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उत्तर प्रदेश: सहारनपुर में ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अनोखा और भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नन्हे-मुन्नों से सीधे संवाद किया, उन्हें अपने हाथों से भोजन परोसा और कई बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का बच्चों के साथ आत्मीय जुड़ाव देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने बच्चों को किताबें, कॉपी, बैग और स्टेशनरी किट वितरित की। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। सीएम ने बच्चों से पूछा कि क्या वे रोज स्कूल आएंगे, जिस पर सभी बच्चों ने मुस्कुराकर सहमति जताई। इससे माहौल और भी भावुक और उत्साहपूर्ण हो गया।
कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जहां उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए नवाचारों को देखा और उनकी सराहना की। परिषदीय विद्यालयों की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जिसे सभी ने सराहा। मुख्यमंत्री ने मंच से बच्चों के आत्मविश्वास की प्रशंसा की और उन्हें प्रोत्साहित किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी कक्षाओं में पहुंचे और बच्चों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। उन्होंने एक-एक बच्चे का नाम पूछा और उनके साथ संवाद किया। बच्चों ने भी सहजता से अपने जवाब दिए, जिससे पूरा माहौल खुशियों से भर गया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट भी दी और उनका उत्साह बढ़ाया।
विपरीत मौसम के कारण अन्नप्राशन कार्यक्रम कक्षा में ही आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चंदन/टीका लगाया और उन्हें खीर खिलाई। इस दौरान कई बच्चे मुख्यमंत्री की गोद में भी खेलते नजर आए, जिससे कार्यक्रम और भी भावनात्मक बन गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में पांच मेधावी बच्चों को किताबें, बैग और स्टेशनरी किट भी प्रदान की। इनमें साक्षी, आरव, लव्यांश, अस्मिता और रविंद्र शामिल रहे, जो अलग-अलग विद्यालयों और कक्षाओं से जुड़े हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सहारनपुर के पांच सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी सम्मानित किया। सम्मानित शिक्षकों में इंदु बेस, कुलदीप अरोड़ा, अश्वनी कुमार शर्मा, राज सिंह और मोहिनी पाल शामिल रहे। उनके उत्कृष्ट कार्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान की सराहना की गई। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है और हर बच्चे को स्कूल से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से भी अपील की कि वे ‘स्कूल चलो अभियान’ को सफल बनाने में सहयोग करें।
यह पूरा कार्यक्रम बच्चों के लिए यादगार बन गया, जहां शिक्षा, संस्कार और स्नेह का अनोखा संगम देखने को मिला।





