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अयोध्या। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को अयोध्या में आयोजित ‘जागरण विमर्श 2026’ के समापन सत्र में विपक्षी दलों पर परिवारवाद और चुनावी गठबंधनों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष को अपने काम और ‘मेरिट’ के आधार पर जनता से वोट मांगने की चुनौती दी। पाठक ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की राजनीति पर सवाल उठाए और भाजपा को कार्यकर्ताओं पर आधारित पार्टी बताया। ये सभी टिप्पणियां उपमुख्यमंत्री के राजनीतिक दावे और आरोप हैं।
‘विकसित यूपी, विकसित अयोध्या’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में ब्रजेश पाठक ने कहा कि चुनाव आते ही विपक्षी दल कभी गठबंधन तो कभी अलग-अलग सामाजिक समीकरणों के नाम पर वोट मांगते हैं। उन्होंने सवाल किया कि विपक्ष अपने काम और उपलब्धियों के नाम पर वोट क्यों नहीं मांगता। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष में हिम्मत है तो वह अपनी ‘मेरिट’ के नाम पर वोट मांगे।
ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में अवधी भाषा का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने विपक्षी दलों की रणनीति की तुलना ऐसी दुकान से की, जिसका सामान खराब होने पर दुकानदार नाम बदलकर दूसरी जगह दुकान खोल लेता है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने विपक्षी गठबंधनों और राजनीतिक समीकरणों पर तंज किया। यह टिप्पणी राजनीतिक भाषण का हिस्सा थी और विपक्षी दलों का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं था।
उपमुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोग पिछली सरकारों के दौरान हुई घटनाओं को नहीं भूले हैं। पाठक ने अपने भाषण में दंगों और अपराध की घटनाओं का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर सवाल उठाए। हालांकि उनके भाषण में बताए गए आंकड़े और उदाहरण राजनीतिक दावों के रूप में सामने आए हैं और कार्यक्रम की रिपोर्ट में उनका स्वतंत्र तथ्यात्मक सत्यापन प्रस्तुत नहीं किया गया है।
परिवारवाद को लेकर सपा पर साधा निशाना
ब्रजेश पाठक के संबोधन का एक बड़ा हिस्सा परिवारवाद पर केंद्रित रहा। उन्होंने भाजपा को कार्यकर्ताओं की पार्टी बताते हुए कहा कि यहां सामान्य कार्यकर्ता भी संगठन में बड़े पद तक पहुंच सकता है। इसके विपरीत उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौजूदगी का जिक्र किया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सपा के नेताओं के नाम पूछे तो श्रोताओं की ओर से शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव, अखिलेश यादव और डिंपल यादव जैसे नाम लिए गए। पाठक ने इसे परिवारवाद का उदाहरण बताते हुए विपक्ष की संगठनात्मक व्यवस्था पर सवाल उठाया।
उन्होंने कांग्रेस को लेकर भी टिप्पणी की और पार्टी के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अपने भाषण में उन्होंने देश के कुछ अन्य राजनीतिक परिवारों और दलों का उदाहरण भी दिया। ये टिप्पणियां भाजपा नेता के राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं; संबंधित विपक्षी दल लंबे समय से भाजपा पर भी सत्ता और संगठन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक आरोप लगाते रहे हैं।
2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का किया जिक्र
ब्रजेश पाठक ने वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पिछली सरकारों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि पहले प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में माफिया सक्रिय थे और लोगों में असुरक्षा का माहौल था।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद कानून-व्यवस्था में बदलाव हुआ है। पाठक ने अपने संबोधन में दावा किया कि सरकार ने संगठित अपराध और माफिया के खिलाफ कार्रवाई की है। हालांकि कानून-व्यवस्था की स्थिति और सरकारों के प्रदर्शन का मूल्यांकन अलग-अलग सरकारी आंकड़ों और स्वतंत्र स्रोतों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अयोध्या से बताया अपना पुराना रिश्ता
राजनीतिक मुद्दों के साथ ब्रजेश पाठक ने अयोध्या से अपने पुराने संबंधों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वह पहले भी अयोध्या आते रहे हैं और उस समय शहर में सुविधाएं आज के मुकाबले काफी सीमित थीं।
उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या में कुछ ही बड़े होटल हुआ करते थे और बिजली आपूर्ति की स्थिति भी अलग थी। पाठक ने पुराने अयोध्या और मौजूदा अयोध्या की तुलना करते हुए प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया।
