उत्तर प्रदेश

Mobile से सिम चुराकर करते थे ठगी, यूट्यूब से सीखा था साइबर खेल

Ratna Netam
3 Aug 2026 4:46 PM IST
Mobile  से सिम चुराकर करते थे ठगी, यूट्यूब से सीखा था साइबर खेल
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बलरामपुर : उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में साइबर अपराध का एक बेहद शातिर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ऐसा गिरोह सक्रिय था, जो लोगों के मोबाइल से चुपके से सिम कार्ड निकालकर अपने आईफोन में लगाता था और फिर उनके यूपीआई खाते को अपने कब्जे में लेकर लाखों रुपये की ठगी कर लेता था। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी इस तकनीक को यूट्यूब वीडियो देखकर सीखते थे और ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए नेपाल के कैसीनो तक पहुंच जाते थे।

बलरामपुर पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए दो बाल अपचारियों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से तीन आईफोन, एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 24 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने कई लोगों को इसी तरीके से अपना शिकार बनाया हो सकता है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान "साइ-वज्र" के तहत की गई। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय और क्षेत्राधिकारी उतरौला डॉ. जितेंद्र कुमार के पर्यवेक्षण में कोतवाली उतरौला पुलिस और जनपदीय साइबर सेल की संयुक्त टीम ने इस गिरोह का पर्दाफाश किया।

जांच के दौरान पुलिस को शिकायतकर्ता अरुण कुमार वर्मा निवासी अमया देवरिया और साइबर पोर्टल पर मिली शिकायतों से कई अहम सुराग मिले। इसके बाद डिजिटल साक्ष्यों और बैंक लेनदेन की जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि आरोपी लोगों के मोबाइल फोन को अपना निशाना बनाते थे।

पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले लोगों से बातचीत करने या फोटो खींचने के बहाने उनका मोबाइल फोन मांग लेते थे। मौका मिलते ही वे मोबाइल से सिम कार्ड निकालकर अपने आईफोन में डाल देते थे। इसके बाद यूपीआई से जुड़े एप्लीकेशन को सक्रिय कर नया पासकोड सेट कर लेते थे। खास बात यह थी कि सिम कार्ड दोबारा पीड़ित के मोबाइल में लगा दिया जाता था, जिससे उसे तुरंत किसी तरह की भनक नहीं लगती थी, जबकि यूपीआई की सुविधा आरोपियों के आईफोन में चालू रहती थी।

इस तरीके से आरोपी बैंक खातों से आसानी से पैसे निकाल लेते थे। पुलिस जांच में सामने आया कि 28 मई को आरोपियों ने रवि वर्मा के खाते से करीब 95 हजार रुपये निकाल लिए थे। वहीं तीन जुलाई को अरुण वर्मा के खाते से एक लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। दोनों मामलों में कुल एक लाख 65 हजार रुपये की साइबर ठगी की पुष्टि हुई है।

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने साइबर ठगी का यह तरीका यूट्यूब वीडियो देखकर सीखा था। वारदात को अंजाम देने के लिए वे सेकेंड हैंड आईफोन खरीदते थे। ठगी के बाद इन मोबाइलों को बेचकर सबूत मिटाने की कोशिश करते थे और फिर नए आईफोन के जरिए दूसरी वारदात को अंजाम देते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को खपाने के लिए आरोपी नेपाल के चन्द्रौटा स्थित कैसीनो जाते थे। वहां वे पीड़ितों के बैंक खातों से ऑनलाइन भुगतान करते थे और इसके बदले नकद रुपये हासिल कर लेते थे। इससे बैंक रिकॉर्ड में लेनदेन सामान्य भुगतान जैसा दिखाई देता था और ठगी का पता लगाने में देरी होती थी।

गिरफ्तार आरोपियों में आर्यनगर उतरौला निवासी सनी चौरसिया और उसके दो नाबालिग साथी शामिल हैं। पुलिस अब इनके बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह ने कई अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी की है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना मोबाइल फोन किसी अनजान व्यक्ति को न दें और यूपीआई, बैंकिंग एप्स तथा मोबाइल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।

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