उत्तर प्रदेश

2027 से पहले संगठन को मजबूत करने में जुटी BJP, कार्यकर्ताओं की नाराजगी बनी चिंता

nidhi
9 Oct 2026 8:42 AM IST
2027 से पहले संगठन को मजबूत करने में जुटी BJP, कार्यकर्ताओं की नाराजगी बनी चिंता
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झंडा हटाया, निर्दलीय लड़ने का ऐलान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने संगठन को मजबूत रखने, नाराज नेताओं को साथ लेकर चलने और सामाजिक समीकरणों को साधने की चुनौती सामने आ रही है। टिकट वितरण को लेकर असंतोष, कुछ नेताओं की खुली नाराजगी और विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध की खबरों ने पार्टी की चुनावी तैयारियों को चर्चा में ला दिया है। हाल ही में गोरखपुर के वरिष्ठ नेता संजयन त्रिपाठी ने एमएलसी चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया। उन्होंने अपनी गाड़ी से भाजपा का झंडा भी हटा दिया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति, विधायकों के कामकाज तथा संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक जुटा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव से पहले स्थानीय असंतोष को समझकर संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए।
टिकट नहीं मिलने पर संजयन त्रिपाठी की नाराजगी आई सामने
गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनाव का टिकट मांग रहे भाजपा नेता संजयन त्रिपाठी को पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया। भाजपा ने इस सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी को मैदान में उतारा। इसके बाद संजयन त्रिपाठी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की और अपनी गाड़ी से पार्टी का झंडा हटा दिया।
संजयन त्रिपाठी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने छह वर्षों तक पार्टी के प्रति वफादारी निभाई, लेकिन उनकी चिंता नहीं की गई। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से जमीनी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को समझने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्यकर्ता नाराज होते हैं, तो इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है। यह मामला संगठन के भीतर टिकट वितरण और पुराने कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व देने से जुड़ी बहस को सामने लाता है। हालांकि, एक नेता की नाराजगी से पूरे प्रदेश में पार्टी की स्थिति का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
100 से अधिक विधायकों को लेकर आंतरिक आकलन की चर्चा
भाजपा की चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के आंतरिक आकलन को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने अपने 255 मौजूदा विधायकों वाली सीटों पर जमीनी फीडबैक लिया है। इसमें 100 से अधिक विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष की बात सामने आने का दावा किया गया है।
पार्टी आगामी चुनाव में उम्मीदवारों का चयन करते समय केवल वरिष्ठता या पहले की जीत के बजाय क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता और कार्यकर्ताओं के फीडबैक को महत्व दे सकती है। युवाओं, महिलाओं और संगठन में सक्रिय नए चेहरों को भी अवसर देने पर विचार किए जाने की बात कही गई है। ये जानकारियां मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित हैं; भाजपा की ओर से सभी सीटों के लिए अंतिम उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हुई है।
सोशल इंजीनियरिंग के सामने क्या हैं चुनौतियां?
उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों की अहम भूमिका रही है। भाजपा के लिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाए रखना और संगठन के भीतर प्रतिनिधित्व को लेकर उठने वाली चिंताओं का समाधान करना महत्वपूर्ण होगा।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी का पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए का राजनीतिक विमर्श भी भाजपा की रणनीति के संदर्भ में चर्चा में रहा है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने संगठनात्मक बैठकों में जमीनी तैयारी, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने पर जोर दिया है। ऐसे में टिकट वितरण, स्थानीय नेताओं की नाराजगी और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसले चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। पार्टी के सामने एक ओर नए चेहरों को अवसर देने की चुनौती है, तो दूसरी ओर लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को संतुलित रखने की जरूरत भी है।
भाजपा के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठनात्मक बैठकों और क्षेत्रीय दौरों के जरिए चुनावी तैयारियां मजबूत कर रही है। पार्टी नेतृत्व के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि टिकट वितरण और संगठनात्मक बदलाव के दौरान असंतोष चुनावी अभियान को प्रभावित न करे। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नेताओं की नाराजगी भाजपा के सामाजिक समीकरणों को कितना प्रभावित करेगी। इसका आकलन पार्टी की आगे की रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और चुनाव प्रचार के दौरान सामने आने वाले घटनाक्रमों से ही किया जा सकेगा।
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