बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक इन नोटों को कहां रखा गया था और अब इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का उद्देश्य क्या था।
बरामद नोटों की कीमत उनके पुराने अंकित मूल्य के आधार पर बताई जा रही है। ये नोट अब सामान्य लेनदेन के लिए वैध मुद्रा नहीं हैं।
पुराने नोट बदलने वाले नेटवर्क की आशंका
पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं पुराने बंद नोटों को बदलने के नाम पर कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा है। हालांकि, अभी किसी ऐसे गिरोह के सक्रिय होने का प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बाइक सवार को नोट किसने दिए और इन्हें कहां पहुंचाया जाना था। पुलिस यह भी जानने में जुटी है कि इस लेनदेन में अन्य व्यक्तियों की भूमिका है या नहीं।
पुलिस ने बरामदगी के संबंध में संबंधित जांच एजेंसियों को जानकारी दे दी है। आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों को मामले से अवगत कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। आगे की जांच में नोटों के स्रोत और संभावित लेनदेन से जुड़े तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।
सहारनपुर में मिले थे 17.29 करोड़ के नकली नोट
हापुड़ की इस बरामदगी से पहले सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से 17 करोड़ 29 लाख रुपये के नकली नोट मिलने का मामला सामने आया था। इस मामले ने बैंकिंग व्यवस्था और करेंसी चेस्ट की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
सहारनपुर मामले में जांच के दौरान बैंक कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका सामने आई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने सितंबर में बैंक मैनेजर अमित कुमार को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा करेंसी चेस्ट से जुड़े एक संविदा चालक की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई थी।
हालांकि, हापुड़ में मिले बंद नोटों और सहारनपुर के नकली नोट मामले के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों मामलों की प्रकृति भी अलग है। सहारनपुर में नकली मुद्रा बरामद हुई थी, जबकि हापुड़ में पहले से चलन से बाहर किए गए पुराने नोट मिले हैं।
नोटों के स्रोत की तलाश में जुटी पुलिस
हापुड़ पुलिस के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण काम बरामद नोटों के स्रोत का पता लगाना है। पुलिस पूछताछ के माध्यम से यह जानने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी रकम एक बाइक सवार के पास कैसे पहुंची।
जांच में नोटों की आवाजाही, संभावित संपर्कों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। यदि किसी संगठित गतिविधि से जुड़े साक्ष्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।
फिलहाल पुलिस की ओर से पूरे नेटवर्क को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में पुराने नोटों को बदलने वाले गिरोह की बात अभी जांच और आशंका तक ही सीमित है।
जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी नजर
उत्तर प्रदेश में हाल के समय में सामने आए इन दोनों मामलों के बाद बड़ी रकम से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। हापुड़ में बरामद 1.43 करोड़ रुपये के पुराने नोट आखिर किसके थे और उन्हें कहां ले जाया जा रहा था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पुलिस ने फिलहाल नोटों को कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। संबंधित एजेंसियों को भी सूचना दी गई है। अब जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।