जागरण विमर्श का आयोजन अयोध्या के होटल क्रिनास्को में किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘विकसित यूपी, विकसित अयोध्या’ रखा गया था। इसमें अयोध्या के विकास, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, प्रशासन, सुरक्षा, रोजगार, पर्यटन और भविष्य की चुनौतियों पर अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समापन सत्र के मुख्य वक्ता थे।
मेडिकल कॉलेजों की संख्या पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
उपमुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1947 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 85 हो गई है। उन्होंने प्रदेश में दो एम्स होने का भी उल्लेख किया।
ब्रजेश पाठक उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उन्होंने लखनऊ के चिकित्सा संस्थानों का उदाहरण देते हुए स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार की बात कही।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए दावा किया कि प्रदेश में करीब 1.92 करोड़ विद्यार्थी बेसिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा हवाई संपर्क, एक्सप्रेसवे और रोजगार के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए कामों को भी उन्होंने अपने संबोधन में रखा।
17 हवाई अड्डे और रोजगार का दावा
ब्रजेश पाठक ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश में दो-तीन हवाई अड्डे थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है। उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट का भी जिक्र किया।
इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में मौजूद है। पाठक ने सरकारी नौकरियों को लेकर कहा कि प्रदेश में 9.5 लाख लोगों को योग्यता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नौकरी दी गई है। ये आंकड़े उनके भाषण में सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किए गए।
सरकारी नौकरियों के संदर्भ में ‘मेरिट’ को आधार बनाते हुए पाठक ने विपक्ष पर अपना राजनीतिक हमला दोहराया। उनका कहना था कि भाजपा सरकार में भर्ती प्रक्रिया में योग्यता को प्राथमिकता दी गई है और विपक्ष को भी अपने राजनीतिक संगठन और चुनावी दावों में मेरिट को आधार बनाना चाहिए।
अयोध्या के विकास पर दिनभर हुआ मंथन
जागरण विमर्श में केवल राजनीतिक मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई। कार्यक्रम के अलग-अलग सत्रों में अयोध्या के विकास और भविष्य की चुनौतियों पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने विचार रखे।
कार्यक्रम में अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्त, विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर समेत कई अतिथि शामिल हुए।
पहले सत्र में ‘विकसित अयोध्या’ विषय पर चर्चा हुई। इसके बाद भविष्य की चुनौतियां, वैश्विक आकर्षण के रूप में अयोध्या, इंफ्रास्ट्रक्चर एवं औद्योगिक विकास और प्रशासनिक व सुरक्षा चुनौतियों जैसे विषयों पर विमर्श रखा गया था।
कार्यक्रम के दौरान महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने अयोध्या में कई पीढ़ियों से रह रहे ऐसे आश्रयहीन परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने की योजना का भी जिक्र किया, जिनके पास अपना घर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में मुख्यमंत्री की ओर से सहमति मिली है।
2027 से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित है। ऐसे में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच परिवारवाद, रोजगार, कानून-व्यवस्था, सामाजिक प्रतिनिधित्व और विकास जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है।
ब्रजेश पाठक का अयोध्या में दिया गया संबोधन भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। उन्होंने भाजपा सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विपक्ष को मेरिट और काम के आधार पर चुनावी मैदान में उतरने की चुनौती दी। दूसरी ओर उनके भाषण में विपक्ष पर लगाए गए आरोपों को उपमुख्यमंत्री का राजनीतिक पक्ष समझना जरूरी है।
जागरण विमर्श के समापन सत्र में पाठक ने अयोध्या के बदलते स्वरूप, उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विस्तार तथा सरकारी भर्तियों को सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश किया। साथ ही परिवारवाद और पिछली सरकारों की कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।
आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार, विकास, सामाजिक समीकरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष अपने-अपने दावे जनता के सामने रखेंगे। मतदाताओं के लिए इन दावों का मूल्यांकन आधिकारिक आंकड़ों, नीतियों और उनके वास्तविक प्रभाव के आधार पर करना महत्वपूर्ण होगा।
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