उत्तर प्रदेश

यूपी की 11 MLC सीटों पर BJP में मंथन

Kavita2
8 Aug 2026 10:08 AM IST
यूपी की 11 MLC सीटों पर BJP में मंथन
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 विधान परिषद (MLC) सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब तक पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, जबकि बाकी सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। कई सीटों पर दावेदारों की संख्या अधिक होने और स्थानीय समीकरणों के कारण पेंच फंसा हुआ है।

प्रत्याशी घोषित होने में हो रही देरी के बीच टिकट के दावेदारों ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात, संगठन के पदाधिकारियों से संपर्क और अपने पक्ष में स्थानीय समीकरण बनाने की कवायद लगातार जारी है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह तक BJP शेष सीटों के लिए भी अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है।

11 सीटों पर होना है चुनाव

शिक्षक-स्नातक कोटे की कुल 11 विधान परिषद सीटों पर चुनाव होना है। इन सीटों पर शिक्षक और स्नातक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। सामान्य विधानसभा चुनावों की तुलना में इन सीटों का चुनावी स्वरूप अलग होता है। यहां प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़, शिक्षक संगठनों और कर्मचारी समूहों से संबंध, स्थानीय मुद्दों की समझ और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रियता अहम भूमिका निभाती है।

इसी वजह से राजनीतिक दल उम्मीदवार चयन में विशेष सावधानी बरतते हैं। BJP के सामने भी यही चुनौती है कि ऐसे चेहरों को मैदान में उतारा जाए जो संबंधित सीट के मतदाता वर्ग के बीच मजबूत पकड़ रखते हों और संगठन के साथ भी प्रभावी तालमेल बना सकें।

पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित

BJP ने फिलहाल 11 में से पांच सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। बाकी छह सीटों को लेकर पार्टी स्तर पर चर्चा जारी है। जिन सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं, वहां कई दावेदार अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।

टिकट के इच्छुक नेताओं का एक बड़ा वर्ग संगठन में अपनी सक्रियता, शिक्षक या स्नातक समुदाय के बीच संपर्क और पिछले चुनावों में निभाई भूमिका को आधार बनाकर दावा पेश कर रहा है। कई दावेदारों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने अपने राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव का ब्योरा भी रखा है।

लखनऊ से दिल्ली तक लॉबिंग

टिकट की घोषणा में देरी के साथ ही दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। लखनऊ में प्रदेश संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात के अलावा दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

दावेदार अपने समर्थकों के माध्यम से भी पार्टी नेतृत्व को यह संदेश देने में जुटे हैं कि संबंधित क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत है। शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान भी तेज किया जा रहा है।

BJP के सामने एक ओर संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर जीतने की क्षमता रखने वाले प्रत्याशी का चयन करना भी जरूरी है। यही कारण है कि कई सीटों पर अंतिम निर्णय में समय लग रहा है।

कई सीटों पर फंसा है पेंच

शिक्षक-स्नातक कोटे की कई सीटों पर एक से अधिक मजबूत दावेदार होने के कारण टिकट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। कुछ क्षेत्रों में पुराने राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ शिक्षक संगठनों से जुड़े चेहरे भी टिकट की दौड़ में हैं।

पार्टी के सामने यह तय करना चुनौतीपूर्ण है कि संगठन के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ता को प्राथमिकता दी जाए या फिर ऐसे चेहरे को मैदान में उतारा जाए जिसकी शिक्षक अथवा स्नातक मतदाताओं के बीच पहले से मजबूत पकड़ हो।

इसके अलावा क्षेत्रीय समीकरण भी उम्मीदवार चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पार्टी यह भी देख रही है कि प्रत्याशी का सामाजिक आधार कितना व्यापक है और वह चुनाव में संगठन की मशीनरी का प्रभावी इस्तेमाल किस तरह कर सकता है।

शिक्षक और स्नातक मतदाताओं पर फोकस

इन चुनावों में शिक्षक और स्नातक मतदाता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए संभावित प्रत्याशियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है। मतदाता सूचियों, स्थानीय संगठनों और विभिन्न शिक्षक एवं स्नातक समूहों के साथ संवाद पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

दावेदारों की ओर से छोटी-बड़ी बैठकें आयोजित करने और व्यक्तिगत संपर्क अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। चुनाव की औपचारिक घोषणा और प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद यह गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

BJP के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

विधान परिषद की शिक्षक-स्नातक सीटों का चुनाव BJP के लिए संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी इन सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। इसके लिए उम्मीदवारों का चयन सबसे अहम चरण होगा।

BJP का संगठन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में पार्टी की कोशिश होगी कि घोषित किए जाने वाले उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य हों और चुनावी मुकाबले में मजबूत चुनौती पेश कर सकें।

अगले सप्ताह तक तस्वीर साफ होने की उम्मीद

पार्टी के भीतर चल रहे मंथन के बीच अब दावेदारों की नजर केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह तक बाकी सीटों पर भी प्रत्याशियों के नाम सामने आ सकते हैं। नामों की घोषणा होते ही संबंधित क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी।

उम्मीदवारों की घोषणा के बाद टिकट से वंचित रहने वाले दावेदारों को साथ रखना भी पार्टी के लिए चुनौती होगी। संगठन को यह सुनिश्चित करना होगा कि टिकट न मिलने से नाराज नेता या समर्थक चुनावी समीकरण को प्रभावित न करें।

टिकट के साथ शुरू होगी असली चुनावी परीक्षा

फिलहाल BJP ने 11 में से पांच सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, जबकि बाकी सीटों पर फैसला होना बाकी है। लखनऊ से दिल्ली तक दावेदारों की सक्रियता यह बताती है कि टिकट को लेकर मुकाबला कितना कड़ा है।

आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम सामने आने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि BJP ने किन सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को प्राथमिकता दी है। शिक्षक-स्नातक कोटे की इन 11 सीटों पर मुकाबला केवल प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की संगठनात्मक क्षमता और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ की भी परीक्षा होगा।

अब सभी की नजर अगले सप्ताह संभावित उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी है। इसके बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षक और स्नातक कोटे की इन सीटों को लेकर चुनावी तापमान और बढ़ने की उम्मीद है।

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