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Sawan के पहले सोमवार कसमंडी में हंगामा, पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोका

लखनऊ : मलिहाबाद स्थित कसमंडी विवादित ढांचा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सावन के पहले सोमवार को हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा ढांचे पर जल चढ़ाने के प्रयास के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद कुछ देर तक हंगामा चलता रहा। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, हिंदू संगठन लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने कुछ दिन पहले कसमंडी स्थित विवादित ढांचे पर सावन माह में जलाभिषेक करने की घोषणा की थी। संगठन की ओर से इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति भी मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद संगठन ने पहले सोमवार को बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचने का ऐलान किया था।
सोमवार को लाखन आर्मी और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कसमंडी विवादित स्थल की ओर बढ़ने लगे। संगठन का दावा था कि उन्होंने 108 गांवों से पवित्र मिट्टी एकत्र की है और उसी के साथ जल चढ़ाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। जैसे ही पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया।
प्रशासन ने विवादित ढांचे की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को स्थल से करीब 200 मीटर पहले ही रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज संगठन के कार्यकर्ता वहीं बैठ गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
लाखन आर्मी के अध्यक्ष सूरज पासी ने पुलिस अधिकारियों से आगे जाने की अनुमति देने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। काफी देर तक बातचीत और समझाने के बाद भी प्रदर्शनकारी नहीं माने। इसके बाद सूरज पासी ने बैरिकेडिंग के पास ही सांकेतिक रूप से जलाभिषेक किया और कुछ समय बाद समर्थकों के साथ वापस लौट गए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति नहीं चाहता था, इसलिए पहले से ही पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
गौरतलब है कि कसमंडी विवादित ढांचा इससे पहले भी विवादों में रह चुका है। 21 मई को हिंदू संगठनों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर इस स्थल को लेकर कई दावे किए थे। संगठनों ने दावा किया था कि विवादित ढांचे की दीवारों और अन्य हिस्सों में प्राचीन हिंदू कलाकृतियों के निशान मौजूद हैं। इसके बाद उन्होंने स्थल की जांच और कार्बन डेटिंग कराने की मांग भी उठाई थी।
इसके बाद प्रशासन ने विवादित स्थल पर नमाज पढ़ने को लेकर भी रोक लगा दी थी। वहीं, हिंदू संगठनों का कहना था कि यह स्थान प्राचीन हिंदू धार्मिक स्थल है और इसकी ऐतिहासिक जांच कराई जानी चाहिए।
इससे पहले 27 मई को भी अखिल भारत हिंदू महासभा, भारतीय किसान मंच, गोसेवा परिषद समेत कई संगठनों ने विवादित स्थल की ओर जाने का प्रयास किया था। उस दौरान भी पुलिस ने उन्हें मौके से पहले ही रोक दिया था। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हल्की झड़प की स्थिति भी बनी थी। बाद में कार्यकर्ता वहीं बैठ गए और भगवान शिव के जयकारे लगाने लगे थे।
फिलहाल कसमंडी विवादित ढांचे को लेकर प्रशासन सतर्क है। पुलिस लगातार इलाके की निगरानी कर रही है और किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल भी तैनात रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।





