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उत्तर प्रदेश
मकान बनाना होगा महंगा, यूपी में ईंटों का उत्पादन ठप, बढ़ेंगे दाम
Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 7:13 PM IST

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शाहजहांपुर। अक्टूबर का महीना समाप्त होने को है, लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में ईंट भट्ठों का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। कोयले की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने और उसकी कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भट्ठा संचालकों के सामने उत्पादन शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल बाजार में ग्राहकों को पुराने स्टॉक से ईंटों की आपूर्ति की जा रही है। यदि नवंबर तक पुराना स्टॉक समाप्त हो गया और नए उत्पादन की शुरुआत नहीं हुई, तो निर्माण कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे मकान बनवा रहे लोगों, ठेकेदारों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों की परेशानी बढ़ने की आशंका है।
कोयले की कमी से ठप पड़ा उत्पादन
ईंट भट्ठों के संचालन में कोयला प्रमुख ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भट्ठों में कच्ची ईंटों को पकाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन की जरूरत होती है। ऐसे में कोयले की उपलब्धता प्रभावित होने पर उत्पादन शुरू करना मुश्किल हो जाता है।
शाहजहांपुर में भी कोयले की कमी और बढ़ी हुई कीमतों का असर भट्ठा उद्योग पर दिखाई दे रहा है। भट्ठा संचालक फिलहाल उत्पादन शुरू करने के बजाय पुराने स्टॉक के सहारे ग्राहकों की मांग पूरी कर रहे हैं।
यदि कोयले की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो जिले में ईंटों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, वर्तमान में कितने भट्ठे बंद हैं और कोयले की कितनी कमी है, इसका विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
पुराने स्टॉक से चल रहा काम
ईंट भट्ठों का नया उत्पादन शुरू नहीं होने के बावजूद बाजार में ईंटों की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है। व्यापारी पुराने स्टॉक से ग्राहकों को ईंटें उपलब्ध करा रहे हैं।निर्माण कार्यों में ईंटों की नियमित जरूरत होती है। मकान की नींव, दीवारों और अन्य निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंटें उपलब्ध होना जरूरी है।फिलहाल पुराना स्टॉक होने से बाजार की जरूरतें पूरी की जा रही हैं, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल हो सकता है। यदि नए उत्पादन में देरी हुई, तो ईंटों की उपलब्धता कम हो सकती है।
नवंबर तक स्टॉक खत्म होने की आशंका
भट्ठा संचालकों के सामने सबसे बड़ी चिंता पुराने स्टॉक के निस्तारण को लेकर है। यदि नवंबर तक मौजूदा स्टॉक समाप्त हो गया और उत्पादन शुरू नहीं हुआ, तो बाजार में ईंटों की कमी पैदा हो सकती है।
इस स्थिति में ग्राहकों को ईंटें हासिल करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। निर्माण सामग्री की उपलब्धता कम होने पर मकान बनवाने वाले लोगों की योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।विशेष रूप से वे लोग परेशान हो सकते हैं, जिन्होंने सीमित बजट में घर बनाने का काम शुरू कराया है। ईंटों की आपूर्ति रुकने से मजदूरों और निर्माण से जुड़े दूसरे कामगारों के काम पर भी असर पड़ सकता है।
निर्माण कार्यों की लागत बढ़ने का खतरा
ईंटों की कमी होने पर बाजार में उनकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यदि मांग बनी रहती है, लेकिन उपलब्धता कम हो जाती है, तो ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।निर्माण कार्यों में ईंटों के अलावा सीमेंट, सरिया, बालू और अन्य सामग्री की भी जरूरत होती है। ऐसे में किसी एक प्रमुख सामग्री की आपूर्ति बाधित होने से निर्माण की समयसीमा और लागत दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि, फिलहाल ईंटों की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है या आगे कितनी वृद्धि हो सकती है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। वास्तविक स्थिति बाजार में आपूर्ति और मांग पर निर्भर करेगी।
भट्ठा संचालकों के सामने बढ़ीं चुनौतियां
ईंट भट्ठा उद्योग में उत्पादन लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। कोयले की कीमत बढ़ने से भट्ठा संचालकों का खर्च बढ़ जाता है।यदि ईंधन महंगा मिलता है, तो ईंटें पकाने की लागत भी बढ़ सकती है। ऐसे में संचालकों को उत्पादन शुरू करने से पहले लागत और बाजार में मिलने वाली कीमत का आकलन करना पड़ता है।कोयले की कमी के साथ इसकी बढ़ी हुई कीमतों ने उद्योग के लिए स्थिति और कठिन कर दी है। उत्पादन शुरू करने में देरी होने से भट्ठा संचालकों की आय भी प्रभावित हो सकती है।
मजदूरों की आजीविका पर भी पड़ सकता है असर
ईंट भट्ठों में बड़ी संख्या में मजदूर काम करते हैं। इनमें ईंट बनाने, उन्हें सुखाने, भट्ठों में पकाने और तैयार ईंटों की लोडिंग का काम करने वाले श्रमिक शामिल हैं।भट्ठों का संचालन शुरू नहीं होने से इन श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं। जिन परिवारों की आजीविका इसी उद्योग पर निर्भर है, उन्हें काम मिलने तक आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।उत्पादन में देरी जारी रहने पर भट्ठा मालिकों के साथ मजदूरों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों की आमदनी भी प्रभावित होने की आशंका है।
कोयले की आपूर्ति बहाल होने पर टिकी नजर
अब भट्ठा संचालकों और व्यापारियों की नजर कोयले की उपलब्धता और उसकी कीमतों पर है। यदि जल्द पर्याप्त कोयला उपलब्ध हो जाता है, तो भट्ठों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद बढ़ सकती है।वहीं, आपूर्ति में देरी होने पर पुराने स्टॉक के समाप्त होने के बाद बाजार में ईंटों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।निर्माण क्षेत्र के लिए ईंटों की नियमित उपलब्धता जरूरी है। ऐसे में भट्ठों का समय पर संचालन शुरू होना स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण
कोयले की उपलब्धता से जुड़ी समस्या का समाधान होने पर ईंट भट्ठा उद्योग को राहत मिल सकती है। इसके लिए आपूर्ति की स्थिति, कीमतों और उत्पादन में आ रही बाधाओं पर ध्यान देना जरूरी होगा।
भट्ठा संचालकों को भी ईंधन की उपलब्धता के अनुसार उत्पादन की योजना बनानी होगी, ताकि बाजार में ईंटों की आपूर्ति प्रभावित न हो।फिलहाल शाहजहांपुर में भट्ठों का संचालन शुरू नहीं होने से आने वाले दिनों में ईंटों की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
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